पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलने लगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस एक्शन, क्लॉक टावर विध्वंस और विपक्ष के आरोपों पर प्रभाकर मणि तिवारी की ग्राउंड रिपोर्ट पढ़िए।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी क्या उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तर्ज पर राज्य में त्वरित ‘न्याय’ के लिए यहां भी ‘बुलडोजर संस्कृति’ लागू कर रहे हैं? सरकार के हाल के कार्यकलापों और पार्टी के कुछ नेताओं के बयानों से तो यही लगता है।
भाजपा सरकार ने कहा है कि राज्य में किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऐसे निर्माण के मामले में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है।
'योगी मॉडल'
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार या शपथ ग्रहण समारोह में शुभेंदु ने जिस सम्मान के साथ योगी आदित्यनाथ के पैर छुए थे उससे अटकलें लगने लगी थीं कि शायद वो यहां भी प्रशासन का योगी मॉडल ही लागू करेंगे।शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने पत्रकारों से कहा है कि राज्य में तमाम अवैध निर्माण की पहचान का काम चल रहा है। इसकी सूची बनने के बाद इन भवनों के मालिकों को नोटिस दिया जाएगा। अगर उनके पास सही दस्तावेज नहीं हुए तो ऐसे निर्माण को ढहा दिया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आरोप
मंत्री का आरोप था कि पहले की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राजधानी कोलकाता में ऐसे अवैध निर्माण की फलने-फूलने दिया। ऐसे ज्यादातर भवन मालिकों के पास फायर लाइसेंस या एनओसी नहीं है। इसी वजह से आग लगने की स्थिति में दर्जनों लोगों की मौत होती रही है।चुनावी नतीजों के दिन ही कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में भाजपा के उत्साही कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जिस तरह मांस बेचने वाले एक दुकान को बुलडोजर से ढहा दिया उससे सरकार की मंशा साफ हो गई थी।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने बुलडोजर के साथ जुलूस निकालने पर पाबंदी लगा दी थी। पुलिस ने तब कहा था कि विजय जुलूस या रैली के लिए किराए पर बुलडोजर देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
चमड़ा कारखाने पर बुलडोजर चला
लेकिन उसके बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है। कोलकाता के पूर्वी छोर पर तपसिया के एक चमड़ा कारखाने में आग लगने से दो लोगों की मौत के बाद अगले दिन ही उस पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए उसे गिरा दिया गया। हालांकि अब हाईकोर्ट ने उस इमारत को पूरी तरह ढहाने पर रोक लगा दी है।पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
क्लॉक टावर गिराया
इसके बाद कोलकाता से सटे गड़िया इलाके में मिताली संघ मैदान पर बना एक क्लॉक टावर भी बृहस्पतिवार को ढहा दिया गया। वर्ष 2023 में तृणमूल कांग्रेस नेता और ममता बनर्जी सरकार के मंत्री अरूप विश्वास की पहल पर इस टावर का निर्माण किया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाहुबल पर उस अवैध क्लॉक टावर का निर्माण किया गया था और वहां पूर्व मंत्री की तस्वीर भी लगी है। इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद स्थानीय लोगों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में इस टावर के खिलाफ याचिका दायर की थी। उस पर सुनवाई के बाद अदालत ने उस अवैध निर्माण को ढहाने का निर्देश दिया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उस समय अदालत के निर्देश की अनदेखी की गई। अब सरकार बदलते ही उसे ढहा दिया गया है।
'बुलडोजर संस्कृति' का समर्थन
दूसरी ओर, दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू विस्टा ने भी बुलडोजर संस्कृति का समर्थन करते हुए कहा है कि अब राज्य में कोई अवैध निर्माण नहीं होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश से 20 बुलडोजर खरीदने का ऑर्डर दिया है ताकि सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में अवैध निर्माण ढहाया जा सके।
उन्होंने अवैध निर्माण करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा है कि इससे पहले कि वहां बुलडोजर पहुंचे, आप खुद ही अवैध निर्माण ढहा दें। बुलडोजर पहुंच गया तो काफी नुकसान हो सकता है।लेकिन विपक्ष का कहना है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बंगाल में ‘बुलडोजर संस्कृति’ लागू करना सही नहीं है। उसके मुताबिक, ऐसे मामले में कानून प्रक्रिया का पालन करते हुए ही कोई कार्रवाई की जानी चाहिए।
विपक्ष की दलील है कि भाजपा भय नहीं भरोसे की राजनीति का दावा कर सत्ता में आई थी। लेकिन अब वह सिर्फ भय की राजनीति कर रही है।
भांगड़ के विधायक नौशाद सिद्दीकी इस ‘बुलडोजर संस्कृति’ को असंवैधानिक बताते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे मामले की जांच के बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। मनमाने तरीके से किसी भवन को नहीं ढहाया जा सकता।
तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा सरकार देश के तमाम राज्यों में बुलडोजर संस्कृति चला रही है। ऐसे में बंगाल में भी इसकी शुरुआत से कोई हैरत नहीं होनी चाहिए। यही उसकी कार्यप्रणाली है।