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सक्रिय हुए शाह, यूपी में एक तिहाई विधायकों के टिकट काट सकती है बीजेपी

उत्तर प्रदेश में तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक हालात के बीच बीजेपी की कोशिश राज्य की सत्ता में एक बार फिर से वापसी करने की है। बीजेपी के चुनावी चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पार्टी की तैयारियों का जायजा लेने के लिए लखनऊ पहुंचे हैं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीएसपी की सियासी सक्रियता के बीच बीजेपी भी पूरे प्रदेश भर में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन से लेकर दलित और ओबीसी जातियों के बीच में कार्यक्रम कर अपनी पहुंच बढ़ा रही है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते दिनों में कुशीनगर, सिद्धार्थनगर और वाराणसी का दौरा कर पूर्वांचल में जनता के बीच पहुंच चुके हैं। 

मेगा सदस्यता अभियान की शुरुआत 

कुछ दिन पहले ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनावी तैयारियों के संबंध में उत्तर प्रदेश बीजेपी के नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद अब कमान अमित शाह ने संभाली है। शाह ने यहां बीजेपी के मेगा सदस्यता अभियान की शुरुआत की और पार्टी पदाधिकारियों को चुनावी तैयारियों से जुड़े ज़रूरी टिप्स भी दिए। सदस्यता अभियान के जरिये पार्टी का लक्ष्य नए डेढ़ करोड़ सदस्य बनाने का है। वर्तमान में पार्टी के पास उत्तर प्रदेश में 2.30 करोड़ सदस्य हैं। 

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इस बीच यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपने एक तिहाई विधायकों के टिकट काट सकती है। इन विधायकों के बारे में ऐसी सूचना है कि इनका प्रदर्शन ख़राब रहा है और ये पार्टी के रडार पर हैं। 
ख़बरों के मुताबिक़, ऐसे विधायक जो संगठन के साथ तालमेल बनाकर नहीं चल रहे हैं और जिनके बारे में पार्टी को अच्छा फ़ीडबैक नहीं मिला है, पार्टी उनके टिकट काट सकती है। बीजेपी ने इसे लेकर अपना आंतरिक सर्वे भी कराया है।

इनमें कई विधायक ऐसे हैं, जो 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में आए थे। यहां याद रखना होगा कि मोदी-शाह के फ़ॉर्मूले पर चलते हुए बीजेपी पहले भी कई राज्यों में बड़ी संख्या में विधायकों-सांसदों के टिकट काटती रही है। 2017 में हुए दिल्ली नगर निगम के चुनाव में तो पार्टी ने सारे उम्मीदवार नए उतार दिए थे।

Uttar pradesh BJP gears up for 2022 election  - Satya Hindi

किसान आंदोलन से मिल रही चुनौती

उत्तर प्रदेश में इस बार का विधानसभा चुनाव किसान आंदोलन के कारण बेहद रोमांचक हो गया है। पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह आंदोलन बेहद मज़बूत है और लखीमपुर खीरी की घटना के ख़िलाफ़ बाक़ी जगहों पर भी किसानों ने आवाज़ बुलंद की है। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी की मांग को लेकर किसानों के साथ ही विपक्ष ने भी हल्ला बोल का एलान किया हुआ है। इसलिए बीजेपी के सामने चुनौतियां ज़्यादा हैं। 

उत्तर प्रदेश में चुनावी मैदान सज चुका है। अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव यात्राएं निकाल रहे हैं जबकि बीएसपी ब्राह्मण सम्मेलनों और कांग्रेस प्रतिज्ञा यात्राओं के जरिये जनता के बीच दस्तक दे रही है।

छोटे दलों को जोड़ा

ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन होने के बाद बीजेपी ने भी कुछ छोटे दलों को अपने साथ जोड़ लिया है। ऐसे दलों की संख्या 9 है और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने एलान किया है कि बीजेपी इन दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। 

बीजेपी जानती है कि छोटे दल कुछ सीटों पर प्रभावी हैं और अगर इनका साथ चाहिए तो इन्हें टिकट बंटवारे से लेकर सत्ता में भागीदारी देनी होगी। इन दलों के साथ दलित, पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के नेता बड़ी संख्या में जुड़े हैं।
बीजेपी का पहले ही निषाद पार्टी और अपना दल (एस) के साथ गठबंधन है। अब उसने भारतीय सुहेलदेव जनता पार्टी, शोषित समाज पार्टी, भारतीय मानव समाज पार्टी, मुसहर आंदोलन मंच, मानवहित पार्टी, पृथ्वी राज जनशक्ति पार्टी और भारतीय समता समाज पार्टी को अपने साथ मिला लिया है। इन दलों का पूर्वांचल में थोड़ा-बहुत असर है लेकिन बीजेपी के साथ आने से यह असर कई सीटों पर निर्णायक हो सकता है। 
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यूपी के लिए अहम हैं शाह

ये अमित शाह ही हैं जिन्होंने बीजेपी को 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में जोरदार जीत दिलाई थी और विपक्षी दलों का लगभग सूपड़ा साफ़ कर दिया था। तब अमित शाह पार्टी के महासचिव होने के साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे। 

इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए शाह ने सालों तक उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर रही बीजेपी की 2017 के चुनाव में सत्ता में धमाकेदार वापसी कराई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत में शाह के योगदान को लेकर उनकी सार्वाजनिक रूप से तारीफ़ कर चुके हैं। इसलिए इस बार भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अमित शाह की अहम भूमिका रहेगी। 

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