नासिक जैसा शांत औद्योगिक शहर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़ी बीपीओ यूनिट यौन उत्पीड़न केस से हिल गया है, जहां रेप, कथित सिलसिलेवार यौन उत्पीड़न और संगठित धार्मिक दबाव के आरोपों की आपराधिक जांच हो रही है। लेकिन इस केस के घटनाक्रम चौंकाने वाले रहे हैं।
नासिक पुलिस ने अब तक नौ एफआईआर दर्ज की हैं और बीपीओ फर्म के आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें सात पुरुष और एक महिला ऑपरेशन मैनेजर शामिल हैं। पुलिस ने 26 वर्षीय निदा खान को कथित धर्मांतरण प्रयासों के पीछे "मास्टरमाइंड" बताया है। लेकिन परिवार पुलिस के दावों को गलत बता रहा है। परिवार ने आरोप लगाया है कि निदा के साथ साजिश और डिजिटल उत्पीड़न किया गया है।
पुलिस का दावा है कि एक गुप्त अभियान के बाद बीपीओ के भीतर कथित संगठित गतिविधियों का खुलासा हुआ। फरवरी की शुरुआत में कुछ कर्मचारियों द्वारा किए गए कुछ कथित कृत्यों के बारे में सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई। पुलिस का दावा है कि उसने अपने जासूस इस बीपीओ में तैनात किए। पुलिस का दावा है कि उसने नियमित कर्मचारियों के वेश में टीसीएस दफ्तर और बैठकों की निगरानी की और सारे मामलों की जानकारी अपने वरिष्ठों को दी। उनके निर्देश पर कार्रवाई की गई।
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निदा खान के बारे में हैरानी भरा तथ्य

नासिक पुलिस पिछले एक हफ्ते से मीडिया को तमाम कहानियां निदा खान के बारे में बता रही थी। उसने बताया कि निदा खान एच आर मैनेजर है, वो फरार है, वही मास्टरमाइंड है। लेकिन अब जो तथ्य सामने आए वो चौंकाने वाले हैं। निदा के परिवार ने हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि  निदा खान घर पर ही हैं और गर्भवती हैं। इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि वो एचआर टीम में भी नहीं हैं, बल्कि टेलीकॉलर हैं और सेल्स टीम का हिस्सा हैं। इस तरह पुलिस और मीडिया का एक बड़ा वर्ग अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच गया है। इस केस को धर्म विशेष से जोड़कर मीडिया ट्रायल किया जा रहा है। नासिक में आसानी से निदा खान के घर जाकर इन तथ्यों की पुष्टि मीडिया कर सकता था, लेकिन वो ज़िम्मेदारी से भाग गया।
पहली एफआईआर 26 मार्च को देवलाली पुलिस स्टेशन में 23 वर्षीय एक कर्मचारी ने दर्ज कराई थी। उसने अपने वरिष्ठ सहकर्मी दानिश शेख पर शादी का झूठा वादा करके बार-बार रेप करने का आरोप लगाया। दानिश ने यह बात नहीं छिपाई कि वह पहले से शादीशुदा है। इस शिकायत के बाद, एक पुरुष सहित आठ और कर्मचारियों ने यौन, मानसिक और धार्मिक उत्पीड़न की घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराई। हालांकि नासिक पुलिस इसे अपने जासूसी हथकंडे का हिस्सा बता रही है। 

पुलिस के बयान का मुख्य फोकस निदा खान हैं। जिन्हें नासिक पुलिस ने धार्मिक उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार एक उच्च पदस्थ साजिशकर्ता के रूप में बताया है। लेकिन अब हिंदुस्तान टाइम्स ने सच्चाई बताई है कि निदा खान फिलहाल मुंबई स्थित अपने घर में हैं और अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रही हैं, और वह "फरार" नहीं हैं। पुलिस के पास निदा खान के बारे में यह जानकारी है नहीं। वो उन्हें फरार बता रही थी। लेकिन निदा के चाचा ने बताया कि अभी तक कोई भी पुलिस अधिकारी उसकी तलाश में उनके दरवाजे पर नहीं आया है।

नासिक पुलिस ने निदा की प्रोफेशनल लाइफ के बारे में गलत जानकारी फैलाई। परिवार ने पुलिस द्वारा उनके प्रोफेशनल पद के विवरण को भी चुनौती दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में उन्हें "एचआर हेड" बताया गया है, जबकि परिवार का दावा है कि उनकी तस्वीर इंस्टाग्राम से ली गई थी और उस पर एचआर को जोड़ा गया था। कई सूत्रों और परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह सेल्स टीम में टेलीकॉलर थीं और एचआर विभाग से उनका कोई संबंध नहीं था। कॉमर्स में ग्रैजुएट और वर्तमान में एमबीए कर रही निदा खान जनवरी में अपने पति के साथ रहने के लिए मुंबई आई थीं। जानकारी के अनुसार, उनके वकील निदा की अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया में हैं।

सही तथ्य देर से सामने क्यों आए

निदा खान ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि “पुलिस द्वारा इस पूरे मामले को सार्वजनिक करने के बाद पहले कुछ दिनों तक हमें लगा कि शायद इसी नाम की कोई और महिला भी हो सकती है जिसके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया हो, लेकिन फिर उसने खुद हमें बताया कि उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हमारे पूरे परिवार को बहुत मानसिक आघात पहुंचा है।” दर्ज की गई नौ एफआईआर में से, निदा खान का नाम धार्मिक उत्पीड़न से संबंधित 26 मार्च को देवलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एक एफआईआर में शामिल है।

टीसीएस भी कर रहा है अपनी जांच

टीसीएस कंपनी ने अब अपनी आंतरिक जांच शुरू कर दी है। लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले, किसी अदालत में दोषी साबित होने से पहले ही मात्र पुलिस केस बनने पर टीसीएस ने गिरफ्तार किए गए आठ कर्मचारियों में से सात को बर्खास्त कर दिया है और कहा है कि इस तरह के व्यवहार के प्रति उसकी ज़ीरो टॉलरेंस नीति है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने आरोपों को "बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक" बताया है। टीसीएस की सीओओ आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में एक आंतरिक जांच की जा रही है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि उसके पास यौन शोषण के खिलाफ एक सक्रिय आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) है, लेकिन हैरानी की बात है कि एफआईआर दर्ज कराने वाले कथित पीड़ितों ने इस समिति के सामने शिकायत की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई।

सुप्रीम कोर्ट याचिका, महिला आयोग भी सक्रिय

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया, क्योंकि भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका में तर्क दिया गया है कि यह मामला राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा पैदा कर सकता है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी एक रिटायर्ड जज सहित एक तथ्य-जांच समिति का गठन किया है। उधर, यूपी में धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों के बाद धड़ाधड़ एफआईआर दर्ज हो रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो दिन पहले ही इस प्रवृत्ति पर चिन्ता जताई है। उसने यूपी सरकार को इस मुद्दे पर फटकार भी लगाई है।

बजरंग दल का नाम क्यों आ रहा है

आरोपी रज़ा मेमन के चाचा ने आरोप लगाया है कि टीसीएस के कर्मचारियों से जुड़ा नासिक का मामला “मनगढ़ंत” है और एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। उनका दावा है कि इसमें हिंदुत्ववादी समूहों की संलिप्तता है। मीडिया से बात करते हुए रजाक काज़ी ने कहा, “सभी परिवार परेशान हैं। सब कुछ एक साजिश के तहत हो रहा है… इसमें बजरंग दल की संलिप्तता है… लड़की के परिवार ने बजरंग दल को फोन किया… जांच के बाद एक व्यक्ति बच गया था और फिर उसे पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया… जो कुछ भी हुआ वह सब मनगढ़ंत था।”
काज़ी ने आगे दावा किया कि मामले को उसके शुरुआती दायरे से कहीं अधिक बढ़ा दिया गया है और कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उनकी यह टिप्पणी आरोपी के कुछ रिश्तेदारों द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच आई है कि जांच में उन व्यक्तियों को अनुचित रूप से फंसाया गया है जिनका मूल शिकायत से सीधा संबंध नहीं है। 
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आरोपियों के परिवार के सदस्यों के हवाले से आई रिपोर्टों से पता चलता है कि मामला निजी रिश्ते के विवाद से शुरू हुआ। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आरोपियों में से एक की पत्नी ने कहा कि यह मामला एक कर्मचारी और शिकायतकर्ता के बीच बिगड़े रिश्ते से उपजा, जो उनके अनुसार कई अन्य मामलों में तब्दील हो गया। बचाव पक्ष के वकील बाबा सैयद ने भी घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला 26 मार्च को धारा 376 के तहत रेप की शिकायत से शुरू हुआ और थोड़े ही समय में कई एफआईआर दर्ज हो गईं। उन्होंने कहा कि आरोपी और शिकायतकर्ता कॉलेज के समय से एक-दूसरे को जानते थे और मतभेद होने से पहले उनके बीच आपसी सहमति से संबंध थे। यानी आरोपी दानिश के टीसीएस की ही एक कर्मचारी से पहले संबंध थे। जब दानिश ने उससे शादी नहीं की तो महिला ने अपने परिवार को बताया। परिवार ने हिन्दू संगठनों को सूचित किया और इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। लेकिन पुलिस ने जिस रूप में इसे मीडिया के सामने पेश किया, वो देशभर में चर्चा और मुस्लिमों को टारगेट किए जाने का हथियार बन गया। अब इसमें आतंकवाद का पहलू भी पुलिस ने डाल दिया है।