पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। राज्य में आज बुधवार को दूसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान प्रक्रिया जारी है। राज्य की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच इस बार का मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है। चुनाव के इस अंतिम चरण में दोनों ही दलों के लिए कई सीटें 'साख का सवाल' बनी हुई हैं।

क्या है चुनावी माहौल?

राजनीतिक विशेषज्ञों और विभिन्न चुनावी सर्वेक्षणों (ओपिनियन पोल्स) के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस बार सत्ता का संग्राम 50-50 की स्थिति में है। पहले चरण के दौरान राज्य में रिकॉर्ड 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो मतदाताओं के भारी उत्साह को दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वोटिंग सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency) का संकेत भी हो सकती है, जिसका सीधा असर नतीजों पर पड़ने की संभावना है।

प्रमुख मुद्दे और चुनावी समीकरण

वोट बैंक पैटर्न में बदलाव: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस चुनाव में विभिन्न समुदायों के लगभग 5% वोट बैंक में संभावित बदलाव की चर्चा है, जो बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि पहले चरण में जिस तरह से भारी मतदान हुआ है, वो ममता बनर्जी के पक्ष में इस अंतर को पाट सकता है। एसआईआर में वोट कटने से भी लोग नाराज़ हैं। उसका असर दिखाई दे सकता है।

प्रमुख मुद्दे: हालांकि बीजेपी ने बंगाल चुनाव में हिन्दू-मुसलमान ध्रुवीकरण की जबरदस्त कोशिश की है। हुमायूं कबीर जैसे फैक्टर से उसने फायदा उठाने की कोशिश की। लेकिन मतदाताओं के एक बड़े वर्ग में बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और सरकार का प्रदर्शन प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विपक्षी दल अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सत्तारूढ़ दल अपनी लोक कल्याणकारी योजनाओं के दम पर वापसी की उम्मीद कर रहा है।

युवा और नए मतदाता: इस बार के चुनाव में युवा और पहली बार मतदान करने वाले वोटर्स की भूमिका बेहद निर्णायक रहने वाली है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि युवा मतदाताओं का झुकाव सीपीएम की तरफ दिखाई दिया। लेकिन बहुत स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। नतीजों के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी।
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2021 का इतिहास और 2026 का समीकरण

2021 के चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 294 सीटों में से 215 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी 77 सीटों पर सिमट गई थी। टीएमी को 48.5 फीसदी और बीजेपी को 38.4 फीसदी वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव 2024 में टीएमसी का वोट कम हुआ था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीजेपी यहाँ 150 सीटों तक पहुँच जाती है, तो मुकाबला बेहद कांटे का हो सकता है। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि 29 अप्रैल को 200 सीटों का आंकड़ा पार हो जाएगा। 2021 में सारे एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। वे बीजेपी के जीतने की भविष्यवाणी कर रहे थे। लेकिन एग्जिट पोल से पहले ही तमाम टीवी चैनल जिस तरह की रिपोर्ट या डिबेट दिखा रहे हैं, उसमें वो फिर से बीजेपी के पक्ष में पलड़ा भारी दिखा रहे हैं। हालांकि स्वतंत्र यूट्यूबर और कुछ दिग्गज पत्रकारों ने बंगाल में घूमने के बाद कहा है कि ममता को बढ़त हासिल है, भले ही सीटें कम हो सकती हैं।

खतरा कहां हैः अगर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) कम सीटों के साथ सत्ता में वापसी करती है, तो यह महाराष्ट्र जैसी पार्टी स्प्लिट (विभाजन) की स्थिति बन सकती है। इससे BJP के नेतृत्व वाली सरकार राजनीतिक मैन्युवरिंग (चालबाजी) के जरिए बनने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

शहरी ऊपरी वर्ग (भद्रलोक) का रुख 

कहा जा रहा है कि बंगाल का शहरी ऊपरी वर्ग (urban upper classes / bhadraloks) अब “सॉफ्ट हिंदुत्व” (softer Hindutva) चाहता हैं। यह संकेत अगर सही है कि शहरी भद्रलोक ममता को हटाने के लिए BJP को वोट देना “सम्मानजनक” (respectable) मानता है, तो हालात बदल सकतें है। क्योंकि बंगाल का भद्रलोक अभी तक बीजेपी से दूरी बनाकर चल रहा था। लेकिन उस वर्ग से कई प्रत्याशी बीजेपी ने इस बार मैदान में उतारे हैं। लेकिन ममता की ग्रामीण इलाकों और मुस्लिम समुदाय में गहरी पैठ बीजेपी की भद्रलोक बढ़त को पीट सकती है।
पिछले हफ्ते बंगाल की 152 सीटों पर मतदान हुआ था। उससे बीजेपी खेमा उत्साहित है, लेकिन किसी ने अभी टीएमसी को पूरी तरह आउट नहीं माना है। लेकिन हाल के वर्षों में बीजेपी ने गैर-बीजेपी शासित कई राज्यों को अपने कब्जे में लिया है। उसे लेकर तमाम तरह के विवाद भी रहे हैं।

4 मई को किसकी सरकार?

पश्चिम बंगाल के साथ-साथ अन्य चुनावी राज्यों के नतीजे एक साथ 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। राज्य की राजनीति में यह चुनाव एक बड़े 'बदलाव' या 'सत्ता की निरंतरता' का परीक्षण है। तृणमूल कांग्रेस जहां अपने 15 साल के गढ़ को बचाने की लड़ाई लड़ रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी राज्य में अपनी पहली जीत के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है।
चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। अब सबकी निगाहें एग्जिट पोल और आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि अगले पांच साल तक बंगाल की कमान किसके हाथों में होगी।