महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल पर मोदी और ममता आमने-सामने हैं। क्या यह कदम चुनावी फायदे के लिए उठाया गया? रैलियों में अब मुख्य मुद्दा ये विधेयक ही क्यों?
नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी
लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिरते ही पश्चिम बंगाल चुनाव में तस्वीर बदल गई है। अब यहां एसआईआर को पीछे छोड़ते हुए यह सबसे बड़ा प्रमुख मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण के मतदान से ठीक पहले अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे को भुनाने में जुटे हैं।
TMC सरकार ने बेटियों को धोखा दिया: पीएम
मोदी ने रविवार को राज्य में अपनी चार चुनावी रैलियों में तृणमूल कांग्रेस पर संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 को पारित होने से रोकने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार ने बंगाल की बेटियों को धोखा दिया है। महिलाएं आने वाले विधानसभा चुनावों में इसकी सजा जरूर देंगी। उनका कहना था कि राज्य सरकार नहीं चाहती कि बंगाल की बेटियां ज्यादा संख्या में सांसद बनें। इसलिए संसद में आरक्षण से जुड़ा कानून पारित नहीं होने दिया।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ईमानदारी से देश को संबोधित करने के बजाय उसे गुमराह करना चुना।
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपनी एक पोस्ट में ममता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को राजनीति में ज़्यादा प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है। हमारे पास संसद और राज्य विधानसभा दोनों में सबसे ज़्यादा महिला प्रतिनिधि हैं। लोकसभा में हमारे 37.9 फीसदी सदस्य महिलाएं हैं। राज्यसभा में हमने 46 फीसदी महिला सदस्य नामित की हैं। महिलाओं के आरक्षण का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता।
असली विरोध परिसीमन से: ममता
ममता का कहना है कि हमारा असली विरोध परिसीमन से है। मोदी सरकार महिलाओं को ढाल बनाकर अपने राजनीतिक फायदे के लिए इसे आगे बढ़ाना चाहती थी। हमारा विरोध संविधान में बदलाव करने, देश को बांटने और सत्ता हथियाने की कोशिश से है। इसके तहत पार्टी परिसीमन से भाजपा शासित राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने और बाकी राज्यों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। यह संघीय लोकतंत्र पर हमला है।टीएमसी या बीजेपी को बढ़त?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी को उम्मीद है कि लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पर मतदान में एनडीए की पराजय से बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यहां तृणमूल कांग्रेस कुछ बढ़त मिल गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले से ही इस बिल के खिलाफ हमलावर थे। अब एनडीए की पराजय ने उनके तेवर और तीखे कर दिए हैं। ममता ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल तो बहाना है। इसके साथ परिसीमन बिल को जोड़ कर भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए देश के टुकड़े-टुकड़े करने का प्रयास कर रही है।
ममता ने हावड़ा में अपनी चुनावी रैली में कहा कि लोकसभा में भाजपा की हार के साथ ही उसके पतन की शुरुआत हो गई है। वो अब चुनाव भी हारेगी। इस मामले में बंगाल ही आगे की राह दिखाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि ममता बनर्जी ने पहले लोकसभा में मतदान के लिए पार्टी के पांच सांसदों को ही भेजने का फैसला किया था। लेकिन इस बिल की अहमियत और दूरगामी असर को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने 21 सांसदों को चुनाव प्रचार से हटाकर वहां भेजने का फैसला किया।
बीजेपी के पतन की शुरुआत: TMC
ममता बनर्जी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से बातचीत में साफ कर दिया है कि लोकसभा में एनडीए की हार तो शुरुआत है और वह अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी हारेगी। वहीं से केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के पतन की शुरुआत होगी।पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए ममता बनर्जी ने अपने चुनाव अभियान में एसआईआर के साथ लोकसभा में पेश बिल को भी प्रमुख मुद्दा बना लिया है। उन्होंने उत्तर बंगाल की अपनी चुनावी रैलियों में कहा है कि वह बिल पास होने पर बंगाल का विभाजन तय था और दार्जिलिंग समेत उत्तर बंगाल के कई जिलों का अस्तित्व खत्म हो सकता था।
'महिला आरक्षण का समर्थन, परिसीमन का विरोध'
ममता ने कोलकाता से सटे दमदम इलाके में अपनी रैली में कहा कि केंद्र सरकार ने महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़ कर महिलाओं का अपमान किया है। बंगाल में पंचायतों और नगर निगम में पहले से ही महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित हैं। उनका कहना था कि पार्टी महिला बिल का तो समर्थन करेगी लेकिन परिसीमन के साथ जोड़ने पर इसके समर्थन का सवाल ही नहीं पैदा होता।
पार्टी के एक नेता ने बताया कि ममता ने तमाम जिले में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भाजपा की इस कथित चालाकी के प्रचार में बड़े पैमाने पर प्रचार करने का निर्देश दिया है। इसमें मुख्य जोर इस बात पर रहेगा कि भाजपा ने सत्ता में बने रहने के लिए परिसीमन और लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे को महिलाओं के आरक्षण से जोड़ कर उनका अपमान किया है।ममता ने कहा है कि पार्टी संसद में परिसीमन विधेयक पारित करने का पुरजोर विरोध करती रहेगी। उनका सवाल है कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से कैसे जोड़ा जा सकता है?
यह दोनों मुद्दे अलग-अलग हैं। यह लोकतंत्र का गला दबाने की कोशिश है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने सवाल किया कि भाजपा ने कितनी महिलाओं को टिकट देकर उनको जिताया है?
दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी ने भी अपने चुनाव अभियान में भाजपा के प्रति और आक्रामक रवैया अपनाया है। उनका कहना था कि यह साफ हो गया है कि एनडीए सरकार अब उधार की सांसों पर चल रही है। अब राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के खिलाफ बयार बहने लगी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।
टीएमसी का आक्रामक प्रचार
बदली हुई परिस्थिति में तृणमूल कांग्रेस के आक्रामक प्रचार से निपटने के लिए भाजपा ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब वह तृणमूल कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है। भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा कि महिला मुख्यमंत्री के राज में महिलाएँ तो पहले से ही सुरक्षित नहीं थी। अब संसद में बिल का विरोध कर तृणमूल कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि उसकी कथनी और करनी में अंतर है।प्रदेश नेतृत्व ने जिला स्तर पर तमाम नेताओं को तृणमूल के प्रचार की काट के लिए इसी लाइन पर घर-घर जाकर प्रचार करने का निर्देश दिया है। उस नेता ने कहा कि परिसीमन के जरिए दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की दशकों पुरानी समस्या के राजनीतिक समाधान का रास्ता खुल सकता था। लेकिन ममता बनर्जी ऐसा नहीं चाहतीं।
ममता बनर्जी अपनी रैलियों में भाजपा पर बंगाल के विभाजन की साजिश रचने के आरोप लगा रही हैं। लेकिन अब भाजपा अपने प्रचार में इस बात पर जोर देगी कि बदली हुई जमीनी परिस्थितियों में परिसीमन से कई पुराने मुद्दों का समाधान किया जा सकता था। यहां इस बात का जिक्र प्रासंगिक है कि उत्तर बंगाल में गोरखा के अलावा कोच-राजबंशी और कामतापुरी समुदाय के लोग लंबे अरसे से पहचान की लड़ाई लड़ते रहे हैं। अमित शाह समेत भाजपा के तमाम नेता उत्तर बंगाल की अपनी रैलियों में इस समस्या के राजनीतिक समाधान का भरोसा देते रहे हैं।