पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: चुनाव आयोग ने मतदान से पहले रात में बाइकों पर पाबंदी और पीछे सवारी बैठाने पर रोक लगा दी है। भारी तादाद में सीएपीएफ कर्मियों की अभूतपूर्व तैनाती ने विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग पर बीजेपी की मदद का आरोप है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण (23 अप्रैल) और दूसरे चरण (29 अप्रैल) से ठीक पहले चुनाव आयोग (EC) ने राज्य में अभूतपूर्व सुरक्षा उपायों की घोषणा की है। इनमें दोपहिया वाहनों पर सख्त पाबंदियां, शराब की 96 घंटे की बैन और लगभग 2.4 लाख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) जवानों की तैनाती शामिल है। चुनाव आयोग का दावा है कि ये कदम हिंसा-मुक्त, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे ‘बीजेपी की साजिश’ और ‘चुनाव में दखलंदाजी’ बताया है। विपक्षी दल ने केंद्रीय बलों की तटस्थता पर सवाल उठाए हैं।
बाइक और पिलियन राइडर पर सख्त प्रतिबंध
चुनाव आयोग ने मतदान से दो दिन पहले (पहले चरण के लिए मंगलवार से और दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल से) रात 6 बजे से सुबह 6 बजे तक मोटरसाइकिलों को सड़कों पर चलने की पूरी तरह मनाही लगा दी है। दिन के समय (सुबह 6 से शाम 6 बजे) पिलियन राइडर (दूसरे सवार) की अनुमति नहीं होगी, सिवाय मेडिकल इमरजेंसी, पारिवारिक कार्यक्रम या स्कूल से बच्चों को छोड़ने-लेने के।
आयोग के एक अधिकारी ने कहा, “बाइक सवारों द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने या नकद-शराब पहुंचाने से रोकने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। संकरी गलियों से गुजरने वाली बाइक नाकेबंदी (नाका चेक) को चकमा दे सकती है।” आयोग ने स्पष्ट किया कि ये पाबंदियां पूरे राज्य में लागू हैं। साथ ही सोमवार से 96 घंटे की शराब बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, क्योंकि अप्रैल 2026 में शराब की बिक्री में ‘असामान्य उछाल’ देखा गया था। पुरबा मेदिनीपुर जिले के दीघा में पर्यटकों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है और होटल मालिकों को जिले के बाहर के लोगों को ठहराने की मनाही है।
CAPF की अभूतपूर्व तैनाती और मल्टी-फोर्स बैठक
चुनाव आयोग ने 2026 विधानसभा चुनाव के लिए 2,407 कंपनियों (करीब 2.4 लाख जवान) की CAPF तैनाती की है, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी है। पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। तैनाती मार्च की शुरुआत से ही शुरू हो चुकी है और क्षेत्र-प्रभाव (area domination) अभ्यास चल रहे हैं। मतदान के बाद 500 कंपनियां राज्य में रहेंगी, जबकि 200 कंपनियां वोटिंग मशीनों और गिनती केंद्रों की सुरक्षा करेंगी।
20 अप्रैल को कोलकाता में CRPF, BSF, CISF, SSB और ITBP के सभी प्रमुखों की संयुक्त बैठक हुई। जो किसी राज्य चुनाव के लिए अभूतपूर्व है। बैठक का मकसद ‘एकीकृत सुरक्षा ग्रिड’ बनाना था। आयोग ने AI-सक्षम CCTV और GPS ट्रैकिंग का भी इस्तेमाल करने का फैसला किया है।
चुनाव आयोग ने दो चरणों में मतदान और 2021 चुनाव के बाद हुई हिंसा को तैनाती का आधार बताया है। कई बूथों को ‘संवेदनशील’ या ‘अति-संवेदनशील’ घोषित किया गया है।
चुनाव आयोग की तटस्थता पर सवाल
TMC ने इन उपायों को ‘बीजेपी-समर्थित’ बताया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि “केंद्रीय एजेंसियां पक्षपाती तरीके से काम कर रही हैं। बीजेपी से जुड़े चैनलों के जरिए पैसे और नशीले पदार्थ केंद्रीय बलों की मदद से राज्य में लाए जा रहे हैं।” मालदा में केंद्रीय बलों और पुलिस ने TMC कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारे और धमकियां दीं। एक कार्यकर्ता यूसुफ अली (बहादुर) के घर जाकर उनकी बीमार मां को डराया गया। TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने X पर लिखा, “बीजेपी के पालतू आईपीएस अधिकारी चुनाव में दखल देने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं।”
सबंग में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें CAPF जवान ने TMC नेता को थप्पड़ मारा। TMC ने इसे ‘बहुत ज्यादा’ कार्रवाई बताया। बीजेपी ने TMC के आरोपों को ‘कानून-व्यवस्था की असफलता से ध्यान भटकाने की कोशिश’ करार दिया। मुर्शिदाबाद में CRPF के एक हेड कांस्टेबल ने आत्महत्या का प्रयास किया, जो बलों पर पड़े तनाव को दर्शाता है। CAPF की तैनाती से स्कूल-कॉलेजों में परीक्षाएं प्रभावित हुईं; कई संस्थानों ने 4 मई (गिनती के दिन) के बाद भी कक्षाएं खाली न होने की शिकायत की।
सुरक्षा बलों की तटस्थता और अनुपात पर सवाल
कुछ विश्लेषकों ने सीएपीएफ जवानों की तैनाती को ‘अनुपातहीन’ बताया। 2024 में मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान मात्र 288 CAPF कंपनियां तैनात की गई थीं, जबकि पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए 2,407 कंपनियां भेजी जा रही हैं। आलोचकों का कहना है कि केंद्र-शासित CAPF का इस स्तर का इस्तेमाल TMC शासित राज्य में ‘केंद्र सरकार की मौजूदगी बढ़ाने’ जैसा लगता है। मतदाताओं पर ‘दबाव’ का संदेश भी जा सकता है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस ऑपरेशन को खुद देख रहे हैं।
चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सुरक्षा उपाय मतदाताओं को बिना डरे मतदान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं।
2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव सुरक्षा की दृष्टि से सबसे सख्त चुनावों में से एक बन गया है। मोटरसाइकिल प्रतिबंध, शराब बैन और भारी CAPF तैनाती के साथ-साथ TMC के गंभीर आरोपों ने पूरे माहौल को विवादास्पद बना दिया है। अब 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, तब देखना होगा कि ये उपाय कितने प्रभावी साबित होते हैं और जनता की नजर में चुनाव आयोग की निष्पक्षता कितनी बरकरार रहती है।