बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आंतरिक खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसके कुछ ही घंटे बाद आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बसपा के भीतर नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर चल रही उठापटक को और गहरा करता है।

मायावती ने आकाश आनंद को फिर किया बाहर

मायावती ने आज गुरुवार सुबह अपने आधिकारिक X हैंडल पर बयान जारी कर आकाश आनंद के खिलाफ कड़ा फैसला लिया। रिपोर्टों के मुताबिक मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश 'डबल माइंड' के साथ काम कर रहे थे और उनका रवैया पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था। आकाश आनंद को इससे पहले भी पार्टी से निकाला जा चुका है और बाद में उनकी वापसी हुई थी। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब मायावती पिछले कुछ दिनों में आकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रही थीं।
3 सितंबर को मायावती ने लखनऊ में बसपा की राष्ट्रीय स्तर की बैठक के बाद आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था। उस समय मायावती ने कहा था कि आकाश को अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है और उन्हें फिलहाल बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बाद 7 सितंबर को आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को पार्टी में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई। मायावती ने 9 सितंबर को एक और महत्वपूर्ण बयान देकर आकाश की संभावित वापसी का रास्ता बताया था। उन्होंने कहा था कि यदि आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह राजनीति से संन्यास ले लेते हैं, तभी आकाश को पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने और उनकी जिम्मेदारियां वापस मिलने पर विचार किया जा सकता है।
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मायावती का अशोक सिद्धार्थ पर गंभीर आरोप

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर आरोप लगाया था कि उन्हें पार्टी ने अपने तौर-तरीके सुधारने के कई अवसर दिए, लेकिन उन्होंने बसपा के मिशन से अधिक निजी और पारिवारिक हितों तथा राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को प्राथमिकता दी। मायावती के मुताबिक इसका नुकसान अशोक सिद्धार्थ के साथ-साथ उनके दामाद आकाश आनंद को भी उठाना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा था कि अशोक सिद्धार्थ को पार्टी और बहुजन आंदोलन के प्रति दूसरों से ज्यादा त्याग, तपस्या और निस्वार्थ भाव दिखाना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत परिस्थितियां बनती गईं।
मायावती ने यह भी कहा था कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ये राज्य बसपा तथा बहुजन आंदोलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे समय में पार्टी और आंदोलन के सामने आरक्षण समेत कई चुनौतियां हैं और किसी भी व्यक्तिगत या पारिवारिक हित को आंदोलन के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया जा सकता।

मायावती के बयान के अगले ही दिन अशोक सिद्धार्थ का संन्यास

मायावती के इस बयान के अगले दिन, यानी आज 10 सितंबर को पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से तत्काल संन्यास लेने की घोषणा कर दी। सिद्धार्थ ने X पर भावुक संदेश में कहा कि वह "अभी से राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास" ले रहे हैं। उन्होंने मायावती के आदेश को अपने लिए सर्वोपरि बताते हुए कहा कि वह पिछले करीब 35 वर्षों से बसपा के मिशन के प्रति समर्पित रहे हैं और उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी गई, उसे अपनी क्षमता के अनुसार निभाने का प्रयास किया।

सिद्धार्थ ने कहा कि मायावती ने एक छोटे से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया और वह इस ऋण को जीवन भर नहीं चुका सकते। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मायावती के लिए उन्हें अपना जीवन भी देना पड़े तो यह उनके लिए गर्व की बात होगी।

'मैंने आकाश को कई महीनों से देखा तक नहीं'

अशोक सिद्धार्थ ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन पर आकाश आनंद को प्रभावित करने या उन्हें गुमराह करने के आरोप लगाए गए, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई महीनों से अपने दामाद आकाश आनंद से मुलाकात तक नहीं की है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कुछ लोगों ने उन पर बसपा पर नियंत्रण हासिल करने और आकाश को गुमराह करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था, लेकिन उनके मुताबिक इन आरोपों में जरा भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने गौतम बुद्ध और अपने राजनीतिक गुरु कांशीराम को साक्षी मानते हुए कहा कि उन्होंने कभी बसपा के हितों के खिलाफ काम नहीं किया।
अशोक सिद्धार्थ पहले ही बसपा से निष्कासित किए जा चुके थे। उन्हें 2 अगस्त 2026 को पार्टी से बाहर किया गया था। उन पर बार-बार अनुशासनहीनता करने, पार्टी विरोधी रुख अपनाने और अपनी जिम्मेदारियों का उचित तरीके से निर्वहन नहीं करने के आरोप लगाए गए थे। अशोक सिद्धार्थ बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उनकी बेटी प्रज्ञा से आकाश आनंद ने मार्च 2023 में शादी की थी। इस तरह सिद्धार्थ आकाश आनंद के ससुर हैं। 

मायावती-आकाश संबंधों में लगातार उतार-चढ़ाव

आकाश आनंद को कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा गया था। लेकिन 2024 के बाद से उनके और मायावती के राजनीतिक संबंधों में कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। मायावती ने पहले आकाश को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाया और उन्हें पार्टी से भी निष्कासित किया था। बाद में मार्च 2026 में उनकी वापसी हुई। लेकिन सितंबर में एक बार फिर उनका संगठनात्मक पद छीन लिया गया और अब उन्हें पार्टी से ही बाहर कर दिया गया है।

2027 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक सवाल

मायावती के इस कदम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। आकाश आनंद को लंबे समय से नई पीढ़ी के नेतृत्व के चेहरे के तौर पर तैयार किए जाने की चर्चा होती रही है।
लेकिन ताजा घटनाक्रम से साफ है कि मायावती फिलहाल संगठन और नेतृत्व पर अपनी पकड़ को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहतीं। आकाश आनंद को पार्टी से निकालने और उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देने के घटनाक्रम ने बसपा में उत्तराधिकार और भविष्य के नेतृत्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जिस दिन अशोक सिद्धार्थ ने मायावती की शर्त के अनुरूप राजनीति से संन्यास की घोषणा की, उसी दिन आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया गया। यानी अशोक सिद्धार्थ का संन्यास आकाश आनंद की वापसी की गारंटी नहीं बन सका। यह घटनाक्रम बसपा के भीतर चल रहे सत्ता-संतुलन और नेतृत्व संघर्ष को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।