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2024 चुनाव: दिल्ली पहुंचे केसीआर, केजरीवाल और टिकैत से मिलेंगे

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव उर्फ केसीआर विपक्षी दलों का गठबंधन बनाने की कोशिश में हैं। केसीआर 3 दिन के व्यस्त दौरे पर दिल्ली आए हैं और इस दौरान वह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और किसान नेता राकेश टिकैत से मुलाकात करेंगे। 

केसीआर की कोशिश 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों का फ्रंट बनाकर उसकी कयादत करने की है। 

ताबड़तोड़ मुलाक़ातें

कुछ दिन पहले केसीआर शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिले थे। इस साल जनवरी में बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव हैदराबाद पहुंचे थे और केसीआर से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय दलों विशेषकर बीजेपी के खिलाफ एक मोर्चा खड़ा करने पर बात हुई थी। 

KCR opposition parties front for 2024 lok sabha election  - Satya Hindi

जनवरी में ही केसीआर ने सीपीएम और सीपीआई के बड़े नेताओं से मुलाकात की थी और उससे पहले वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से भी मुलाकात कर चुके हैं।

दिल्ली आने से पहले केसीआर ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ बातचीत की। 10 मार्च को पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आएंगे और ये नतीजे बीजेपी के खिलाफ बनने वाले फ्रंट की संभावना तय करेंगे। 

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अगर बीजेपी को उत्तर प्रदेश के चुनाव में हार मिलती है तो विपक्षी दलों के द्वारा एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ बनने वाले किसी फ्रंट की संभावना को बल मिलेगा। 

ममता भी जुटीं

केसीआर के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी यूपीए से हटकर विपक्षी दलों का एक फ्रंट बनाने की कोशिश में जुटी हैं और बीते कई महीनों में कई नेताओं से मुलाकात कर चुकी हैं। ममता बनर्जी उत्तर प्रदेश में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अपना समर्थन दे चुकी हैं।

केसीआर के बारे में यह लंबे वक्त से कहा जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने बेटे के. तारक रामाराव को सौंपकर राष्ट्रीय राजनीति में आना चाहते हैं। उनकी कोशिश गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी मोर्चा बनाने की है और इसके लिए वह तमाम विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर फेडरल फ्रंट बनाना चाहते हैं।

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केसीआर को तेलंगाना में बीजेपी से लगातार चुनौती मिल रही है और ऐसे में वह भी बीजेपी को तेलंगाना से बाहर घेरने की कोशिश में हैं।

पहले भी की कोशिश 

केसीआर ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी यूपीए से अलग हटकर विपक्षी दलों का एक फ्रंट बनाने की कोशिश की थी। लेकिन तब उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिली थी। देखना होगा कि क्या इस बार उनकी कोशिश रंग लाती है।

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