क्या नरेंद्र मोदी की ‘झप्पी डिप्लोमेसी’ कूटनीतिक मोर्चे पर कमजोर पड़ गई है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच 'शांतिदूत' बनकर उभर रहा है और इस्लामाबाद में उनकी ऐतिहासिक बैठक कराने की तैयारी में है. तो क्या पीएम मोदी के फैसलों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर दिया है?












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