कर्नाटक का 'फेक न्यूज बिल 2025' अभिव्यक्ति की आज़ादी पर चोट बन सकता है। फेक न्यूज की अस्पष्ट परिभाषा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया पर नियंत्रण का ज़रिया बन सकती है। सवाल है, क्या सरकार इसका दुरुपयोग कर असहमति दबाएगी, या यह कानून न्यायिक समीक्षा में टिक पाएगा?
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