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यूपी: 69000 शिक्षकों की भर्ती विवादों में, प्रियंका ने कहा- नया ‘व्यापमं’

उत्तर प्रदेश में अरसे से अटकी बेसिक शिक्षा विभाग के 69000 शिक्षकों की भर्ती पर घोटालों का ग्रहण लग गया है। पहले ग़लत आंसर-की के आधार पर कुछ परीक्षार्थी अदालत में गए जहाँ से इस भर्ती पर रोक लगी फिर आरक्षित वर्ग की सूची में घालमेल का आरोप सामने आया और अब पैसे लेकर भर्ती कराने वाले गिरोह के प्रयागराज में पकड़े जाने के बाद तो पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। यूपी में सभी विपक्षी दल इस भर्ती के ख़िलाफ़ मैदान में आ गए हैं। प्रियंका गाँधी ने भर्ती में धांधली को लेकर योगी सरकार पर ज़ोरदार हमला बोलते हुए इसे व्यापमं घोटाले जैसा घोटाला क़रार दिया है। बता दें कि व्यापमं यानी मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल घोटाला मध्य प्रदेश से जुड़ा प्रवेश एवं भर्ती परीक्षा घोटाला है। इसके पीछे कई नेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यवसायियों का हाथ है।

समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि भर्ती में घोटाले के ख़िलाफ़ सपाई सड़क पर उतरेंगे। तमाम सवालों में उलझ चुकी इस भर्ती की उच्च स्तरीय जाँच की माँग को लेकर अब अभ्यर्थियों ने अदालत का दरवाज़ा भी खटखटाने की तैयारी कर ली है।

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प्रयागराज में पकड़ा गया साल्वर गिरोह 

प्रयागराज पुलिस ने रविवार को एक गिरोह को दबोचा है जो परीक्षाओं में सेटिंग कर पर्चा आउट कराता था और पैसा लेकर लोगों की भर्ती करवाता था। इस गिरोह में जिन लोगों को पैसा देकर भर्ती होने के आरोप में पकड़ा गया है उनमें से कुछ तो एसे हैं जिन्होंने लिखित परीक्षा में 150 में 141 नंबर तक पाए हैं। हैरत की बात तो यह है कि इन परीक्षार्थियों के इंटर व स्नातक की परीक्षाओं में नंबर काफ़ी कम हैं। इस गिरोह के पकड़े जाने का खुलासा होने के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। जगह-जगह पर अभ्यर्थियों ने आरोप लगाते हुए पूरी भर्ती को रद्द करने व उच्च स्तरीय जाँच की माँग करनी शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया पर आरोप वायरल

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर तमाम आरोप सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। रिजल्ट आने के बाद ही कई अभ्यर्थियों की डिटेल सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी जिनकी परफार्मेंस एकैडेमिक परीक्षाओं में काफ़ी ख़राब थी पर उन्होंने लिखित परीक्षा में ख़ासे अंक पा लिए थे। अर्चना तिवारी नाम की छात्रा को अन्य पिछड़ा वर्ग में चयनित होने व एक अन्य सामान्य जाति के अभ्यर्थी के अनुसूचित जनजाति के कोटे में चयनित होने की भर्ती शीट भी वायरल हुई। कुछ ऐसे सफल लोगों के नाम वायरल हुए जिन्होंने एक ही सेंटर पर परीक्षा दी और एक ही परिवार के थे व उन सबको सफलता मिल गयी। पुलिस के खुलासे के बाद अभ्यर्थी बाक़ी आरोपों की जाँच की माँग कर रहे हैं। दूसरी ओर भर्ती को पूरी कराने को लेकर अपनी पीठ ठोक रही योगी सरकार ने एक आदेश जारी कर सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने वालों पर कार्रवाई के लिए कहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने अपनी शिकायत पुलिस के सायबर सेल को भेजी है।

प्रियंका के आरोप 

भर्ती घोटाले पर सबसे ज़्यादा मुखर रहीं प्रियंका गाँधी ने सोमवार को कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती घोटाला उत्तर प्रदेश का व्यापमं घोटाला है। इस मामले में गड़बड़ी के तथ्य सामान्य नहीं हैं। कांग्रेस महासचिव ने अपने ट्वीट में कहा कि डायरियों में स्टूडेंट के नाम, पैसे का लेनदेन, परीक्षा केंद्रों में बड़ी हेरफेर, इन गड़बड़ियों में रैकेट का शामिल होना - ये सब दर्शाता है कि इसके तार काफ़ी जगहों पर जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। सरकार अगर न्याय नहीं दे सकी तो इसका जवाब आंदोलन से दिया जाएगा।

सोमवार दोपहर इस पूरे मसले पर यूपी कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें एमएलसी दीपक सिंह ने कहा कि 69 हज़ार शिक्षक भर्ती व्यापमं की तरह बड़ा घोटाला है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी ने चुनाव से पहले घोषणा की थी कि युवाओं को रोज़गार देगी लेकिन सरकार ने युवाओं के साथ धोखाधड़ी की है। इस पूरी भर्ती को रद्द किया जाए और इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।’

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प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बीरेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ की सरकार के संरक्षण में गिरोह चल रहा है जिसने इस शिक्षक भर्ती में युवाओं के साथ धोखाधड़ी की। उन्होंने कहा कि यह सैकड़ों करोड़ रुपए का घोटाला है। बीजेपी को बताना चाहिए कि क्या ऐसे घोटालों से वह चुनाव का पैसा इकट्ठा कर रही है। वीरेंद्र चौधरी ने कहा, ‘केएल पटेल जोकि शिक्षा माफिया है, इस भर्ती में इलाहाबाद में उसकी भूमिका सामने आई है और केएल पटेल तो छोटी मछली है। जाँच होगी तो बड़े बड़े लोग सामने आएँगे।’

प्रदेश कांग्रेस महासचिव मनोज यादव ने कहा कि एमआरसी की प्रक्रिया से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का भारी नुक़सान हुआ है। यह सरकार सामाजिक न्याय की हत्या करने पर उतारू है। तमाम ज़िलों से सूची में फेरबदल किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार दलितों पिछड़ों के हक़ पर डाका डाल रही है।

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कुमार तथागत
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