पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा अफसरों के तबादलों का मुद्दा क्या और गरमाएगा? ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तो क्या यह बदलाव बीजेपी को फायदा पहुँचाने के लिए किया गया?
ज्ञानेश कुमार, ममता बनर्जी।
क्या जिस तरह के तबादले विपक्ष शासित पश्चिम बंगाल में किए गए उस तरह के तबादले बीजेपी शासित असम में किए गए हैं? यदि नहीं तो क्यों? तमिलनाडु और केरल में भी उस तरह के तबादले क्यों नहीं हुए हैं जहाँ बीजेपी चुनाव में बड़ी भूमिका में नहीं है? ये सवाल इसलिए क्योंकि इन तबादलों को लेकर चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ममता ने कहा है कि 'अंधेरे में छिपकर काम करने के बजाय चुनाव आयोग को अब खुलकर बीजेपी के लिए प्रचार करना शुरू कर देना चाहिए, कम से कम यह ज़्यादा ईमानदारी भरा होगा'।
टीएमसी प्रमुख ममता ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, 'आचार संहिता लागू होने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने मुख्य सचिव और प्रधान सचिव को हटा दिया। अब एक ही झटके में उन्होंने 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है।'
ममता ने आरोप लगाया कि पिछले चार महीनों से बीजेपी के 'दिल्ली के ज़मींदारों' ने पूरे राज्य प्रशासन को बेरहमी से अपनी गिरफ्त में जकड़ रखा है और एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार की हर शक्ति छीन ली है। उन्होंने कहा कि 'वे अधिकारियों को हटा सकते हैं। वे पुलिसकर्मियों का तबादला कर सकते हैं। वे सैकड़ों चुने हुए पर्यवेक्षकों को बाहर से ला सकते हैं। हो सकता है कि उन्होंने हर संस्था पर कब्ज़ा कर लिया हो। लेकिन एक चीज़ है जिस पर वे कभी कब्ज़ा नहीं कर पाएँगे, वह है जनता की ताक़त। और बंगाल की जनता की यही अजेय शक्ति बीजेपी को इस धरती से हमेशा-हमेशा के लिए उखाड़ फेंकेगी।'
ममता ने ये आरोप इसलिए लगाए क्योंकि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही चुनाव आयोग ने राज्य के कई बड़े अफ़सरों को हटा दिया। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और कई वरिष्ठ पुलिस अफसर शामिल हैं। इसके अलावा 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले किए गए, जिनमें कई जिलों के एसपी और कमिश्नर शामिल हैं।
टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन तबादलों पर बहुत सख्त प्रतिक्रिया दी है। ममता बनर्जी ने कहा है कि ये तबादले बिना किसी ठोस वजह के और एकतरफा तरीके से किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये बदलाव रात के अंधेरे में किए गए जो अस्वीकार्य है। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है और ये कदम बंगाल विरोधी और महिला विरोधी हैं। खासकर राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को हटाने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
तबादलों का मैसेज रात 1 बजे मिला: ममता
ममता बनर्जी ने कहा, 'रात 1 बजे मुझे मैसेज मिला। क्या कभी ऐसा सुना है कि रात के समय ऐसे फ़ैसले लिए जाएं? मुख्य सचिव बंगाली महिला हैं, उन्हें हटा दिया। ये बंगाल और महिलाओं के खिलाफ है।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई अनहोनी हुई तो इसके जिम्मेदार चुनाव आयोग और बीजेपी होंगे। टीएमसी सांसदों ने राज्यसभा से पूरे दिन वॉकआउट किया और इसे संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग बताया। टीएमसी नेता सागरिका घोष और कुणाल घोष ने भी कहा कि ये तबादले बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए हैं और किसी भी तरह से ममता बनर्जी को नहीं हटाया जा सकता। इसके साथ ही टीएमसी ने आज अपने सभी उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी।अन्य राज्यों में तबादले कितने हुए?
असम, तमिलनाडु और केरल में भी चुनाव आयोग ने अफसरों के तबादले किए, लेकिन पश्चिम बंगाल जितने बड़े पैमाने पर नहीं।
- असम में 5 आईएएस और 5 आईपीएस अफसरों के तबादले हुए। ये ज्यादातर डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर यानी डीईओ और एसएसपी के पदों पर थे। आयोग ने कहा कि चुनाव तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए ये जरूरी हैं।
- तमिलनाडु में मुख्य रूप से 4 जिलों के एसपी के तबादले हुए। कुछ डिप्टी कमिश्नरों को एसपी बनाया गया, लेकिन बड़े स्तर पर मुख्य सचिव या डीजीपी जैसे टॉप पदों पर बदलाव नहीं हुए।
- केरल में कुछ वरिष्ठ पुलिस और राजस्व अफसरों के तबादले हुए, जैसे कोझिकोड डिस्ट्रिक्ट पुलिस चीफ, थ्रिसूर डीआईजी रेंज आदि। लेकिन संख्या और प्रभाव कम था।
बंगाल में बड़े पैमाने पर तबादले क्यों?
पश्चिम बंगाल में तबादले ज्यादा बड़े और टॉप लेवल पर हैं, जबकि अन्य राज्यों में फोकस ज्यादातर जिला स्तर के पुलिस और चुनाव अफसरों पर रहा। पश्चिम बंगाल में ज़्यादा तबादले, जबकि बीजेपी शासित असम और विपक्षी दल शासित तमिलनाडु और केरल में कम हुए। तमिलनाडु व केरल में बीजेपी कमजोर है। तो क्या यह बीजेपी को फायदा पहुँचाने की कोशिश है या ममता को ग़लत लाभ लेने से रोकने की कोशिश? वैसे, ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच तकरार एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही शुरू हो गई थी। विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद यह बढ़ गई। आधी रात को तबादले को लेकर ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर विरोध जताया।
चुनाव आयोग का कहना है कि ये सब मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के बाद निष्पक्ष, स्वतंत्र और हिंसा-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं। आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव मशीनरी पर पूरा नियंत्रण है।
बीजेपी ने इन तबादलों का बचाव किया और कहा कि आयोग अपना संवैधानिक काम कर रहा है। टीएमसी इसे राजनीतिक साज़िश बता रही है। यह विवाद चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है। पश्चिम बंगाल में 294 सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होगी, गिनती 4 मई को होगी।