रामास्वामी पेरियार की मृत्यु 1973 में हो गई थी लेकिन 2019 में रामदेव को एकाएक उनकी आलोचना करने की ज़रूरत क्यों पड़ी? पेरियार रामदेव के किसी व्यापार में बाधा नहीं थे और न ही वे उत्तर भारत में उतने लोकप्रिय हैं कि रामदेव उनसे मुखड़ा लें। सोशल मीडिया पर चल रहे पेरियार बनाम रामदेव के संघर्ष पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के सवाल।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।














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