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प्रचार में आगे लेकिन कोरोना के टीकाकरण में पीछे है योगी सरकार!

कोरोना के टीकाकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार बड़े-बड़े दावे करने में पीछे नहीं है। लेकिन उसके ये दावे ज़मीनी हक़ीक़त से बेहद दूर हैं। भारत में टीकाकरण शुरू हुए 144 दिन (9 जून तक) हो चुके हैं जबकि 18 से 45 साल वालों का टीकाकरण 1 जून से शुरू हुआ था। 

इस हिसाब से इस वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान शुरू हुए 40 दिन पूरे हो चुके हैं लेकिन उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां अब तक 15 फ़ीसदी से कम लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगी है। ऐसे ही हाल बिहार और तमिलनाडु के भी हैं। 

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बीजेपी महासचिव ने की थी तारीफ़

उत्तर प्रदेश में चल रही सियासी उथल-पुथल के बीच जब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष कुछ दिन पहले लखनऊ आए तो उन्होंने योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ों के पुल बांध दिए। बीएल संतोष ने ट्वीट कर कहा था कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पांच हफ़्तों में ही हर दिन आने वाले कोरोना संक्रमण के मामलों को 93 फ़ीसद कम किया है। 

उन्होंने कहा था कि यह 20 करोड़ से ज़्यादा आबादी वाला राज्य है। उन्होंने कुछ छोटे राज्यों विशेषकर दिल्ली के लिए तंज कसते हुए कहा था कि नगर पालिका जितनी आबादी वाले राज्य के मुख्यमंत्री 1.5 करोड़ की आबादी वाले शहर का प्रबंधन नहीं कर सके जबकि योगी आदित्यनाथ ने बड़ी आबादी वाले राज्य का कहीं प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया। 

लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश तो उन राज्यों में शामिल है, जहां 15 फ़ीसदी से भी कम लोगों को कोरोना की पहली डोज़ लगी है, ऐसे में किस तरह का प्रबंधन योगी सरकार ने किया है, यह समझना मुश्किल है। 

केंद्र सरकार ने कहा है कि वो दिसंबर के आख़िर तक देश में सभी लोगों का टीकाकरण कर देगी। इस दावे पर पहला सवाल तो टीके की उपलब्धता का है क्योंकि कई राज्यों में टीकों की किल्लत को देखते हुए दिसंबर तक 106 करोड़ लोगों को दोनों डोज़ लगाना संभव नहीं दिखता। 

9 गुना रफ़्तार से करना होगा काम

टीओआई के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश में हर दिन 1.4 लाख डोज़ लगाई जा रही हैं और इस हिसाब से दिसंबर तक सभी व्यस्कों का टीकाकरण करने के लिए हर दिन 13.2 लाख डोज़ लगानी होंगी। यानी प्रदेश सरकार जिस रफ़्तार से अभी काम कर रही है, उसे 9 गुना ज़्यादा रफ़्तार के साथ काम करना होगा। 

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उत्तर प्रदेश में अभी तक सिर्फ़ 2.5% लोगों को वैक्सीन की दो डोज़ लगी हैं। यानी इतने ही लोगों का टीकाकरण पूरा हो सका है। इसका मतलब साफ है कि कोरोना के टीकाकरण में सरकार पीछे है लेकिन वह बता रही है कि वह तेज़ रफ़्तार से टीकाकरण कर रही है, जो कि सच नहीं है। 

9 जून की शाम 5 बजे तक भारत में 19.19 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़ लग चुकी थी जबकि पहली और दूसरी डोज़ लगवाने वाले कुल लोगों की तादाद 24 करोड़ से ज़्यादा है। सिर्फ़ 3 फ़ीसद लोग ऐसे हैं जिन्हें कोरोना की दोनों डोज़ लगी हैं। ऐसे में साल के अंत तक केंद्र सरकार कैसे शत-प्रतिशत टीकाकरण कर देगी, यह समझ से परे है। 

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