महिला आरक्षण को लेकर मोदी सरकार जिस तरह से प्रचार कर रही है, अब उसकी काट के लिए विपक्ष ने बड़ी तैयारी की है। रिपोर्ट है कि विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी को ख़त लिखने वाला है कि 2023 के महिला आरक्षण क़ानून को तुरंत लागू करें। वे चाहते हैं कि इस क़ानून को डेलिमिटेशन की प्रक्रिया से अलग कर दिया जाए। इसके अलावा महिला आरक्षण पर सरकार द्वारा विपक्ष के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे नैरेटिव का जवाब देने के लिए कई और तैयारी की है।

विपक्ष की रणनीति

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस के फ्लोर लीडर्स की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। INDIA गठबंधन के नेता इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि बीजेपी के हमले का जवाब कैसे दिया जाए। बीजेपी आरोप लगा रही है कि विपक्ष महिलाओं के ख़िलाफ़ है। बैठक में तय हुआ कि पूरे देश में प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएंगी। इनमें विपक्ष कहेगा कि वे महिलाओं के आरक्षण के पूरे समर्थन में हैं, लेकिन सरकार इस क़ानून के नाम पर देश के राजनीतिक नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सहयोगी दलों का धन्यवाद किया।
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रेवंत रेड्डी का हमला

दिल्ली में अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 400 से ज्यादा सीटें नहीं मिलीं, इसलिए अब वे महिलाओं के आरक्षण के रास्ते से संविधान बदलने और दलित-आदिवासी आरक्षण ख़त्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
रेवंत रेड्डी ने कहा, 'महिलाओं के आरक्षण का क़ानून डेलिमिटेशन और सीटों की बढ़ोतरी से जोड़ दिया गया है। अगर महिलाओं को आरक्षण देना ही असली मक़सद था तो एक साधारण संशोधन काफ़ी था।' उन्होंने कहा कि बीजेपी 2024 में दो-तिहाई बहुमत हासिल करके संविधान बदलना चाहती थी, लेकिन जनता ने मोदी को सिर्फ 240 सीटें दीं।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि सरकार सोमवार तक एक साफ-सुथरा महिला आरक्षण बिल लाए, जिसमें डेलिमिटेशन या सीट बढ़ाने की कोई बात न हो। अगर ऐसा बिल लाया गया तो INDIA गठबंधन उसे पास कर देगा। दक्षिण भारतीय राज्य जनसंख्या के आधार पर डेलिमिटेशन के साथ कभी सहमत नहीं होंगे।

रेवंत रेड्डी ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि 1980 में बीजेपी के गठन के बाद 46 साल बीत गए, लेकिन कभी कोई महिला उसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष या संगठन महासचिव नहीं बनी। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश मत करो। 140 करोड़ लोग आपकी राजनीति देख रहे हैं।'

कांग्रेस का पुराना स्टैंड

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर पार्टी के 2024 लोकसभा घोषणा-पत्र की तस्वीर शेयर की। उसमें साफ़ लिखा था कि महिलाओं के आरक्षण कानून को डेलिमिटेशन से अलग करके 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाएगा। जयराम रमेश ने लिखा, 'हमारा स्टैंड हमेशा एक जैसा रहा है – सितंबर 2023 में, जून 2024 में और अब अप्रैल 2026 में भी।'

महिला आरक्षण पर विवाद क्या?

2023 में संसद ने महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का क़ानून पास किया था। लेकिन इसकी लागू होने की तारीख़ अगली जनगणना और डेलिमिटेशन के बाद रखी गई थी। विपक्ष कह रहा है कि सरकार इस क़ानून के नाम पर डेलिमिटेशन को आगे बढ़ाना चाहती है, जिससे दक्षिण के राज्यों की राजनीतिक ताक़त कम हो सकती है और उत्तर के राज्यों की बढ़ सकती है।
विपक्ष का तर्क है कि महिलाओं को आरक्षण देने के लिए डेलिमिटेशन की ज़रूरत नहीं है। वे चाहते हैं कि मौजूदा लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों पर ही आरक्षण लागू हो जाए।
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संबोधन पीएम की गरिमा गिराने वाला: कांग्रेस

जयराम रमेश ने पीएम के संबोधन पर हमला किया है। उन्होंने कहा, "किसी मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन उस पद की गरिमा से जुड़ा होता है। इसका उद्देश्य बिना किसी पक्षपात के राष्ट्र के संकल्प और आत्मविश्वास को मजबूत करना होता है। लेकिन आज का बेहद निराशाजनक और पूरी तरह से पक्षपात से भरा भाषण – राष्ट्र के नाम संबोधन की बजाय एक ‘निराशा से भरा संबोधन’ ज्यादा लगा – जिसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में देना ज़्यादा उचित होता। लेकिन कल रात लोकसभा में मिली करारी विधायी हार से विचलित प्रधानमंत्री में अब भी मीडिया का सामना करने की हिम्मत नहीं है।"

उन्होंने आगे कहा, "प्रधानमंत्री ने अपने संविधान संशोधन बिल को लोकसभा से पारित न करा पाने के लिए माफी मांगी है। लेकिन वास्तव में उन्हें महिलाओं के नाम पर परिसीमन के एक कुटिल प्रस्ताव को ज़बरदस्ती पारित कराने के अपने बेशर्मी और कपट से भरे प्रयासों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी। इस पूरे मामले में उनकी नीयत साफ नहीं, स्पष्ट रूप से खोटी है। अगर उनकी नीयत को समझना हो, तो यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’, जो सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया था, उसे 30 महीने की देरी के बाद 16 अप्रैल 2026 की देर रात को अधिसूचित क्यों किया गया। उनके जीवन भर के आचरण को देखते हुए, महिला सम्मान की उनकी बातें पूरी तरह से पाखंड लगती हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "कल लोकसभा में प्रधानमंत्री ने जो करने की कोशिश की – वह हमारे लोकतंत्र और संघीय ढांचे को कमज़ोर करने वाला था। यह वही ख़तरा था जिसका अंदेशा तब भी जताया गया था, जब उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ‘400 पार’ का नारा दिया था। संविधान निर्माताओं की विरासत का हवाला देना उनके पाखंड को और स्पष्ट कर देता है।"

पीएम के दावे खारिज

रमेश ने पीएम के कई दावों को खारिज करते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री के तमाम हास्यास्पद दावों में एक यह भी था कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जन धन-आधार-मोबाइल और जीएसटी का विरोध किया था। जबकि ये दोनों ही कांग्रेस की देन है। इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर सार्वभौमिक बैंकिंग की नींव रखी। आधार योजना को 29 सितंबर 2010 को महाराष्ट्र के नंदुरबार ज़िले से डॉ. मनमोहन सिंह ने शुरू किया था। भारत की डिजिटल क्रांति राजीव गांधी की सोच और प्रयासों से संभव हुई। जीएसटी को भी डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने आगे बढ़ाया था, लेकिन तब गुजरात के एक पूर्व मुख्यमंत्री के विरोध के कारण यह पास नहीं हो सका। उसी मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और मनरेगा का भी विरोध किया था, जो कोविड-19 महामारी के दौरान करोड़ों लोगों के लिए सहारा बने। प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की बीमारी है। आज भी उन्होंने यही साबित किया है।'
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जयराम रमेश ने आगे कहा, "अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के लिए ‘समय का इंतजार’ करना होगा। लेकिन महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रधानमंत्री को चुनौती देती है कि वे कल ही संसद में मौजूदा संरचना के तहत ही महिला आरक्षण को लागू करने के लिए विधेयक पेश करें।'
बहरहाल, INDIA गठबंधन अब प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग करेगा। इस मुद्दे पर संसद और देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार और विपक्ष दोनों महिलाओं के सशक्तिकरण का दावा कर रहे हैं, लेकिन डेलिमिटेशन को लेकर गहरी असहमति बनी हुई है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।