अंकिता भंडारी के परिवार ने उत्तराखंड सरकार के सीबीआई जांच के फैसले को 'अधूरा' बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और वीआईपी पहचान की मांग की है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है
बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड सरकार द्वारा सीबीआई जांच के आदेश के बावजूद पीड़िता के परिवार ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। परिवार का कहना है कि सरकार का आदेश अधूरा है, क्योंकि इसमें सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच का कोई जिक्र नहीं है और न ही कथित ‘वीआईपी’ के बारे में कोई स्पष्टीकरण दिया गया है।
19 वर्षीय अंकिता भंडारी, जो ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं, की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्या (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्या के बेटे) को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। ट्रायल के दौरान अंकिता के सहकर्मियों और दोस्तों ने अदालत को बताया था कि उन्हें वीआईपी लोगों को ‘एक्स्ट्रा सर्विसेज’ देने के लिए दबाव डाला जा रहा था, जिसे अंकिता ने ठुकरा दिया था।
हाल ही में जनवरी 2026 की शुरुआत में सहारनपुर की अभिनेत्री उर्मिला सनोवार से जुड़े एक ऑडियो लीक ने मामले को फिर से गरमा दिया। इस ऑडियो में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की कथित बातचीत सुनाई देती है, जिसमें अंकिता हत्याकांड में एक ‘वीआईपी’ के शामिल होने का जिक्र है। इस लीक के बाद पूरे उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच और उस ‘वीआईपी’ की पहचान की मांग की।
इन विरोध प्रदर्शनों के दबाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 जनवरी 2026 को अंकिता के माता-पिता विरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी से मुलाकात की। इसके दो दिन बाद यानी 9 जनवरी 2026 को राज्य सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश जारी किया। सीएम धामी ने कहा कि वे अंकिता को सिर्फ पीड़िता नहीं, बल्कि बहन और बेटी की तरह मानते हैं और न्याय सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हालांकि, इस फैसले से परिवार संतुष्ट नहीं हुआ। अंकिता के पिता विरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा, “हमें सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में सीबीआई जांच चाहिए। लेकिन सीएम ने कहीं भी इसका जिक्र नहीं किया है।”मां सोनी देवी ने इसे और साफ करते हुए कहा, “आदेश अधूरा है और आंदोलन अभी भी जारी है। यह आदेश सतही है। हमारी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।”
परिवार और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि जांच में कथित वीआईपी की भूमिका की गहन पड़ताल हो और जांच पूरी तरह निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हो।
विरोध प्रदर्शनकारी 11 जनवरी को प्रस्तावित ‘उत्तराखंड बंद’ को फिलहाल वापस ले चुके हैं, लेकिन शनिवार (10 जनवरी) को होने वाली बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। पूर्व नौसेना अधिकारी पी.सी. थपलियाल, जो प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट निगरानी का उल्लेख न करके लोगों को गुमराह कर रही है। पूर्व सैनिकों ने इसी हफ्ते अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने के लिए रैली भी निकाल थी।