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नड्डा-मोदी की बीजेपी पदाधिकारियों के साथ बैठक, चुनावी राज्यों पर रहा फ़ोकस

उत्तर प्रदेश में चल रही तमाम सियासी उथल-पुथल से यह पता चलता है कि बीजेपी जोर-शोर से चुनावी तैयारियों में जुट गयी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को राष्ट्रीय महासचिवों के साथ बैठक की। इससे पहले शनिवार को भी नड्डा ने पार्टी के मोर्चों के अध्यक्षों के साथ बैठक की थी। 

रविवार की बैठक में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष, महासचिव शिव प्रकाश, अरुण सिंह, सीटी रवि, डी. पुरंदेश्वरी, दिलीप सैकिया, तरुण चुघ, दुष्यंत गौतम, कैलाश विजयवर्गीय और भूपेंद्र यादव मौजूद रहे। 

ख़बरों के मुताबिक़, बैठक में पार्टी की ओर से तय किए गए कार्यक्रमों और अभियानों को जनता के बीच में ले जाने को लेकर तो चर्चा हुई ही, 2022 की शुरुआत में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर विशेष मंथन किया गया। फरवरी, 2022 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। 

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उसके बाद साल के आख़िर में हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं। पार्टी जानती है कि 2024 के आम चुनाव से पहले इन राज्यों में फतेह हासिल करना बेहद ज़रूरी है वरना राह मुश्किल हो जाएगी। 

एएनआई के मुताबिक़, दो दिन तक चली इन बैठकों में हालांकि कोरोना संकट के दौरान पार्टी के द्वारा ‘सेवा ही संगठन’ अभियान के तहत चलाए गए कार्यक्रम की चर्चा हुई लेकिन चुनावी राज्यों में रणनीति बनाने के साथ ही तमाम मोर्चा के अध्यक्षों को इन राज्यों के लिए जिम्मेदारियां भी दी गईं। 

इन बैठकों के बाद नड्डा, बीएल संतोष बीजेपी के तमाम मोर्चों के अध्यक्षों के साथ प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर पहुंचे और उनसे मुलाक़ात की और यह मुलाक़ात 4 घंटे तक चली। 

देखिए, यूपी के सियासी हाल पर चर्चा- 

राज्यों की सियासी गणित 

पंजाब में बीजेपी की राह मुश्किल है क्योंकि वहां कृषि क़ानूनों के कारण शिरोमणि अकाली दल ने उसका साथ छोड़ दिया है जबकि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मणिपुर और गोवा में उसकी सरकार है। पार्टी को कोरोना संकट के दौरान सरकार की नाकामी को लेकर उठे सवालों के बीच ही इन राज्यों में सत्ता में फिर से वापसी की गणित को बुनना है। 

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बीएल संतोष ने हाल ही में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का दौरा किया है। उत्तर प्रदेश में उनके दौरे के बाद सियासी अटकलों का बाज़ार गर्म है और बीजेपी सरकार और संगठन में बड़े बदलाव होने की बात कही जा रही है। उत्तराखंड में पार्टी ने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों को बदल दिया है। मणिपुर और गोवा में बड़ी संख्या में कांग्रेस के विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे। 

संकेत साफ हैं कि पार्टी चुनावी राज्यों को लेकर गंभीर है लेकिन उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजों से लेकर किसान आंदोलन और कोरोना महामारी के दौरान मचे त्राहिमाम को लेकर वह चिंतित है और इससे निपटने के लिए बड़ी योजना पर काम कर रही है। 

बंगाल चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी इन चुनावी राज्यों के लिए बेहद गंभीर हो गई है और बीते दिनों में बढ़ी उसकी सक्रियता इसे बताती भी है। तय है कि बीजेपी आने वाले कुछ महीनों में ज़्यादा सक्रिय दिखेगी और चुनावी राज्यों में फ़तेह हासिल करने के लिए पूरा जोर लगाएगी।

संघ ने भी की बैठक

बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी हाल ही में तीन दिवसीय बैठक दिल्ली में की है। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित तमाम बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर संघ के पदाधिकारियों ने मंथन किया। 

उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर कुछ दिन पहले भी संघ ने बीजेपी के बड़े नेताओं से मुलाक़ात की थी। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। इसके अलावा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और उत्तर प्रदेश बीजेपी के संगठन (महामंत्री) सुनील बंसल भी बैठक में शामिल रहे थे। कहा गया था कि बैठक में कोरोना काल के दौरान जनता के बीच बनी धारणा को लेकर बीजेपी और संघ ने चिंता जताई थी।

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