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बीजेपी नेता ने पूछा- किसानों के बारे में बोलना क्या अनुशासनहीनता है?

किसान आंदोलन से खासे प्रभावित राज्य पंजाब में बीजेपी के नेताओं के भीतर बेचैनी है। पंजाब में पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अनिल जोशी ने बीते दिनों कहा था कि किसान आंदोलन का हल नहीं निकला तो बीजेपी के नेता अपने घरों से बाहर नहीं निकल पाएंगे। उनके ऐसे ही कुछ और बयानों को लेकर पार्टी के पंजाब अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने उन्हें मंगलवार को कारण बताओ नोटिस भेज दिया था। 

जोशी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। इधर, बीजेपी पंजाब में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। 

जोशी ने इस नोटिस का जवाब देते हुए दो पन्नों का ख़त लिखा है। इसमें उन्होंने पूछा है कि क्या किसानों के बारे में, आढ़तियों, उद्योगपतियों, छोटे व्यापारियों और मज़दूरों के बारे में बात करना अनुशासनहीनता है। 

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पूर्व मंत्री ने कहा है कि उन्होंने कभी भी केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों और केंद्रीय नेताओं के ख़िलाफ़ बयान नहीं दिया है और वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं। जोशी ने पार्टी की पंजाब इकाई पर आरोप लगाया था कि उसने केंद्र सरकार को कृषि क़ानूनों को लेकर सही फ़ीडबैक नहीं दिया। जोशी ने कहा है कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह पार्टी की बेहतरी के लिए कहा था। 
Punjab BJP leader Anil Joshi on farmers protest - Satya Hindi

117 सीटों पर लड़ने की तैयारी 

पंजाब में 7 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी भी पूरी तैयारी कर रही है। पार्टी के महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने कहा है कि बीजेपी राज्य की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन सवाल यह है कि किसान आंदोलन के बीच क्या पार्टी का पंजाब में चुनाव लड़ पाना इतना आसान होगा क्योंकि इस साल फरवरी में हुए नगर निगम चुनाव में उसके प्रत्याशियों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा था और चुनावी नतीजे भी उसके लिए बेहद ख़राब रहे थे। 

बीएल संतोष ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी के कार्यालय में बीजेपी की पंजाब इकाई के नेताओं के साथ बैठक की और आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर विस्तार से चर्चा की। संतोष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि पूरा विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने के लिए हर तिकड़म अपना रहा है। 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लाए गए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विपक्ष की ओर से चलाया जा रहा प्रोपेगेंडा जल्द ही ख़त्म हो जाएगा क्योंकि किसान समझ चुके हैं कि ये क़ानून उनके हित में हैं। इस दौरान पार्टी के पंजाब प्रभारी दुष्यंत गौतम, पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष अश्विनी शर्मा भी मौजूद रहे। 
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बीजेपी नेताओं का विरोध 

अबोहर सीट से बीजेपी विधायक अरुण नारंग पर कुछ महीने पहले मुक्तसर जिले में किसानों ने हमला कर दिया था। किसान इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने अरुण नारंग के कपड़े तक फाड़ दिए थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हुआ था। 

हरियाणा के जैसे ही हालात पंजाब में भी हैं। यहां भी बीजेपी और उसकी सहयोगी जेजेपी के नेताओं का पिछले सात महीने से अपने गांवों में निकलना मुश्किल हो गया है। पश्चिमी यूपी में भी बीजेपी के नेताओं का किसान लगातार विरोध कर रहे हैं। पंचायत चुनाव के जरिये किसानों ने बीजेपी नेताओं को समझा दिया है कि उनके लिए 2022 का उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा।

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