चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 294 आब्ज़र्वरों की तैनाती की है, जिनमें से 62% महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों से हैं। टीएमसी ने मतदान से पहले चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है।
बंगाल चुनाव में प्रचार जारी है
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 294 जनरल ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। जिससे हर विधानसभा क्षेत्र में एक आईएएस अधिकारी निगरानी कर रहा है। इनमें से 62 प्रतिशत ऑब्जर्वर भाजपा शासित राज्यों से हैं, जबकि 111 अधिकारी विपक्ष शासित राज्यों से भेजे गए हैं।
चुनाव आयोग ने कुल 549 जनरल ऑब्जर्वर, 180 पुलिस ऑब्जर्वर और 358 फाइनेंस ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल 1,097 ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं।। संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 20बी के तहत केंद्रीय ऑब्जर्वरों को निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने में मदद के लिए तैनात किया जाता है।
पश्चिम बंगाल में कुल जनरल ऑब्जर्वरों का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा तैनात किया गया है। जनरल ऑब्जर्वरों को रिटर्निंग अधिकारी को मतगणना रोकने या नतीजा घोषित न करने का निर्देश देने का अधिकार है। वे चुनाव आयोग से सीधे संपर्क में रहते हैं और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों की निगरानी करते हैं, जिसमें प्रमुख रैलियों में भाग लेना भी शामिल है।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप
तृणमूल कांग्रेस के नेता सकेत गोखले ने एक रैली में आरोप लगाया कि एक ऑब्जर्वर ने उनके और उनकी पत्नी के वाहनों की जांच के लिए व्हाट्सएप पर निर्देश जारी किया। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा नेताओं के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जा रही है। गोखले ने कहा, "बंगाल के अधिकारियों को बड़े पैमाने पर केरल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों में ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं इन राज्यों से अधिकारियों को भेजने के बजाय चुनाव आयोग ने भाजपा शासित राज्यों से बंगाल में ऑब्जर्वर भेजे हैं। चुनाव आयोग के पक्षपाती व्यवहार का जवाब बंगाल की जनता 4 मई को देगी, जब ईसीआई-भाजपा गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ेगा।"
भाजपा शासित राज्यों से कितने ऑब्जर्वर?
भाजपा शासित राज्यों से सबसे अधिक ऑब्जर्वर इन राज्यों से आए हैं:
- महाराष्ट्र: 42
- उत्तर प्रदेश: 36
- राजस्थान: 34
- मध्य प्रदेश: 27
अन्य राज्यों में तैनाती
पश्चिम बंगाल के अलावा केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी चुनाव हो रहे हैं या हो चुके हैं। लेकिन अन्य किसी भी राज्य में इतनी अधिक संख्या में ऑब्जर्वर नहीं तैनात किए गए हैं।
- असम (126 सीटें): 51 जनरल ऑब्जर्वर
- केरल (140 सीटें): 51 जनरल ऑब्जर्वर
- तमिलनाडु (234 सीटें): 136 जनरल ऑब्जर्वर
- पुडुचेरी (30 सीटें): 17 जनरल ऑब्जर्वर
असम में, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था, सिर्फ एक आईएएस अधिकारी कांग्रेस शासित राज्य से आया था।
संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने का कहना है कि अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए व्यापक ताकत देता है। लेकिन उसके मौजूदा कदम असामान्य लगते हैं। उन्होंने कहा कि ऑब्जर्वर नियुक्ति के नियम स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं। आमतौर पर एक निर्वाचन क्षेत्र में एक ऑब्जर्वर तैनात किया जाता है, कुछ संवेदनशील सीटों पर अधिक हो सकते हैं, लेकिन बंगाल में जो स्तर देखा जा रहा है, वह "अधिक डराने-धमकाने" जैसा लगता है।
आचार्य ने कहा कि अनुच्छेद 324 ताकत का भंडार है, लेकिन यह केवल तब काम करता है जब कानून मौन हो। यदि कोई वैध कानून पहले से मौजूद है, तो चुनाव आयोग आपातकालीन चुनावी शक्तियों का हवाला देकर उसे दरकिनार नहीं कर सकता।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने कहा है कि ऑब्जर्वरों की तैनाती भौगोलिक निकटता, पहुंच, परेशानियां, प्राकृतिक बाधाओं और पिछले चुनाव अनुभव जैसी वजहों पर आधारित होती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ये कदम भयमुक्त, हिंसारहित और लालच मुक्त चुनाव कराने के लिए उठाए गए हैं, जिसमें बूथ कैप्चरिंग या किसी भी तरह की अनियमितता न हो।
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में लगभग 2.55 लाख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) तैनात किए गए हैं और कई वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव, कोलकाता पुलिस आयुक्त और एडीजी (कानून व्यवस्था) शामिल हैं, को ट्रांसफर कर दिया गया है।
विपक्षी दलों ने इस कदम को सत्ता का दुरुपयोग बताया है, जिससे बहस तेज हो गई है कि ये उपाय सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं या डर पैदा कर रहे हैं।