उत्तर प्रदेश के बरेली में बिना अनुमति खाली मकान में सामूहिक नमाज़ पढ़ने के वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया। तो क्या नमाज़ पढ़ना अपराध है? पुलिस ने किस आधार पर कार्रवाई की?
बरेली में घर में नमाज पढ़ने पर गिरफ़्तारी।
नमाज पढ़ने पर गिरफ्तारी? यूपी में ये भी क्या कोई जुर्म है? सोशल मीडिया पर लोग ऐसे ही सवाल पूछ रहे हैं जब बरेली जिले में मोहम्मदगंज गांव में खाली पड़े एक घर में कुछ लोगों के नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल होने पर 12 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि उसको शिकायत मिली थी कि यह घर अस्थायी मदरसा की तरह इस्तेमाल हो रहा था और बिना किसी लिखित अनुमति के सामूहिक धार्मिक गतिविधि चल रही थी। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या घर के अंदर नमाज पढ़ना भी अपराध है?
पुलिस के अनुसार, बिशारतगंज थाना क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में हनीफ नाम के एक व्यक्ति का खाली पड़ा मकान कई हफ्तों से इस्तेमाल हो रहा था। यहां जुम्मे शुक्रवार की नमाज सामूहिक रूप से पढ़ी जा रही थी। गांव के कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई, पुलिस को सूचना दी और फिर पुलिस ने कार्रवाई भी कर दी।
यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। वायरल वीडियो में लोग घर के अंदर चटाई बिछाकर नमाज पढ़ते दिख रहे हैं। इस वीडियो के साथ सोशल मीडिया यूज़र पूछ रहे हैं कि क्या अब घर के अंदर नमाज पढ़ना भी जुर्म हो गया है और इससे शांति भंग कैसे हो रही थी?
संविधान पर सीधा हमला: चंद्रशेखर आज़ाद
चंद्रशेखर आज़ाद ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि मोहम्मदगंज में एक निजी मकान में नमाज़ अदा करने पर 12 लोगों को हिरासत में लिया जाना न सिर्फ़ अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक है, बल्कि यह संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा है, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, यदि कोई कानून-व्यवस्था का वास्तविक खतरा नहीं था तो निरोधात्मक कार्रवाई किस आधार पर की गई? क्या अब निजी घर में शांतिपूर्वक इबादत भी पुलिस की 'अनुमति' की मोहताज होगी?"आज़ाद ने आगे कहा है, 'यह घटना दर्शाती है कि किस तरह धार्मिक अल्पसंख्यकों की आस्थाओं को शक और दमन की दृष्टि से देखा जा रहा है। हम यूपी सरकार से मांग करते हैं कि- हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाए, इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, धर्म के आधार पर की जा रही पुलिसिया मनमानी पर तत्काल रोक लगे।'
डॉ. उवेद मुआज़्ज़म नाम के यूज़र ने बरेली पुलिस को टैग करते हुए उनसे पूछा है, 'बरेली में घर के अंदर नामज़ पढ़ना जुर्म की श्रेणी में आता है क्या? 12 लोगों पर FIR हुई है। बरेली पुलिस, घर के अंदर नमाज़ पढ़ना कौन-सा जुर्म है? या उत्तर प्रदेश पुलिस का क़ानून अलग है?'
उत्तर प्रदेश से और ख़बरें
कई यूजरों ने पूछा कि क्या अब अपने घर में भी नमाज के लिए पुलिस से परमिशन लेनी पड़ेगी? कुछ ने इसको लेकर धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए, जबकि पुलिस का जोर कानून-व्यवस्था और अनुमति पर है।
नरगिस बानो नाम की यूज़र ने लिखा है, "बरेली में घर पर नमाज पढ़ रहे 12 मुसलमानों पर FIR दर्ज। मुसलमान ट्रेन में नमाज पढ़े तो FIR, मुसलमान एयरपोर्ट पर नमाज पढ़े तो FIR, मुसलमान सड़क पर नमाज पढ़े तो FIR, मुसलमान कमरे में नमाज पढ़े तो FIR, मुसलमान रेलवे स्टेशन पर नमाज पढ़े तो FIR। घरों में गीता पाठ के लिए 15-20 लोग इकठ्ठा हो जायें तो पुलिस को कोई एतराज नहीं। और एतराज किस बात का, धर्म का पालन करने की इज़ाज़त क़ानून देता है लेकिन जब मुसलमान कुछ सदस्य मिलकर नमाज पढ़ते हैं तो उन पर FIR दर्ज हो जाती है, ये बड़े शर्म की बात है।"
अंसार इमरान नाम के यूज़र ने लिखा है, "भाजपा राज के इस नए भारत में आपका स्वागत है! जहां एक समुदाय की इबादत को धीरे धीरे क्राइम बनाया जा रहा है! अपनी घरों में नमाज पढ़ना भी अब अपराध घोषित है, पुलिस आपको गिरफ्तार कर लेगी! ताजा मामला यूपी के बरेली के मोहम्मदगंज गांव का है। बाकी मुसलमानों को छोड़ सब त्यौहार धार्मिक यात्रा सड़कों पर ही होगी मगर कोई कुछ नहीं कहेगा, उल्टा पुष्प वर्षा होगी। बस ये सब कायदे कानून मुसलमानों तक सीमित है।"
पुलिस का क्या कहना है?
साउथ एसपी अंशिका वर्मा ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस ने सतर्कता के तौर पर कार्रवाई की। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि मौक़े पर पहुंचकर पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि तीन लोग भाग गए। इन 12 लोगों पर शांति भंग करने की धाराओं में आरोप लगाया गया। बाद में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से सभी को जमानत मिल गई। पुलिस फरार तीन लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस ने कहा कि जब अनुमति के बारे में पूछा गया तो नमाजियों की ओर से कोई लिखित दस्तावेज या वैध परमिशन नहीं दिखाई गई। एसपी ने लोगों से अपील की कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखें। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना अनुमति के ऐसी कोई नई धार्मिक गतिविधि या इकट्ठा होना कानून का उल्लंघन है और सख्त कार्रवाई होगी।यह मामला संवेदनशील है क्योंकि उत्तर प्रदेश में पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। कई ऐसे मामले आए हैं जहाँ धार्मिक गतिविधियों पर अनुमति और शिकायत के आधार पर कार्रवाई हुई है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ शांति बनाए रखने के लिए की गई है, न कि किसी धर्म के ख़िलाफ़।
हालाँकि, अभी तक पुलिस ने यह नहीं बताया है कि आख़िर नमाजियों ने किस तरह से शांति भंग की है। यह भी नहीं कहा गया है कि क्या उन्होंने किसी के ख़िलाफ़ कोई उकसावे वाली बात कही या फिर उनसे किसी की क्या शांति भंग हुई? क्या पुलिस में शिकायत कर देना भर शांति भंग के दायरे में आ जाता है? पुलिस ने अभी तक ऐसे सवालों का जवाब नहीं दिया है। पुलिस कह रही है कि इसकी अभी जाँच जारी है और वीडियो को सबूत के तौर पर शामिल किया गया है।