चुनाव से पहले बंगाल और केंद्र के बीच एक और मोर्चा खुल गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगाया। पीएम मोदी भी इस विवाद में कूदे और टीएमसी पर हमला किया।
बंगाल चुनाव से पहले राज्य में जबरदस्त राजनीति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का शनिवार 7 मार्च को पश्चिम बंगाल का एक दिवसीय दौरा विवादित हो गया। राष्ट्रपति ने सिलिगुड़ी में आयोजित 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के आयोजन स्थल और प्रोटोकॉल संबंधी खामियों पर खुलकर असंतोष जताया। राष्ट्रपति, जो संथाल समुदाय से हैं और भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति हैं, ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी "छोटी बहन" बताते हुए कहा कि शायद वे उनसे नाराज हैं। लेकिन उन्होंने कोई मनमुटाव नहीं रखा। इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे "शर्मनाक और अभूतपूर्व" करार दिया तथा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया। टीएमसी नेता इस पूरे विवाद को चुनाव से जोड़ रहे हैं। उन्होंने कि राज्य विधानसभा चुनाव में आदिवासियों को फुसलाने के लिए बीजेपी इस तरह का प्रपंच कर रही है। अफसोस है कि राष्ट्रपति को इसके लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू सिलिगुड़ी में अंतरराष्ट्रीय संथाल परिषद द्वारा आयोजित 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। सम्मेलन में उन्होंने आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी संस्कृति, परंपराओं, भाषा और पर्यावरण संरक्षण की सराहना की। उन्होंने आदिवासी युवाओं से आधुनिक विकास अपनाते हुए अपनी भाषा और लिपि से जुड़े रहने तथा अन्य भाषाएं सीखने की सलाह दी।
हालांकि, राष्ट्रपति ने बिधाननगर में एक अन्य कार्यक्रम के दौरान आयोजकों और दर्शकों से कहा, "ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं। शायद वे नाराज हैं। मुझे नहीं पता क्यों उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को इतने तंग स्थान पर आयोजित किया। यदि स्थान बड़ा होता, तो अधिक लोग सम्मेलन में शामिल हो सकते थे।" उन्होंने बिधाननगर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आयोजित होने पर पांच लाख लोग आसानी से शामिल हो सकते थे।
राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल में बड़ी लापरवाही की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही कोई राज्य मंत्री उनको स्वागत करने पहुंचे। केवल सिलिगुड़ी के मेयर गौतम देब ही मौजूद थे। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशासन ने भीड़ के डर से कुछ व्यवस्थाएं सीमित रखीं, लेकिन उन्होंने कोई कड़वाहट नहीं जताई और ममता बनर्जी के प्रति शुभकामनाएं दीं।
यह यात्रा मूल रूप से 6 मार्च से दो दिवसीय तय थी, जिसमें दार्जिलिंग शामिल था, लेकिन राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के बाद कार्यक्रम संशोधित कर एक दिवसीय कर दिया गया। इस्तीफे के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
प्रधानमंत्री मोदी का टीएमसी पर हमला
इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करने वाले हर व्यक्ति दुखी है।" पीएम मोदी ने आगे कहा, "राष्ट्रपति जी द्वारा व्यक्त किया गया दर्द और व्यथा, जो स्वयं आदिवासी समुदाय से हैं, ने भारत के लोगों के मन में अथाह दुख पैदा किया है। पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सच में सभी सीमाओं को पार कर दिया है। उनकी प्रशासन इस राष्ट्रपति के अपमान के लिए जिम्मेदार है।" उन्होंने संथाल संस्कृति के प्रति लापरवाही पर भी दुख जताया।भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने भी टीएमसी पर निशाना साधा। पार्टी ने एक्स पर पोस्ट किया कि जब राज्य सरकार राष्ट्रपति के पद की गरिमा की अनदेखी करती है, तो यह प्रशासनिक चूक से आगे है और संवैधानिक शालीनता में गहरे क्षरण का संकेत है।
TMC का मोदी और मुर्मू पर हमला
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इस घटनाक्रम को लेकर पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू पर हमला बोला है। सागरिका ने कहा- पीएम मोदी, आप कितनी घटिया हरकत कर सकते हैं? राष्ट्रपति के उच्च पद का दुरुपयोग करके आप घटिया राजनीति खेल रहे हैं। बेहद शर्मनाक! सागरिका ने दूसरे ट्वीट में राष्ट्रपति से कहा- महामहिम राष्ट्रपति, हम आपका बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन हमें खेद है कि आप भाजपा की राजनीति में फंस गई हैं।मगरमच्छ के आंसू बचाकर रखिए मोदी जीः सुषमिता देव
टीएमसी की सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुषमिता देव ने पीएम मोदी के बयान पर जबरदस्त हमला बोला। सुषमिता ने कहा- मणिपुर के आदिवासी समुदायों और वहां की लोकतंत्र व्यवस्था के साथ जो कुछ हुआ, वो पीएमओ की निगरानी में हुआ, वह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। मोदी जी, मगरमच्छ के आंसू बाद के लिए बचाकर रखें। ममता बनर्जी आपकी सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी हैं - इस बात को स्वीकार करें और बंगाल एक बार फिर बीजेपी को निर्णायक रूप से नकार देगा। जय बांग्ला, जय हिंद।