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महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस वैरिएंट के 7 केस मिले, अधिकतर एक ज़िले में

महाराष्ट्र में इसी हफ़्ते डेल्टा प्लस वैरिएंट के कारण कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई गई थी और अब इस नये वैरिएंट यानी डेल्टा प्लस के कम से कम 7 मामले सामने आए हैं। इसमें से अधिकतर एक ही ज़िले में हैं। यह चिंता की वजह इसलिए है कि यह नया वैरिएंट उसी डेल्टा वैरिएंट का नया रूप है जिसे देश में कोरोना की दूसरी लहर में तबाही लाने के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है। शोध में तो यह सामने आ रहा है कि डेल्टा वैरिएंट जहाँ शरीर के इम्युन सिस्टम से बच निकलता था वहीं इसके नये वैरिएंट पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज कॉकटेल दवा भी निष्प्रभावी साबित हो सकती है। इस दवा के बारे में कहा जा रहा है कि यह कोरोना मरीज पर एक दिन में ही काफ़ी ज़्यादा प्रभावी साबित हो रही है। 

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राज्य में डेल्टा प्लस वैरिएंट के ये जो सात मामले आए हैं वे सिर्फ़ तीन क्षेत्रों- रत्नागिरि, नवी मुंबई और पालघर से लिए गए सैंपल के आधार पर हैं। इस सात में से पाँच मामले तो रत्नागिरि क्षेत्र के सैंपल में मिले हैं। यह वह ज़िला है जो महाराष्ट्र में हाल तक सबसे ज़्यादा प्रभावित था। दस दिन पहले तक वहाँ पॉजिटिविटी रेट काफ़ी ज़्यादा 13.7 फ़ीसदी था जबकि तब पूरे राज्य का औसत 5.8 फ़ीसदी ही था। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय यानी डीएमईआर के निदेशक डॉ. टी पी लहाने ने कहा, 'हमें नवी मुंबई, पालघर और रत्नागिरी में डेल्टा-प्लस के मामले मिले। उसके बाद हमने और नमूने भेजे, लेकिन अंतिम रिपोर्ट का इंतज़ार है।

यह रिपोर्ट तब आई है जब तीन दिन पहले ही राज्य के टास्क फोर्स ने आशंका जताई है कि यदि कोरोना को लेकर लापरवाही बरती गई तो एक या दो महीने में तीसरी लहर आ जाएगी। इस संभावित तीसरी लहर का जो कारण बनेगा वह होगा नया वैरिएंट 'डेल्टा प्लस'। डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले आने के बीच ही महाराष्ट्र में संभावित तीसरी लहर के लिए तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की गई थी। उस बैठक में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे। उसमें मुख्यमंत्री को बताया गया कि बेहद तेज़ी से फैलने वाला डेल्टा प्लस वैरिएंट राज्य में तीसरी लहर ला सकता है। 

राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने तब कहा था कि पहली लहर से कहीं ज़्यादा संक्रमण के मामले दूसरी लहर में आए थे और ऐसा डेल्टा वैरिएंट की वजह से हुआ था। उन्होंने आशंका जताई है कि तीसरी लहर में और ज़्यादा संख्या में कोरोना के मरीज़ आ सकते हैं।

राज्य में पहली लहर में 19 लाख संक्रमण के मामले दर्ज किए गए थे जबकि दूसरी लहर में क़रीब 40 लाख पॉजिटिव केस दर्ज किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने चिंता जताई है कि तीसरी लहर में सक्रिए मामलों की संख्या क़रीब 8 लाख तक पहुँच सकती है और इसमें से क़रीब 10 फ़ीसदी बच्चे होंगे।

maharashtra traces 7 cases of covid delta plus variant  - Satya Hindi

महाराष्ट्र के अधिकारियों की चिंता की वजह डेल्टा प्लस इसलिए है कि शुरुआती शोध के आधार पर इसे डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा घातक माना जा रहा है। ऐसा इसलिए कि डेल्टा वैरिएंट नाम से प्रचलित बी.1.617.2 वैरिएंट को भारत में दूसरी लहर के लिए ज़िम्मेदार माना गया। 

भारत में जब दूसरी लहर अपने शिखर पर थी तो हर रोज़ 4 लाख से भी ज़्यादा संक्रमण के मामले रिकॉर्ड किए जा रहे थे। देश में 6 मई को सबसे ज़्यादा 4 लाख 14 हज़ार केस आए थे। यह वह समय था जब देश में अस्तपाल बेड, दवाइयाँ और ऑक्सीजन जैसी सुविधाएँ भी कम पड़ गई थीं। ऑक्सीजन समय पर नहीं मिलने से बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हुईं। अस्पतालों में तो लाइनें लगी ही थीं, श्मशानों में भी ऐसे ही हालात थे। इस बीच गंगा नदी में तैरते सैकड़ों शव मिलने की ख़बरें आईं और रेत में दफनाए गए शवों की तसवीरें भी आईं।

अब तक कई देशों में इस वैरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं। इसी डेल्टा वैरिएंट में के417एन म्यूटेंट जुड़ गया है और यही नया रूप डेल्टा प्लस है। हालाँकि इसे 'वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न' नहीं घोषित नहीं किया गया है और इसे फ़िलहाल 'वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट' कहा गया है। इसका मतलब है कि इस वैरिएंट पर गहन निगरानी रखे जाने की ज़रूरत है।

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बता दें कि इंस्टीट्यूट ऑफ़ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी यानी आईजीआईबी में चिकित्सक और कम्प्यूटेशनल जीवविज्ञानी डॉ. विनोद स्कारिया ने हाल ही में डेल्टा प्लस स्ट्रेन को लेकर सचेत किया है। उनका कहना है कि के417एन के संबंध में विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इस पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज कॉकटेल दवा के निष्क्रिय होने के सबूत मिल रहे हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज कॉकटेल दवा को स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ से मंजूरी मिली हुई है। 

अब यदि इसके नये स्ट्रेन डेल्टा प्लस पर दवाओं का असर भी नहीं होगा तो इसके घातक ज़्यादा होने के ख़तरे तो रहेंगे।

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