BMC चुनाव में शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं होने की वजह से वोट बँटे। क्या इससे ही बीजेपी-शिंदे शिवसेना को बड़ा फायदा हुआ?
बीएमसी यानी बृहन्मुंबई महानगरपालिका के चुनावों में विपक्ष के वोट बंटवारे ने बड़ा खेल कर दिया। उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटने से वोटों का विभाजन हुआ, जिससे कम से कम 32 वार्डों में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को फायदा पहुँचा। इतना फायदा कि जीत दिला गया। इन वार्डों में शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के वोट बीजेपी या शिंदे की शिवसेना के उम्मीदवारों के वोट या उनकी जीत के अंतर से ज़्यादा थे।
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी उम्मीदवार वार वोटिंग डेटा में यह साफ़ दिखता है। बीएमसी में कुल 227 वार्ड हैं। चुनाव परिणामों में बीजेपी ने 89 सीटें जीतीं, शिंदे शिवसेना ने 29। महायुति गठबंधन ने कुल 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया। उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी को 65 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 24, एमएनएस को 6 और अन्य छोटे दलों को बाकी सीटें। यह ठाकरे परिवार की 25-30 साल पुरानी बीएमसी पर पकड़ का अंत है।
विपक्षी गठबंधन क्यों टूटा?
उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की एमएनएस से गठबंधन किया, जिससे कांग्रेस अलग हो गई। कांग्रेस ने प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी यानी वीबीए से हाथ मिलाया। इससे विपक्षी वोट बंट गए, खासकर मराठी और गैर-मराठी वोटरों में। शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस के बीच वोटों के विभाजन को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस ने इन आँकड़ों का विश्लेषण किया है। इससे भाजपा व शिंदे शिवसेना गठबंधन को फायदा हुआ।
इन प्रमुख वार्डों में वोट बंटवारा
- दहिसर वेस्ट वार्ड नंबर 1: शिंदे शिवसेना की राखा यादव ने 2474 वोटों से जीत हासिल की। कांग्रेस की शीतल म्हात्रे को 5070 वोट मिले, जबकि शिवसेना यूबीटी की फोरम परमार 4314 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहीं। अगर यूबीटी और कांग्रेस साथ होते तो शायद जीत बदल सकती थी।
- अंधेरी वेस्ट वार्ड नंबर 63: बीजेपी के रूपेश सावरकर ने 9193 वोट पाकर सिर्फ 538 वोटों से जीत दर्ज की। यूबीटी के देवेंद्र अंबरकर को 8655 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की प्रियंका सनाप को 4380 वोट। वोट बंटवारे ने भाजपा की राह आसान की।
- घाटकोपर वार्ड नंबर 129: भाजपा की अश्विनी माते ने 9815 वोटों के साथ जीत हासिल की। एमएनएस की विजया गीते को 6793 और कांग्रेस की तृप्ति मटेले को 6467 वोट मिले।
- घाटकोपर ईस्ट वार्ड नंबर 133: शिंदे शिवसेना की निर्मिति कांडे ने 11295 वोटों के साथ जीत दर्ज की। वीबीए की सुप्रिया जाधव को 8656 वोट मिले, जबकि एमएनएस को 4488 वोट मिले।
- बांद्रा ईस्ट वार्ड नंबर 96: अजित पवार की एनसीपी की आयेशा खान ने 2722 वोटों से जीत हासिल की। कांग्रेस के शबन जाकिर को 4440 वोट मिले, जबकि यूबीटी की सना खान को 4040 वोट मिले।
- मांकुर्ड वार्ड नंबर 135: भाजपा के नवनाथ बन ने 2058 वोटों से जीत दर्ज की। एआईएमआईएम और यूबीटी ने क्रमशः 3520 और 3518 वोट लिए।
- धारावी वार्ड नंबर 188: शिंदे शिवसेना के भास्कर शेट्टी ने एआईएमआईएम को सिर्फ 478 वोटों से हराया। कांग्रेस और एमएनएस ने 5007 और 1396 वोट लिए।
बीजेपी को 21, शिंदे शिवसेना को 10 वार्डों में फायदा
इस तरह बीजेपी को 21 वार्डों में, शिंदे शिवसेना को 10 में और एनसीपी को एक वार्ड में वोट बंटवारे से फायदा हुआ। परिणामों के बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को 24 सीटें जीतने पर बधाई दी, लेकिन गठबंधन टूटने के असर पर टिप्पणी से बचते हुए कहा, 'राजनीति में अगर-मगर पर बात नहीं करते।' यूबीटी मानती है कि एमएनएस से गठबंधन मराठी वोट को मजबूत करने के लिए जरूरी था।
कांग्रेस के मुंबई प्रमुख प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि अगर गठबंधन बना रहता तो नतीजे अलग हो सकते थे। उन्होंने कहा, 'उद्धवजी ने राज ठाकरे से हाथ मिलाया, हमारे लिए उनके साथ जाना मुश्किल था। ठाकरे भाइयों के साथ जाने से हमें ज्यादा नुकसान होता। अलग लड़ना सही फैसला था।'
यह चुनाव मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया है। माना जा रहा है कि विपक्ष की एकता की कमी और वोट बंटवारे ने महायुति की जीत आसान की।