आज़ाद के अलावा, अंबिका सोनी, मोतीलाल वोरा और मल्लिकार्जुन खड़गे को भी पार्टी के महासचिव पद से हटा दिया गया है।
आज़ाद ने इंटरव्यू के दौरान कहा था, ‘23 साल से पार्टी में चुनाव नहीं हुए हैं। सत्ताधारी पार्टी बहुत मजबूत है। अगर मेरी पार्टी को 50 साल विपक्ष में बैठना है तो फिर चुनाव की कोई ज़रूरत नहीं है। मुझे अब कुछ नहीं बनना है। मैं 15 दफ़ा महासचिव रहने के साथ ही 5 प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुका हूं।’