समाजवादी पार्टी की कैराना लोकसभा सांसद इकरा हसन पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। उनके ऊपर यूपी के शामली जिले में डीआईजी कार्यालय के बाहर बिना अनुमति प्रदर्शन करने का आरोप लगाया गया है। यह घटना 19 मई को हुई थी, जब इकरा हसन जसाला गांव के युवक मोनू कश्यप की हत्या के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पीड़ित परिवार के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं।
पुलिस के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर संजय कुमार शर्मा की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। इसमें इकरा हसन के अलावा पूर्व मंत्री मांगे राम कश्यप, तेजपाल सिंह, अजय, अनुज, शिशपाल और सत्यपाल समेत छह अन्य नामजद हैं। इसके अलावा 20 से 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में सड़क जाम करने, सार्वजनिक आवागमन बाधित करने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने और अवैध जमावड़े की धाराएं लगाई गई हैं।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 19 मई को दोपहर करीब 2:15 बजे डीआईजी कार्यालय के बाहर लोगों की भीड़ जमा होने और सड़क ब्लॉक करने की सूचना मिली। जब पुलिसकर्मी सड़क खोलने और ट्रैफिक बहाल करने की कोशिश कर रहे थे, तब प्रदर्शनकारियों ने सहयोग नहीं किया और रास्ता खोलने में बाधा डाली।

क्यों पहुंची थीं इकरा हसन डीआईजी कार्यालय?

यह पूरा मामला जसाला गांव के रहने वाले मोनू कश्यप की मौत से जुड़ा है। 21 अप्रैल को पंजोखड़ा में रेलवे ट्रैक के पास मोनू का शव मिला था। परिवार ने इसे हत्या बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मुद्दे पर जनता सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है। ओबीसी संगठन भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी मामले में पीड़िता की मां के साथ इकरा हसन पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है।

मोनू कश्यप की मौत संदिग्ध हालात में हुई थी। पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने मोनू को एक कार्यक्रम में बुलाया, शराब पिलाई और एक लड़की से संबंधित विवाद के बाद उसे ट्रेन के सामने धकेल दिया। हालांकि पुलिस का कहना है कि मोनू की हत्या की गई है। इस मामले में शामिल लोग काफी प्रभावशाली हैं और सत्ता पक्ष के नज़दीकी लोग हैं।

इकरा हसन मोनू की मां के साथ डीआईजी अभिषेक सिंह से मिलने गई थीं। उन्होंने डीआईजी से निष्पक्ष जांच की अपील की थी। बाद में इकरा हसन ने आरोप लगाया कि डीआईजी ने उनकी बात सुनी, लेकिन मामले का हल नहीं निकला, बैठक संतोषजनक नहीं रही और पीड़िता मां काफी निराश लौटीं।
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सांसद का आरोप

इकरा हसन ने बताया कि डीआईजी दफ्तर पर प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उन्हें थोड़ी देर के लिए हिरासत में लिया और महिला थाने ले जाकर बाद में छोड़ दिया। वहां पुलिस अधिकारी के साथ इकरा हसन की बातचीत का वीडियो वायरल है। उस वीडियो में इकरा हसन कहती नज़र आ रही हैं कि गोली मार दोगे, गिरफ्तार कर लोगे। कर लो। क्या हम दफ्तर के बाहर गेट पर खड़े भी नहीं हो सकते। अपनी बात भी नहीं कह सकते।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित कार्रवाई की गई है। मामले की जांच जारी है।