टीएमसी की रैली में पीड़ित के लिए न्याय की मांग पर ज़ोर दिए जाने और राज्य में महिलाओं की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरे जाने की संभावना है। राजनीतिक दल तथा नागरिक समाज के समूह इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में ममता बनर्जी को आख़िरकार रैली निकालने की मंजूरी मिल गई। यह मंजूरी पुलिस प्रशासन या सरकार से नहीं, बल्कि अदालत से मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को 8 जुलाई को प्रस्तावित विरोध रैली निकालने की अनुमति दे दी है।
यह रैली पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को लेकर आयोजित की जाएगी। अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के इस मामले ने पूरे राज्य में भारी रोष पैदा कर दिया है और विपक्ष तथा सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। ममता बनर्जी ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए 8 जुलाई को विरोध मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें निर्धारित कार्यक्रम आयोजित करने की इजाजत दे दी।
टीएमसी का कहना है कि रैली का उद्देश्य पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जनता की आवाज़ बुलंद करना है।
किशोरी पहले लापता, फिर लाश मिली
बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची शनिवार को अचानक लापता हो गई थी। परिवार ने उसी रात स्थानीय पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। अगले दिन सुबह बच्ची का शव एक तालाब से बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार बच्ची के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद हत्या की गई। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एक युवक की पीट-पीटकर हत्या
घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने एक युवक इंद्रजीत मंडल को आरोपियों का सहयोगी बताते हुए उसके घर से बाहर निकाल लिया और कथित तौर पर पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी।
लिंचिंग किए गए इंद्रजीत की मां का कहना है कि उनका बेटा निर्दोष था। उन्होंने आरोप लगाया कि सैकड़ों लोगों की भीड़ ने बिना कोई सफाई सुने उनके बेटे पर हमला कर दिया। पुलिस इस मॉब लिंचिंग की भी अलग से जांच कर रही है।
'पुलिस वक़्त पर कार्रवाई करती तो जान बच सकती थी'
पीड़िता की मां ने आरोप लगाया है कि यदि पुलिस ने शिकायत दर्ज होते ही तुरंत तलाश शुरू कर दी होती तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि शनिवार रात करीब 9 बजे गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने तुरंत सीसीटीवी फुटेज की जांच या व्यापक सर्च अभियान शुरू नहीं किया।
रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के दादा ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इलाके के लोगों ने सीसीटीवी फुटेज देखकर संदिग्धों की पहचान कर ली थी, फिर भी पुलिस ने तेजी से कार्रवाई नहीं की। परिवार ने सभी आरोपियों को फांसी की सजा देने के साथ-साथ कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।इलाके में भारी तनाव, पुलिस बल तैनात
घटना के बाद बारुईपुर, सोनारपुर और नरेंद्रपुर इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है और बड़े जमावड़ों पर भी निगरानी रखी जा रही है। इसके बावजूद सोमवार को भी बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को कड़ी सजा देने और पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की मांग की।
बीजेपी नेता के घर में तोड़फोड़
ग़ुस्साई भीड़ ने स्थानीय बीजेपी नेता शांतनु मंडल के घर पर भी हमला कर तोड़फोड़ की। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक आरोपी को पुलिस से बचने में मदद की। हालाँकि पड़ोसियों का कहना है कि घटना से पहले ही शांतनु और उनका परिवार घर छोड़कर चले गए थे। उन्होंने आरोपों से इनकार किया है।
टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने
बारुईपुर की घटना को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति भी गरमा गई है। इससे पहले टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थी।ममता बनर्जी इससे पहले कोलकाता में इस घटना के विरोध में कैंडल मार्च भी निकाल चुकी हैं। अब 8 जुलाई की रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
हाईकोर्ट से रैली की अनुमति मिलने के बाद बारुईपुर कांड एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गया है। सरकार, विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों की नजर अब जांच की प्रगति और 8 जुलाई को होने वाली रैली पर टिकी हुई है।