अकाली दल पर यह आरोप लग रहा है कि शुरुआत में इन विधेयकों को लेकर उसका रवैया बेहद ढीला था और वह हरसिमरत का इस्तीफ़ा दिलवाने के मूड में नहीं थी। लेकिन जैसे-जैसे पंजाब में आंदोलन बढ़ा उसे यह क़दम उठाना पड़ा।
आम आदमी पार्टी के तेजी से उभरने के बाद भी शिअद परेशान है और ऐसे में वह बीजेपी को ज़्यादा सीटें देने का वादा कर ख़ुद को कमजोर करने का जोख़िम नहीं ले सकती थी।