चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया के बाद कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम इस सूची में शामिल किए गए हैं। पहले कुल 15.44 करोड़ मतदाता थे। इनमें से 2.89 करोड़ यानी क़रीब 18.70% नाम काट दिए गए। इतने नाम देश के किसी अन्य राज्य में नहीं कटे हैं। ये नाम इसलिए काटे गए क्योंकि या तो लोगों की मौत हो चुकी है या फिर वे अपना पता बदल चुके थे, गायब थे या एक से ज्यादा जगह पर उनका नाम था। लेकिन कुछ लोगों का आरोप है कि 2003 की मतदाता सूची में नाम होने, इस बार फॉर्म भरने, पूरे कागजात जमा करने के बाद भी नाम कट गए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल ने ये आरोप लगाया है। समाजवादी पार्टी ने भी मैनपुरी में वैध मतदाताओं के नाम कटने का आरोप लगाया है।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स यानी बीएलओ इन लोगों को ढूंढ नहीं पाए या इनसे फॉर्म नहीं मिले। ये लोग या तो हमेशा के लिए दूसरी जगह चले गए, पोलिंग एरिया से गायब थे या 26 दिसंबर 2025 तक फॉर्म नहीं जमा कर पाए।

किन कारणों से नाम कटे

  • पता बदलने या गायब होने वाले: 2.17 करोड़ यानी 14.06%
  • मर चुके मतदाता: 46.23 लाख यानी 2.99%
  • एक से ज्यादा जगह रजिस्टर्ड: 25.57 लाख यानी 1.65%
रिनवा ने कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नामों में से भी क़रीब 8.5% की मैपिंग नहीं हो पाई है। ऐसे लोगों को आज से नोटिस भेजे जाएंगे। नोटिस में बताया जाएगा कि वे कौन-कौन से दस्तावेज जमा करके अपना नाम अंतिम सूची में जुड़वा सकते हैं।

वोटरों का आक्रोश आंदोलन में न बदल जाए: अखिलेश

बड़े पैमाने पर नाम कटने से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मैनपुरी का वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर लिखा, 'इससे पहले कि मतदाताओं का रोष आक्रोश बनकर आंदोलन का रूप ले ले, चुनाव आयोग मैनपुरी में एसआईआर से कटे वैध नामों के लिए संज्ञान लेकर मतदाता सूची दुरुस्त कराए।'

गुरदीप सिंह सप्पल के पूरे परिवार का नाम गायब

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने भी शिकायत की कि उनका और उनके पूरे परिवार का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब हो गया है। उन्होंने कहा कि उनके नाम 2003 की लिस्ट में थे, पिछले चुनाव में भी थे, सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे- पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, आधार, बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी पेपर आदि। उन्होंने कहा कि वे खुद राज्यसभा में जॉइंट सेक्रेटरी रह चुके हैं और कांग्रेस की हाई कमेटी सीडब्ल्यूसी के सदस्य हैं। बीएलओ भी उन्हें जानते हैं।

उन्होंने कहा, 'कारण बताया गया कि हमने अपना घर उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधान सभा से नोएडा विधान सभा शिफ्ट कर लिया था। और हमें बताया गया कि एसआईआर में शिफ्ट हुए वोटरों का नाम बरकरार रखने का कोई प्रावधान नहीं है! मतलब, अगर किसी वोटर ने अपना घर किसी नए इलाके में बदल लिया है, तो उसका नाम काट दिया गया है।'

एसआईआर की सच्चाई!

सप्पल ने कहा, 'मेरे जैसे करोड़ों सच्चे मतदाता प्रभावित हैं। मैं तो फॉर्म 6 भरकर नाम जुड़वा लूंगा, लेकिन कितने लोग ऐसा कर पाएंगे? यही एसआईआर की सच्चाई है!'

विपक्षी पार्टियां इसे पक्षपात बता रही हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने की कोशिश है। यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए है, लेकिन इतने बड़े बदलाव से कई मतदाताओं को परेशानी हो रही है।

अब आगे क्या होगा?

अब दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने का समय 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक है। इनकी जाँच और फ़ैसला 26 जनवरी से 27 फरवरी तक होगा। अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को जारी की जाएगी।

यह एसआईआर प्रक्रिया पिछले साल 27 अक्टूबर से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुई थी। यूपी में यह तीसरी बार शेड्यूल बदला गया। पहले ड्राफ्ट लिस्ट 31 दिसंबर 2025 को आनी थी, लेकिन बड़े पैमाने पर नाम कटने के कारण 15 दिन की मोहलत मांगी गई। इस अतिरिक्त समय में क़रीब 8 लाख नए नाम जोड़े गए। अब 6 मार्च को पता चलेगा कि इसमें कितने नाम जुड़ते हैं या फिर और भी नाम कटेंगे।