सपा नेता आज़म खान को हाल ही में ईडी ने गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से रामपुर जेल में उनकी मुलाकात के फौरन बाद हुई थी। इस गिरफ्तारी को आज़म खान ने चुनौती दी है। इसे 'राजनीतिक बदला' कहा है।
आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से फौरन राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दी है और हाईकोर्ट से 16 नवंबर को इस मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने को कहा है। अदालत ने हाईकोर्ट से यह भी कहा है कि वह उसी दिन आजम खां की अंतरिम राहत की मांग पर उचित आदेश पारित करे।
गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने आजम खां की गिरफ्तारी की वैधता पर कोई फैसला देने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करना उचित होगा।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आजम खां की ओर से पेश दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''आपकी दलीलों में कुछ दम हो सकता है, लेकिन हम मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं करना चाहते।'' इस टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह गिरफ्तारी को सही या गलत ठहराने के बारे में कोई राय नहीं दे रहा है।
कपिल सिब्बल ने गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक प्रताड़ना
आजम खां की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने ईडी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रताड़ना करार दिया। सिब्बल ने दलील दी कि आजम खां को दूसरे मामले में जमानत मिलने और जेल से बाहर निकलने के तत्काल बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उनके मुताबिक, आजम खां जब रामपुर जेल से बाहर आए तो जेल के बाहर पहले से मौजूद ईडी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई।सिब्बल ने अदालत को बताया कि आजम खां को अन्य मामलों में राहत मिल चुकी थी और इसके बावजूद उन्हें एक नए मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का मकसद आजम खां को उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान जेल में रखना है। उन्होंने गिरफ्तारी के पीछे दुर्भावना होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई कानून की सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से की गई है।
सिब्बल ने अदालत में आजम खां की उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आजम खां की उम्र लगभग 80 वर्ष है और वह मुकदमों का सामना करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
बकरी और गाय को भी बताया जा रहा अपराध की कमाई!
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आधार पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जिस घटना को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनाया गया है, वह वर्ष 2006 की बताई जाती है, जबकि इस संबंध में एफआईआर वर्ष 2019 में दर्ज की गई थी। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि इतने पुराने मामले में PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के प्रावधान कैसे लागू किए जा सकते हैं।
सिब्बल ने ईडी की जांच में कथित अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में बकरियों और गायों का उल्लेख किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने अदालत में कहा कि शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों के घरों में घुसकर नकदी, सोने के आभूषण और बकरियां लूटी गईं। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह बकरियों और गायों को भी अपराध से अर्जित संपत्ति कैसे माना जा सकता है। सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के आधार पर आजम खां की गिरफ्तारी को चुनौती दी।
क्या है आजम खां की गिरफ्तारी का पूरा मामला?
आजम खां की गिरफ्तारी का संबंध रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के खिलाफ चल रही जांच से है। ईडी ने जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई की है। एजेंसी की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से वर्ष 2019 में दर्ज की गई कई एफआईआर पर आधारित है।इन एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि किसानों की कृषि भूमि पर कथित तौर पर जबरन कब्जा कर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए इस्तेमाल किया गया। ईडी ने इन मामलों को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। एजेंसी का आरोप है कि कथित अपराध से अर्जित संपत्ति और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच जरूरी है। आजम खां ने ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें उनकी गिरफ्तारी के साथ-साथ उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को भी चुनौती दी गई है।
दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद हुई थी गिरफ्तारी
आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां को दो पैन कार्ड रखने और कथित जालसाजी के मामले में सजा सुनाई गई थी। इस मामले में आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड बनवाए थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, एक पैन कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जबकि दूसरे में 30 सितंबर 1990 दिखाई गई थी। आरोप था कि दूसरे पैन कार्ड में जन्मतिथि बदलने का उद्देश्य 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए निर्धारित न्यूनतम 25 वर्ष की आयु की शर्त पूरी करना था।इस मामले में बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर वर्ष 2019 में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में रामपुर की मजिस्ट्रेट अदालत ने आजम खां और उनके बेटे को धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित आईपीसी की धाराओं 467, 468, 420, 471 और 120-B के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने दोनों को सात साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है।
29 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में आजम खां और अब्दुल्ला आजम खां की सजा निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जेल से रिहाई के तुरंत बाद आजम खां को ईडी ने जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक अलग मामले में गिरफ्तार कर लिया। ईडी की गिरफ्तारी के बाद आजम खां को 1 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि याचिका के मूल रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे जाएं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि वह मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि 16 नवंबर को इसे डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने आजम खां को अपनी याचिका में संशोधन करने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज व दलीलें दाखिल करने की अनुमति भी दी है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट को 16 नवंबर को ही उनकी अंतरिम राहत की मांग पर उचित आदेश पारित करने के लिए कहा गया है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल होंगे कि ईडी की गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं, गिरफ्तारी के समय और परिस्थितियों का क्या महत्व है और आजम खां को इस मामले में अंतरिम राहत या जमानत दी जा सकती है या नहीं। फिलहाल आजम खां की गिरफ्तारी रद्द नहीं हुई है और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी नहीं मिली है। उनकी कानूनी लड़ाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी।