ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों की तादाद कम ज़रूर हो गई है, मगर आंदोलनरत किसानों के हौसले कम नहीं हुए हैं और न ही उनका संकल्प ढीला पड़ा है। मगर सवाल उठता है कि सौ दिनों में उन्होंने क्या हासिल किया है? ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार की रिपोर्ट
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।

























