अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसे की कथित चोरी और हेराफेरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच में कई स्तरों पर गंभीर खामियां और लापरवाही पाई हैं। सूत्रों के मुताबिक, तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) की जांच में दान के कैश के रखरखाव, कर्मचारियों के वेरिफिकेशन, सीसीटीवी (CCTV) निगरानी और परिसर से लेकर बैंक तक चढ़ावे को ले जाने की प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यह जानकारी जांच दल से जुड़े सूत्रों के ज़रिए बाहर आई है। यह जांच रिपोर्ट सोमवार 22 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जानी है। लेकिन इस रिपोर्ट को लिखे जाने के समय तक यह रिपोर्ट सौंपी नहीं गई थी। खास बात ये है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद पुलिस ने दान चोरी की औपचारिक एफआईआर तक दर्ज नहीं की है। यह जांच बिना एफआईआर दर्ज हुए ही हुई।

बैंक और निजी सुरक्षा एजेंसी की भूमिका पर सवाल

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट के बैंकिंग कामकाज का जिम्मा संभालने वाले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को मंदिर में आने वाले चढ़ावे के नोटों की छंटनी और गिनती का काम सौंपा गया था। इस काम के लिए एसबीआई ने वाराणसी की एक निजी सुरक्षा एजेंसी के जरिए कर्मचारी काम पर रखे थे।
नियमों के खिलाफ जाकर, इस एजेंसी ने कथित तौर पर अयोध्या के ही स्थानीय कर्मचारियों को नोटों की गिनती के काम में लगा दिया। सूत्रों का दावा है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की सिफारिश पर की गई थी।
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नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद और सुरक्षा में चूक

एसआईटी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया और इसमें हुई कथित अनियमितताओं की भी गहराई से जांच की है। जांच में सामने आया है कि राम मंदिर ट्रस्ट में काम करने वाले अनुकूल मिश्रा नामक एक कर्मचारी ने अपने ही साले लवकुश मिश्रा को नोटों की गिनती के काम पर रखवा दिया था।
इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था में निम्नलिखित गंभीर खामियां पाई गईं:

  • जांच का अभाव: ड्यूटी पर आने और जाने के दौरान कर्मचारियों की चेकिंग की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं थी। वे परिसर के अंदर क्या ले जा रहे हैं या बाहर क्या ला रहे हैं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं था।
  • ड्रेस कोड का उल्लंघन: नोटों की गिनती में लगे कर्मचारी निर्धारित यूनिफॉर्म के बजाय साधारण कपड़ों में ट्रस्ट के कमरे में बैठते थे, जबकि उनके लिए एक खास ड्रेस कोड तय किया गया था।
  • CCTV निगरानी में बड़ी चूक: सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी कथित तौर पर चोरी की वारदातों को अंजाम देने से ठीक पहले सीसीटीवी कैमरों के आगे खड़े हो जाते थे ताकि उनकी हरकतें रिकॉर्ड न हो सकें। यह निगरानी तंत्र की एक बहुत बड़ी नाकामी को दर्शाता है।

महाकुंभ के दौरान का चढ़ावा और सोने-चांदी के रिकॉर्ड की भी जांच

जांच टीम ने सिर्फ कैश ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, कीमती पत्थरों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड को भी खंगाला है। मंदिर के सूत्रों का कहना है कि जांचकर्ताओं को इन कीमती सामानों के दस्तावेजों और अकाउंटिंग (हिसाब-किताब) में विसंगतियां (discrepancies) मिली हैं। कुछ ट्रस्ट अधिकारी इन बहुमूल्य वस्तुओं के स्टॉक और स्टोरेज को लेकर एसआईटी के सामने संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

राम मंदिर के चढ़ावे में आई गिरावट

इस बीच लोकल मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे या डोनेशन में कमी आ गई है। जहां पहले औसतन 10 से 12 लाख का चढ़ावा यहां आता था। अब वो एक लाख से भी कम पर आ गया है। श्रद्धालुओं की संख्या में भी इधर कमी आई है। हालांकि पुजारियों का कहना है कि भीषण गर्मी में श्रद्धालुओं की तादाद घट जाती है और चढ़ावा भी कम आता है। 
इसके अलावा, जनवरी-फरवरी 2025 में हुए महाकुंभ के दौरान आई भारी भीड़ और उस दौरान मिले दान की भी बारीकी से जांच की जा रही है। महाकुंभ के समय मंदिर में रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे थे, जिससे दान में भारी बढ़ोतरी हुई थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को गठित की गई यह एसआईटी अपनी जांच के सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में रख रही है और इसकी दैनिक प्रगति रिपोर्ट (Daily Updates) सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेजी जा रही है। जांच का दायरा अब दान की हेराफेरी से आगे बढ़कर ट्रस्ट द्वारा की गई जमीनों की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद-फरोख्त तक फैल गया है। एसआईटी अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट जांच पूरी होने के बाद सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। लेकिन शुरुआती रिपोर्ट सोमवार को सौंपी जानी है।