टीएमसी के वो जहांगीर खान बंगाल में फलता सीट पर दोबारा मतदान से सिर्फ़ दो दिन पहले चुनाव लड़ने से पीछे हट गए जिन्होंने IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को चुनौती देते हुए कहा था कि 'अगर वो सिंघम हैं तो मैं पुष्पा हूँ।' यानी उनके कहने का साफ़ मतलब था कि 'वो झुकेंगे नहीं'। लेकिन उनके चुनाव से नाम वापस लेने को उनके झुकने के तौर पर देखा जा रहा है। जहांगीर के इस फ़ैसले से टीएमसी को तगड़ा झटका लगा है।

फलता विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान के लिए टीएमसी ने जहांगीर खान को उम्मीदवार बनाया था। वह चुनाव मैदान में उतरे। बीजेपी उम्मीदवार को चुनौती देते रहे। लेकिन उन्होंने अचानक से मंगलवार को चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। जहांगीर खान ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी हैं। फलता सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में आती है, जहाँ से अभिषेक बनर्जी सांसद हैं।
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जहांगीर खान ने क्या वजह बताई?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जहांगीर खान ने कहा, 'मैं फलता का बेटा हूँ। मैं चाहता हूँ कि फलता में शांति रहे और विकास हो। हमारे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी फलता के विकास के लिए विशेष पैकेज दे रहे हैं। इसलिए मैं इस रिपोल से अलग हो रहा हूं।' हालाँकि, बीजेपी के सत्ता में आने से पहले वह बीजेपी और शुभेंदु अधिकारी पर हमलावर रहे थे। उनकी आक्रामकता तब और बढ़ गई थी जब IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को बंगाल में चुनाव ड्यूटी में लगाया गया था और अफ़सर ने काफ़ी सख्ती की थी।

जहांगीर खान पुष्पा थे तो झुके क्यों: TMC नेता

जहांगीर खान ने चुनाव से पहले IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को चुनौती दी थी। शर्मा को 'सिंघम' के नाम से जाना जाता है। जहांगीर ने खुद को 'पुष्पा' बताते हुए कहा था, 'अगर वो सिंघम हैं तो मैं पुष्पा हूँ।' अब टीएमसी के नेता ही जहाँगीर खान पर सवाल उठा रहे हैं और उनकी आलोचना कर रहे हैं। 

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने जहांगीर के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, 'अगर जहांगीर खान पुष्पा थे तो वह झुक क्यों गये?'

रिपोल से पहले फलता में TMC का कोई बड़ा नेता कैंपेनिंग करने नहीं पहुंचा तो बीजेपी ने भी इसको मुद्दा बनाया। इस पर बीजेपी बंगाल अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने तंज कसते हुए पूछा था कि अभिषेक बनर्जी कहां हैं? मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी जहांगीर खान पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'पुष्पा कहां है?'
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पहले क्या कहा था अभिषेक बनर्जी ने?

चुनाव नतीजों से पहले अभिषेक बनर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि 'दस जिंदगी में भी बंगाल विरोधी गुजराती गैंग और उनके गुर्गे ज्ञानेश कुमार मेरे डायमंड हार्बर मॉडल में सेंध नहीं लगा सकते।' लेकिन उनके इस मॉडल में ही आने वाली फलता सीट पर टीएमसी के उम्मीदवार जहाँगीर ने अपना नाम ही वापस लेने की घोषणा कर दी। 

बीजेपी का बयान

पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि पहले के सालों में टीएमसी फलता में कैंपेनिंग नहीं करती थी, बल्कि असामाजिक तत्वों के ज़रिए लोगों को वोट देने से रोकती थी। अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा, 'गुंडे भाग गए हैं, पुलिस का साथ नहीं मिल रहा है। अब कौन उनके लिए कैंपेन करेगा?'

चुनाव रद्द क्यों हुआ था?

4 मई को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने बंगाल की 293 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन फलता में बड़े गड़बड़झाले की वजह से चुनाव आयोग ने पूरे मतदान को रद्द कर दिया था। अब यहां दोबारा मतदान होना है।
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चुनाव आयोग ने फलता में मतदाताओं को डराने-धमकाने, ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ और विपक्षी उम्मीदवारों के नाम ब्लॉक करने जैसे गंभीर आरोपों की वजह से मतदान रद्द किया। कई बूथों पर पर्याप्त सीसीटीवी फुटेज भी नहीं मिला, जिससे निष्पक्ष जाँच मुश्किल हो गई।

यह घटना टीएमसी के लिए मुश्किल समय का संकेत दे रही है, खासकर तब जब बीजेपी पूरे बंगाल में मज़बूत स्थिति में है। फलता में दोबारा मतदान अब और भी दिलचस्प हो गया है।