समान नागरिक संहिता लाने के अमित शाह के बार-बार के वादे से लगता है कि बीजेपी में किसी तरह की हताशा झलक रही है। क्या इसका मतलब यह है कि राम मंदिर पहले ही अपनी मतदान क्षमता को पार कर चुका है?
समान नागरिक संहिता लाने के अमित शाह के बार-बार के वादे से लगता है कि बीजेपी में किसी तरह की हताशा झलक रही है। क्या इसका मतलब यह है कि राम मंदिर पहले ही अपनी मतदान क्षमता को पार कर चुका है?