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यूपी में घटिया गानों के सहारे निकाय चुनाव प्रचार

यूपी निकाय चुनाव में राजनीतिक दल निम्न स्तरीय चुनाव अभियान चला रहे हैं। बीजेपी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अपने एक थीम सॉन्ग में टोंटी चोर तक कहा है। इसी तरह सपा ने बीजेपी को दंगा पार्टी कहा है। इस निम्नस्तरीय अभियान से लग रहा है कि किसी भी राजनीतिक दल के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। खासतौर पर सत्तारूढ़ बीजेपी जो पिछले करीब 6 वर्षों से यूपी की सत्ता में है, लगता है उसके पास गिनाने के लिए उपलब्धियां ही नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश के शहरी निकाय चुनाव के लिए जारी बीजेपी के वीडियो सॉन्ग में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की छवि को बदनाम करने का प्रयास किया गया है। बीजेपी ने इस सॉन्ग में अखिलेश की जो छवि बनाई है उसमें उन्हें गुंडों को पनाह देने वाला, राज्य में हो रहे हर तरह के अपराध, सांप्रदायिक दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। उससे ज्यादा घटिया तो यह है कि उन्हें टोंटी चोर तक कहा गया है।
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करीब चार मिनट के इस गाने को सुनकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यह सोशल मीडिया पर चल रही कोई वीडियो पोस्ट है या फिर किसी राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का थीम सॉंन्ग। वीडियो में इस्तेमाल ज्यादातर सामग्री को सोशल मीडिया से उठाकर एक गाने में पिरो दिया गया है।
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पूरे सॉन्ग में यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आगामी निकाय चुनाव में बीजेपी आम जनता के पास वोट मांगने के लिए किन मुद्दों को लेकर जाएगी, या फिर केवल नफरत ही एक एजेंडा है जिसके सहारे निकाय चुनाव से लेकर देश की संसद के चुनाव तक में वोट मांगा जाएगा।
समाजवादी पार्टी ने भी अपना चुनावी सॉन्ग जारी किया। इसमें आम जनता के लिए जरूरी मुद्दों को उठाया गया है। इसमें सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने का आह्वान भी किया गया है। इसके बावजूद सपा यह थीम सॉन्ग बीजेपी द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी किये गये एक सॉन्ग की नकल ज्यादा लग रहा है। उससे भी ज्यादा खराब बात यह है कि समाजवादी पार्टी के इस गाने को उसी सिंगर द्वारा गाया गया है जिसने 2022 के चुनाव में बीजेपी के लिए गाया था। दोनों ही पार्टियों के समर्थकों द्वारा इन्हें खूब शेयर किया जा रहा है।
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क़मर वहीद नक़वी
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