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पूर्व एआईएडीएमके नेता शशिकला 4 साल बाद जेल से रिहा

एआईएडीएमके की पूर्व नेता रहीं वीके शशिकला को जेल से आज सुबह 11 बजे आधिकारिक रूप से रिहा कर दिया गया है। वह कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। यानी जेल से रिहा होने के बाद भी वह फ़िलहाल अस्पताल में ही रहेंगी। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के सबसे क़रीबी रहीं शशिकला को भ्रष्टाचार के मामले में जेल की सज़ा हुई थी। 

शशिकला को 21 जनवरी को विक्टोरिया अस्पताल में भेजा गया था और उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया था। बैंगलोर मेडिकल कॉलेज के अनुसार प्रोटोकॉल के तहत उन्हें 10वें दिन छुट्टी दे दी जाएगी यदि उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखते हैं और कम से कम 3 दिन बिना ऑक्सीजन के सहयोग के रहती हैं। इसका मतलब है कि उन्हें कम से कम 4-5 दिन अस्पताल में ही रहना होगा। उनके रिहा किए जाने से पहले अस्पताल की ओर से कहा गया है कि उनकी हालत स्थिर है, वह होश में हैं और बेहतर स्थिति है। 

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जेल की तरफ़ से वह विक्टोरिया अस्पताल में इलाज के लिए भेजी गई थीं और अब चूँकि वह जेल से रिहा की जा चुकी हैं तो दूसरे अस्पताल में जाने के लिए स्वतंत्र हैं। रिपोर्टों के अनुसार शशिकला के परिवार का कहना है कि वे शशिकला का विक्टोरिया अस्पताल में ही इलाज कराना जारी रखना चाहते हैं। 

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, शशिकला के वकील राजा सैंथूर पांडियन ने कहा है, 'सभी औपचारिकताएँ पूरी कर ली गई हैं। वह सभी क़ानूनी औपचारिकताओं से मुक्त हैं। वह चिकित्सा सलाह के अनुसार अस्पताल में रहेंगी।'

बता दें कि भ्रष्टाचार के एक मामले में वह सज़ा काट रही थीं। आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर शशिकला को चार साल के कारावास की सज़ा हुई थी। कोर्ट के आदेश के बाद शशिकला ने 15 फ़रवरी, 2017 को सरेंडर कर दिया था। 

उनकी यह रिहाई ऐसे वक़्त पर हुई है जब अगले कुछ महीनों में तमिलनाडु विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। राज्य की राजनीति में अब हलचल तेज़ होने के आसार हैं। हालाँकि पलानीस्वामी ने एआईएडीएमके में शशिकला के फिर से प्रवेश की ख़बरों को खारिज कर दिया है।

ग़ौर करने वाली बात है कि एक समय तमिलनाडु की राजनीति में शशिकला की तूती बोलती थी। वह मुख्यमंत्री जयललिता की सबसे क़रीबी रहीं और कई राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक़, अन्ना डीएमके पार्टी और सरकार के सभी बड़े फ़ैसलों में शशिकला की काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका थी। वैसे शशिकला कभी सीधे सत्ता में नहीं रहीं, लेकिन जब भी जयललिता मुख्यमंत्री रहीं, शशिकला के हाथ में सत्ता रही। 

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