पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ मतदान के बाद अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे सत्ता के दावेदारों यानी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने अब दूसरे चरण में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा के प्रचार अभियान की कमान संभाल रखी है और तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के तेवर और आक्रामक हो गए हैं।

पहले चरण के बाद भाजपा ने कम से कम 110 सीटों पर जीत का दावा किया है। यह तब है जबकि वो पिछली बार इन 152 में से महज 59 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी। तब तृणमूल कांग्रेस को 92 सीटें मिली थी। तृणमूल कांग्रेस ने इस बार 125 से 135 सीटों पर जीत का दावा किया है।
तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी का दावा है कि बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी इस बार नंदीग्राम सीट भी हारेंगे। लेकिन शुभेंदु का दावा है कि वो इस बार भवानीपुर में भी ममता बनर्जी को उसी तरह हराएंगे जिस तरह पिछली बार नंदीग्राम में हराया था।

प्रधानमंत्री मोदी का हमला

प्रधानमंत्री अपनी रैलियों में अब टीएमसी का दिया बुझने से पहले टिमटिमाने का दावा कर रहे हैं। कई दिनों से कोलकाता में डेरा जमाए शाह भी लगातार चुनावी रैलियाँ और रोड शो कर रहे हैं। उनका 27 अप्रैल तक बंगाल में ही रहने का प्लान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो यहाँ नहीं होंगे। लेकिन वो 27 और 28 अप्रैल को पड़ोसी सिक्किम में रहेंगे और वहीं से अपने भाषणों के ज़रिए बंगाल के वोटरों को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे।
वैसे, चुनाव आयोग के आँकड़ों से एक दिलचस्प बात सामने आई है। इसमें बताया गया है कि पहले चरण में जहाँ मतदान हुआ है वहां वर्ष 2021 के चुनाव में 3.78 करोड़ वोटरों में से 3.14 करोड़ ने वोट डाले थे। इसके मुक़ाबले वर्ष 2026 में वहां 3.60 करोड़ वोटरों में से 3.24 करोड़ लोगों ने वोट डाला है।

इससे साफ़ है कि एसआईआर के दौरान पहले चरण के चुनाव वाले 152 सीटों पर महज 18 लाख नाम ही कटे हैं। यानी बाक़ी क़रीब 73 लाख नाम दूसरे चरण की 142 सीटों पर कटे हैं।

एक बात को ध्यान में रखें तो इस आंकड़े की अहमियत समझ में आती है। पहले दौर में कई इलाकों में भाजपा मजबूत थी और दूसरे दौर में तृणमूल कांग्रेस काफी मजबूत नजर आती है। दूसरे चरण में इतने बड़े पैमाने पर कटे नाम कई सीटों पर चुनावी समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।

महिलाओं का मतदान प्रतिशत ज़्यादा

इस बार पहले चरण में पुरुषों के मुकाबले दो फीसदी ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया है। पुरुषों के मामले में आंकड़ा जहां 91 फीसदी है वहीं महिलाओं का आंकड़ा 93 फीसदी है। इससे तृणमूल कांग्रेस यह हिसाब लगाने में जुटी है कि इसकी वजह लक्ष्मी भंडार है या फिर आर.जी. कर कांड के खिलाफ महिलाओं का आंदोलन। हालांकि पार्टी के नेताओं का दावा है कि एसआईआर के कारण होने वाली परेशानियों के कारण ही महिलाओं ने भाजपा के खिलाफ खुल कर वोट डाले हैं।
पार्टी के नेताओं की दलील है कि आर.जी. कर की घटना के खिलाफ महिलाएं देर रात को कोलकाता समेत विभिन्न शहरों की सड़कों पर भले उतरी थी लेकिन उनका मकसद उस घटना का विरोध करना था, ममता बनर्जी सरकार का नहीं।

तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि अब तक ऐसी कोई वजह सामने नहीं आई है कि तृणमूल को महिलाओं के समर्थन में कमी आने का संकेत मिले। महिलाएं हमेशा ममता के साथ रही हैं और इस बार भी अपवाद नहीं होगा।

इस बीच, चुनाव आयोग ने साफ़ कर दिया है कि पहले दौर के मतदान के बाद कहीं भी पुनर्निर्वाचन नहीं कराया जाएगा।

दूसरी ओर, 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे दौर के मतदान से पहले राज्य में ईडी फिर सक्रिय हो गई है। उसने उत्तर 24-परगना जिले के विभिन्न स्थानों पर शनिवार को तलाशी अभियान चलाया। उसने वर्ष 2020 में बांग्लादेश को अनाज के निर्यात से संबंधित एक शिकायत पर एक चावल व्यापारी के घर छापेमारी की। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में इससे पहले कम से कम डेढ़ दर्जन स्थानों पर तलाशी कर चुकी है।
ईडी ने इससे पहले ममता बनर्जी सरकार के दो मंत्रियों को भी एक पुराने मामले में समन भेज कर 25 अप्रैल को हाजिर होने को कहा था। लेकिन उन दोनों की याचिका पर हाईकोर्ट ने चुनाव तक उनको इससे राहत दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बंपर वोटिंग का गणित सुलझाने में नाकाम रहने के बावजूद खासकर भाजपा के नेता दूसरे दौर के वोटरों को प्रभावित करने और अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भारी जीत के दावे कर रहे हैं। उनको अच्छी तरह पता है कि दूसरे दौर की सीटों पर पार्टी की स्थिति कमजोर है।