राजभवन किसको बुलाएगा

तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, राजभवन के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि जिस भी पार्टी को ज़रूरी संख्या यानी 118 विधायकों का समर्थन प्राप्त होगा, उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। हालांकि, सूत्रों ने इस बात से इनकार किया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर केंद्र के दबाव में काम कर रहे हैं। इन्हीं सूत्रों ने कहा कि निर्णय संवैधानिक मानदंडों के अनुसार ही लिए जा रहे हैं। यह खबर इंडिया टुडे ने दी है।

राजभवन के सूत्रों ने यह सफाई तब दी है, जब राज्यपाल अर्लेकर को विजय के तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण में देरी करने के उनके फैसले को लेकर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। विजय की टीवीके पार्टी ने डीएमके और एआईएडीएमके के दशकों पुराने वर्चस्व को चुनौती दी और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। टीवीके प्रमुख विजय अब तक दो बार गवर्नर से मिल चुके हैं लेकिन राज्यपाल ने उनको दोनों बार वापस कर दिया। विजय से कहा गया कि वो बाकी दलों का समर्थन पत्र लेकर आएं। अभी तक टीवीके को सिर्फ कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन मिला है।

तमिलनाडु में नंबर गेम जारी, एनडीए से निकलेगी एआईएडीएमके?

ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि कट्टर प्रतिद्वंद्वी डीएमके और एआईएडीएमके सत्ता से बाहर रखने के लिए गठबंधन कर सकती हैं। लेकिन उसके बावजूद सत्ता पाना आसान नहीं है। डीएमके (59 सीटें) और एआईएडीएमके (47 सीटें) के साथ मिलकर कुल 106 सीटें हो जाएंगी। साधारण बहुमत में उनके पास 12 सीटों की कमी है। ऐसे में उन्हें अपने सहयोगियों के समर्थन की जरूरत होगी। डीएमके गठबंधन में आईयूएमएल, सीपीआई, सीपीएम और वीसीके के पास दो-दो सीटें हैं। एआईएडीएमके से डीएमडीके के पास एक और पीएमके के पास चार विधायक हैं। इससे उन्हें आराम से बहुमत मिल जाएगा। लेकिन डीएमके के सेकुलर दल उसे एआईएडीएमके से गठबंधन को रोक देंगे। क्योंकि एआईएडीएमके अभी भी एनडीए में बीजेपी की सहयोगी है। दोनों ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा है। यह भी अफवाह है कि डीएमके के साथ सरकार बनाने के लिए एआईएडीमके एनडीए छोड़ देगी।
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टीवीके ने 107 विधायकों के इस्तीफे की धमकी दी

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद बने राजनीतिक गतिरोध के बीच विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्ट्री कझगम (TVK) ने बड़ी चेतावनी जारी की है। पार्टी ने कहा है कि अगर DMK या AIADMK को सरकार बनाने का न्योता दिया गया तो TVK के सभी 107 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। तमिलनाडु में राजनीतिक गतिरोध के लिए वहां के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर को ज़िम्मेदार माना जा रहा है। जिन्होंने टीवीके को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्यापाल ऐसा बीजेपी के इशारे पर कर रहे हैं। क्योंकि बीजेपी डीएमके को तोड़ना चाहती है। बीजेपी चाह रही है कि टीवीके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाएं, जिससे उसका अप्रत्यक्ष नियंत्रण बरकरार रहे। विपक्षी दलों और कानून विशेषज्ञ पहले ही गवर्नर के रवैए पर हैरानी जता चुके हैं।
TVK ने 2026 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर 108 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत (234 सदस्यीय सदन में 118) से 10 सीटें कम रह गईं। विजय ने दो सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन संवैधानिक नियम के अनुसार एक सीट छोड़नी होगी, इसलिए पार्टी की प्रभावी ताकत 107 विधायकों की है। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन से TVK का कुल आंकड़ा 112 पहुंच गया है, जो अभी भी बहुमत से कम है। राज्यपाल कह रहे हैं कि विजय पहले समर्थन पत्र ले आएं, फिर सरकार की बात बनेगी।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि TVK नेतृत्व DMK और AIADMK के बीच बढ़ती नजदीकियों पर नजर रख रही है। हाल ही में खबरें आई हैं कि MK स्टालिन की DMK और एडप्पादी के. पलनिस्वामी की AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत हो रही है, ताकि TVK को सत्ता से दूर रखा जा सके। DMK को 59 और AIADMK को 47 सीटें मिली हैं। दोनों ही पार्टियां अकेले सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। लेकिन टीवीके इसे सिद्धांत रूप से गलत बता रही है, क्योंकि तमिलनाडु की जनता ने बहुमत विजय की पार्टी को दिया है।

TVK के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “जनादेश बेशक बंटा हुआ है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” टीवीके ने DMK की सहयोगी पार्टियों - विद्युतलई चिरुथैगल काची (VCK), वामपंथी दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) - से संपर्क कर रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समर्थन नहीं मिला है। इस संबंध में आज तस्वीर साफ हो सकती है।

हालांकि इस्तीफे की चेतावनी विजय की ओर से आधिकारिक रूप से नहीं दी गई है, लेकिन पार्टी के अंदर बेचैनी बैढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, TVK का मानना है कि DMK और AIADMK मिलकर विजय को सत्ता संभालने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे बीजेपी की राजनीति बताई जा रही है। बीजेपी तमिलनाडु में विजय को नहीं देखना चाहती है।
तमिलनाडु में फिलहाल सरकार बनाने की प्रक्रिया अटकी हुई है और पोस्ट-पोल गठबंधनों पर चर्चा जारी है। TVK के इस सख्त रुख से राजनीतिक हलचल और तेज होने की उम्मीद है। राजनीतिक गठबंधनों की स्थिति आज 8 मई को और साफ हो सकती है।