शराब की दुकानें खोलकर हमारी केंद्र सरकार और राज्य सरकारें बुरी तरह बदनाम हो रही हैं।
अब से 60-70 साल पहले शराब की कलालियां मोहल्लों के बाहर किसी दूर-दराज के कोने में हुआ करती थीं लेकिन अब इसकी दुकानें बाजारों और बस्तियों में हैं। इसीलिए शराबियों की लंबी कतार लोगों का ध्यान खींच रही हैं।
लॉकडाउन को ढीला करते ही सरकारों ने शराब की दुकानें खुलवा दीं। क्योंकि शराब से उन्हें लगभग दो लाख करोड़ रुपये टैक्स मिलता है।