तेलंगाना पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई में बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओईस्ट) के सबसे बड़े नेता और संभावित महासचिव देवजी उर्फ थिप्पिरी तिरुपति ने रविवार को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उनके साथ पोलित ब्यूरो सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम और 16 अन्य माओवादी कैडर भी सरेंडर हुए। यह घटना असिफाबाद के जंगलों में हुई।

पुलिस ने अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है। द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के अनुसार, सरेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1-2 दिनों में मीडिया के सामने पेश किया जाएगा। तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी या मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की मौजूदगी में यह हो सकता है।
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देवजी कौन हैं?

62 वर्षीय देवजी तेलंगाना के जगतियाल के रहने वाले हैं। वे मादिगा दलित समुदाय से हैं। उन्होंने 1982 में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से शुरुआत की और 1986 में माओवादी पार्टी में शामिल हुए। 1989 में महाराष्ट्र के गडचिरोली में डिविजनल कमिटी मेंबर बने। 1996 में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमिटी मेंबर और 2001 में सेंट्रल कमिटी मेंबर बने। 2019 से सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के प्रमुख बने। मई 2025 में पूर्व महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू के एनकाउंटर के बाद देवजी को कथित तौर पर महासचिव बनाया गया था। हालाँकि पार्टी ने इसकी पुष्टि नहीं की, लेकिन खुफिया एजेंसियां ऐसा मानती हैं।

वे पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी यानी पीएलजीए के गठन में मुख्य भूमिका निभाने वाले थे। उन पर विभिन्न राज्यों में कुल 1 करोड़ रुपये का इनाम था। 

आरोप है कि वे 250 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों और 6 ग्रामीणों की हत्या में शामिल थे, 1000 से ज्यादा हथियार लूटे और 300 से ज्यादा माओवादियों को जेल से छुड़वाया।

सरेंडर क्यों अहम?

रिपोर्ट में कहा गया है कि माओवादी इतिहास में इतने बड़े रैंक का नेता सरेंडर नहीं हुआ। केंद्र सरकार ने ऑपरेशन कागर के तहत 31 मार्च 2026 तक लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (माओवाद) खत्म करने की डेडलाइन दी है। पिछले साल अक्टूबर में पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू उर्फ मल्लोजुला वेणुगोपाल राव ने सरेंडर किया था, जो हथियार छोड़ने के पक्ष में थे। देवजी हथियारबंद संघर्ष जारी रखने के पक्ष में थे।

हाल के सालों में माओवादियों की संख्या घटी है, नए भर्ती नहीं हो रहे, हथियार और गोला-बारूद कम हैं।
तेलंगाना में जनवरी 2025 से अब तक 590 से ज्यादा माओवादी सरेंडर कर चुके हैं। पहले कई बड़े माओवादी महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में सरेंडर हुए थे, लेकिन तेलंगाना में इतना बड़ा नाम सरेंडर होना पुलिस के लिए बड़ी जीत है।
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तेलंगाना सरकार ने सरेंडर करने वाले माओवादियों के लिए सुरक्षा, पुनर्वास और इनाम की स्कीम चलाई है। डीजीपी ने हाल ही में सरेंडर करने की अपील की थी।

यह घटना माओवादी संगठन को बहुत कमजोर कर सकती है। अब संगठन लगभग लीडरलेस हो गया है। केंद्र और राज्य सरकारें इसे माओवाद खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही हैं।