अयोध्या के राम मंदिर में वित्तीय गड़बड़ियों और कथित घोटाले के आरोपों की जांच एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। यह बात सामने आई है कि मंदिर के ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान दान की गई 60 किलोग्राम चांदी की सिल्लियां (silver bars) ट्रस्ट के सरकारी कलेक्शन और इन्वेंट्री रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब हैं।
इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने अयोध्या में अपनी कई दिनों की गहन प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। एसआईटी आज ही लखनऊ लौट रही है, जहां वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई होगी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस संबंध में किसी भी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं की है।

गायब हुईं 60 किलो चांदी की सिल्लियों का रहस्य

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ देश भर के सर्राफा व्यापारियों (ज्वेलर्स) द्वारा दान की गई 60 किलो चांदी को लेकर आया है। ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी के अनुसार, यह चांदी प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के दौरान राम लला को आधिकारिक तौर पर अर्पित की गई थी, ताकि इसका इस्तेमाल मंदिर की पवित्र नींव में किया जा सके।
एसोसिएशन ने पुष्टि की है कि उनके पास श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को यह चांदी सौंपने की वैध रसीद भी मौजूद है। हालांकि, जांच टीम को दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी मिली है:

  • कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं: पिछले छह दिनों से एसआईटी रसीद किताबों, स्टोर रूम के लॉग और अन्य रजिस्टरों की बारीकी से जांच कर रही है, लेकिन इस चांदी को कहां रखा गया, इसका क्या हुआ, इसका कोई नामोनिशान नहीं मिल रहा है।

  • निर्माण कार्यों से गायब: सर्राफा एसोसिएशन का कहना है कि नींव रखने और निर्माण के अगले चरणों में भी इन सिल्लियों का कहीं इस्तेमाल नहीं देखा गया।

पूछताछ का बढ़ता दायरा: 24 लोगों से सवाल-जवाब

चोरी और लापता संपत्ति का सुराग लगाने के लिए लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और विशेष सचिव नीलरतन कुमार की सदस्यता वाली एसआईटी ने राम मंदिर परिसर के भीतर ही अपना अस्थायी कैंप ऑफिस बनाया हुआ है। टीम ने अब तक कम से कम 24 लोगों से बेहद कड़ी पूछताछ की है, जिसमें यह समझा जा रहा है कि दान पेटियों से पैसा निकलने से लेकर, उसके लॉकर में जाने और फिर बैंक में जमा होने की पूरी प्रक्रिया क्या है।
पूछताछ के घेरे में आए लोगों में शामिल हैं:

  • ट्रस्ट के 12 अधिकारी: इनमें ट्रस्ट के वरिष्ठ नेता डॉ. अनिल मिश्रा और चंपत राय शामिल हैं, जो दान प्रबंधन और रकम की गिनती की पूरी व्यवस्था देखते हैं।

  • 6 एसबीआई (SBI) कर्मचारी और 6 टीसीएस (TCS) एक्सपर्ट्स: जो डिजिटल लॉग और बैंकिंग सिस्टम को संभालते हैं।

  • कृष्णदेव तिवारी: मंदिर के वह अधिकारी जो सीधे तौर पर आभूषणों और भौतिक चढ़ावे की देखरेख करते हैं। बताया जा रहा है कि तिवारी ने चांदी की इन सिल्लियों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है।

  • रामशंकर यादव (उर्फ टिन्नू) और 4 मुख्य पुजारी: जिनसे कीमती सामानों को सुरक्षित रखने और उनके चढ़ावे के प्रोटोकॉल को लेकर सवाल पूछे गए।
चांदी की सिल्लियों के अलावा, एसआईटी एक बेहद कीमती हार (necklace) और भक्तों द्वारा अर्पित की गई चरण पादुका के गायब होने की भी जांच कर रही है, जिनका रिकॉर्ड रजिस्टरों से नदारद है। इससे पहले यह आरोप भी लगे थे कि मंदिर के असली सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों को नकली आभूषणों से बदल दिया गया और गिनती के कमरों से सीधे नकदी गायब की गई।

राजनीतिक घमासान और बिना एफआईआर जांच

यह पूरा विवाद 7 जून 2026 को तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने आंतरिक सूत्रों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के दान की चोरी हुई है और उन्होंने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया और उन्हें एक सप्ताह के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया। लेकिन अभी तक किसी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। जबकि पुलिस के पास एक दर्जन लिखित शिकायतें पहुंची हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने अयोध्या में क्या कहा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद अयोध्या का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने जांच प्रक्रिया का कड़ा समर्थन करते हुए विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया। योगी ने कहा - "इस एसआईटी जांच के आदेश खुद ट्रस्ट के अनुरोध पर दिए गए हैं। यह जांच पूरी सच्चाई सामने लाएगी और दूध का दूध, पानी का पानी करेगी। अगर कोई भी दोषी पाया जाता है, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न हो, उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा।"
मुख्यमंत्री ने सभी से शांति और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक तथ्य पूरी तरह सामने नहीं आ जाते, तब तक राजनीतिक दलों को अयोध्या की पावन नगरी को बदनाम करने या किसी के "चरित्र हनन" से बचना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया, "हमारे पूर्वजों ने इस मंदिर के लिए 500 साल का इंतजार किया है, तो हम एसआईटी की जांच पूरी होने के लिए 15 दिन का इंतजार तो कर ही सकते हैं।"
शनिवार को प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद, अब सबकी निगाहें लखनऊ पर टिकी हैं, जहां एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और आपराधिक कार्रवाई तय की जाएगी।