महाराष्ट्र में ‘लाडकी बहिन योजना’ के तहत 68 लाख खातों को बंद करने का फैसला क्यों लिया गया? जानें सरकार का तर्क, लाभार्थियों पर असर और पूरी सच्चाई।
फडणवीस सरकार तीन भाषा नीति हिंदी विरोध
महाराष्ट्र में चुनाव से ऐन पहले शुरू की गई लाडकी बहिन योजना में 68 लाख नाम क्यों काट दिए गए? क्या चुनाव ख़त्म तो योजना भी भूल जाओ? विपक्षी दल तो कम से कम ऐसे ही आरोप लगा रहे हैं। लेकिन 68 लाख नाम काटे जाने के मामले में कारण बताया गया है कि ये तय समय तक ई-केवाईसी नहीं जमा कर पाए।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार ही ई-केवाईसी पूरा न करने वाली लगभग 68 लाख महिलाओं के खाते बंद कर दिए गए हैं। इसके बाद योजना के सक्रिय खातों की संख्या घटकर 1.75 करोड़ रह गई है। पहले कुल 2.43 करोड़ खाते थे।
क्या है पूरा मामला?
सरकार ने 31 मार्च 2026 की आखिरी तारीख़ रखी थी कि सभी लाभार्थी अपना ई-केवाईसी पूरा कर लें। जो महिलाएं समय पर ई-केवाईसी नहीं कर पाईं, उनके खाते बंद कर दिए गए। हालाँकि अब सरकार ने इस डेडलाइन को 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया है। इसलिए बंद हुए खातों की संख्या में बदलाव हो सकता है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने बताया, 'कुल 2.43 करोड़ खातों में से करीब 68 लाख खाते ई-केवाईसी न पूरा करने के कारण बंद कर दिए गए हैं।'
क्यों हुई सख्ती?
सरकार को कई शिकायतें मिली थीं कि योजना का फायदा पुरुष सदस्यों और सरकारी कर्मचारियों जैसे अयोग्य लोगों को भी मिल रहा है। इसीलिए पूरे राज्य में सत्यापन अभियान चलाया गया। पहले 24 लाख लाभार्थियों को गलती से सरकारी कर्मचारी दिखा दिया गया था। कारण था कि मराठी में पूछे गए एक सवाल का गलत जवाब मिल गया था। बाद में जांच में 20 लाख खाते सही पाए गए। बाकी मामलों की जांच अभी चल रही है।
योजना पर कितना खर्च हो रहा है?
हर महीने सरकार 3700 करोड़ रुपये के आसपास लाभार्थियों को बांटती है। हर योग्य महिला को हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। 2025-26 में योजना पर 36000 करोड़ रुपये का बजट था। 2026-27 में बजट घटाकर 26000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। लाडकी बहिन योजना महायुति सरकार ने 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की थी। इस योजना के तहत गरीब परिवार की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं।
यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई थी और शुरू से ही काफी चर्चा में रही। अभी तक लाखों महिलाओं को इसका फायदा मिल चुका है, लेकिन अब सख्त सत्यापन के कारण कुछ खाते बंद हो गए हैं।
लगातार सवाल उठने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ कहा है कि लाडकी बहिन योजना बंद नहीं होगी। सरकार ने फैसला लिया है कि जिन्हें गलती से फायदा मिल गया था, उनसे पैसे वापस नहीं लिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि सिर्फ सही और योग्य महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलना चाहिए, ताकि सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल हो।
योजना पर क्या क्या हुए हैं विवाद?
यह योजना शुरू होने के कुछ समय बाद ही बड़े विवाद में फँस गई थी जिसमें अपात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ दे दिया गया था। इसमें 14000 से ज़्यादा पुरुषों को महिलाओं के लिए बनी योजना का लाभ मिला। उन्होंने फर्जी दस्तावेज से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। रिपोर्टों के अनुसार अक्टूबर 2025 में आरटीआई से खुलासा हुआ कि 12431 पुरुषों को 13 महीने तक 1500 प्रति माह माह मिले और क़रीब 24 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा 77980 अपात्र महिलाओं को 140 करोड़ रुपये दिए गए। 26.34 लाख अपात्र लाभार्थी पाए गए, जिनमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल थीं। इनमें से कई खातों पर रोक लगाई गई और वसूली शुरू हुई।
चुनाव से पहले शुरू हुई योजना पर चुनावी दुरुपयोग और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया था। 2024 विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई योजना को 'वोट खरीदने की स्कीम' कहा गया। 2026 नगर निगम चुनावों से पहले अग्रिम किस्त जारी करने पर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने रोक लगाई। विपक्ष इसको लगातार मुद्दा बनाता रहा है।