यूरोप के कई देशों की तरह फ्रांस भी कोरोना महामारी की चपेट में था, मगर अब वह धीरे-धीरे उसके चंगुल से बाहर निकल रहा है। उसकी ये जद्दोजहद कैसी रही और अब वहाँ के लोग कैसा महसूस कर रहे हैं, इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने बात की फ्रांस में रह रही फिल्ममेकर निहारिका जिंदल से।
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।
























