नारी शक्ति वंदन अधिनियम या महिला आरक्षण कानून सितंबर 2023 में पारित हुआ था, लेकिन अब इसमें संशोधन कर लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किए जाने की ख़बरें हैं। तो क्या यह ध्यान भटकाने के लिए है? कांग्रेस के आरोप क्या?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अपनी विदेश नीति की विफलताओं के कारण आई एलपीजी संकट से ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार अब महिला आरक्षण का मुद्दा ले आई है। कांग्रेस ने कहा है कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया तो कांग्रेस ने 2024 में इसे लागू करने की मांग की थी। लेकिन सरकार ने परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू किए जाने की बात कही। पार्टी ने पूछा है कि तो अब परिसीमन और जनगणना किए बिना सरकार ऐसा क्यों कर रही है?
संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम या महिला आरक्षण कानून सितंबर 2023 में पारित हुआ था। केंद्र सरकार अब इस कानून में सुधार करने की तैयारी में है। रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटें बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं और इन बढ़ी हुई 273 अतिरिक्त सीटों को सीधे महिलाओं के लिए आरक्षित किया जा सकता है। प्रस्ताव के अनुसार यह 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू हो सकता है।
संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि इसका पूरा राजनीतिक फायदा उठाने के लिए सरकार ने संकेत दिया है कि अगले पखवाड़े में नारी वंदन अधिनियम में जरूरी संशोधन पास करने के लिए संसद का विशेष दो-दिवसीय सत्र बुलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने मोदी सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि पहले 29 अप्रैल को मौजूदा विधानसभा चुनावों का दौर पूरा होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। जिसमें प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की भी योजना बना रही है। इस पर भी गंभीर विचार-विमर्श की ज़रूरत है।
एलपीजी संकट कैसा?
कांग्रेस का यह ताज़ा आरोप ऐसे समय में आया है जब देश में एलपीजी की कमी की ख़बरें आ रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। बीजेपी शासित गुजरात के सूरत शहर में पेट्रोल के लिए लंबी लाइन देखी गई। लोग वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। लेकिन सरकार ने कहा कि एलपीजी, पेट्रोल, डीज़ल का कोई संकट नहीं है। हालांकि सरकार को बुधवार को कई बार सफाई देनी पड़ी और नया आदेश जारी करना पड़ा।
'पाइप गैस कनेक्शन है तो सिलेंडर नहीं मिलेगा'
मोदी सरकार ने बुधवार को ताज़ा आदेश दिया है कि जहाँ पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी उपलब्ध है, वहाँ उपभोक्ताओं द्वारा इस पर स्विच न करने की स्थिति में एलपीजी की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा 25 मार्च को जारी नए आदेश के तहत किसी घर को पीएनजी उपलब्ध होने की सूचना मिलने के बाद उसके पास विकल्प चुनने के लिए केवल तीन महीने का समय होगा। यदि इस दौरान पीएनजी नहीं लिया गया तो उस पते पर एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह बंद होने का जोखिम रहेगा।इसी बीच, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को कहा कि 2023 में पास किया गया नारी वंदन अधिनियम अब बिना परिसीमन और जनगणना के लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार का पूरा यू-टर्न है।
कांग्रेस नेता ने कहा, 'सितंबर 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर नारी वंदन अधिनियम, 2023 पास किया गया था। इसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों पर भी महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिलेगा। लेकिन यह सब परिसीमन और जनगणना पूरी होने के बाद ही लागू होना था।'
उन्होंने आगे कहा, 'जब इस पर संसद में बहस हो रही थी, तब कांग्रेस ने मांग की थी कि इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू कर दिया जाए। लेकिन मोदी सरकार ने साफ़ कहा था कि यह संभव नहीं है। पहले परिसीमन और जनगणना दोनों जरूरी हैं। अब 30 महीने बाद अचानक सरकार का मन बदल गया है। बिना परिसीमन और जनगणना कराए ही आरक्षण लागू करना चाहते हैं।'
रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री जनध्यान भटकाने वाले हथियार यानी Weapons of Mass Diversion चलाने में माहिर हैं। वे पहले भी कई बार ऐसा कर चुके हैं। अब फिर वही कर रहे हैं। अपनी विदेश नीति की विफलताओं और देश के सामने खड़े एलपीजी तथा ऊर्जा संकट से ध्यान हटाने के लिए यह नई पहल लाई गई है।'
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का भी जिक्र किया। जयराम रमेश ने कहा, 'अब एमसीसी मोदी कोड ऑफ कैंपेनिंग बनकर रह गया है। अप्रैल में किसी भी दिन दो-दिवसीय विशेष सत्र बुलाना एमसीसी का उल्लंघन होगा। इससे यह सवाल भी उठता है कि अप्रैल 2025 में घोषित जाति जनगणना को असल में कराने के प्रति मोदी सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता क्या है?'
बहरहाल, कांग्रेस के इन आरोपों पर सरकार की तरफ से इस आरोप पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।