शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पहले सीएम होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को इसकी औपचारिक घोषणा कर दी। और इसके साथ ही राज्य का राजनीतिक इतिहास बदल गया। शुभेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा के साथ ही अब तक लग रही सभी अटकलों पर विराम लग गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में कोलकाता में शुक्रवार को हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया।

बीजेपी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की है। पार्टी ने 294 सदस्यों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीती हैं। इससे पहले बीजेपी बंगाल में कभी सत्ता में नहीं आई थी। दशकों की कोशिश के बाद पार्टी ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया।

शुभेंदु अधिकारी कौन हैं?

शुभेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति के बड़े चेहरे हैं। वे पहले तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी थे। बाद में वे बीजेपी में शामिल हो गए। 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस बार उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह भारी अंतर से जीत हासिल की। भवानीपुर ममता बनर्जी की सबसे मजबूत सीट मानी जाती थी, लेकिन शुभेंदु ने उन्हें यहां भी हरा दिया। नंदीग्राम में भी उन्होंने अपनी पुरानी सीट बरकरार रखी।
ताज़ा ख़बरें
शुभेंदु अधिकारी की उम्र 55 साल है। वे पिछले विधानसभा में बीजेपी के नेता विपक्ष थे। वे पुराने राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी तीन बार सांसद रह चुके हैं और यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। शुभेंदु की राजनीतिक यात्रा बहुत दिलचस्प रही है। उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत की थी। उस समय बंगाल में वामपंथी सरकारें चरम पर थीं। वे कांग्रेस की छात्र विंग छात्र परिषद से जुड़े। 1995 में कांथी नगरपालिका के पार्षद बने। 1998 में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस बनाई तो शुभेंदु तुरंत उनके साथ आ गए।

ममता के सबसे बड़े 'दुश्मन' तक का सफर

शुभेंदु अधिकारी लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते थे। 2007 में नंदीग्राम में जो ज़मीन अधिग्रहण विरोध आंदोलन हुआ, उसमें शुभेंदु ने अगुवाई की। इसी आंदोलन ने तृणमूल कांग्रेस को बंगाल में मजबूत किया और शुभेंदु को बड़ा चेहरा बना दिया।

शुभेंदु ने 2009 और 2014 में तमलुक से लोकसभा चुनाव जीता। 2016 में नंदीग्राम से विधायक बने और ममता सरकार में परिवहन मंत्री भी रहे। एक समय वे तृणमूल कांग्रेस में ममता के बाद सबसे ताकतवर नेता माने जाते थे। लेकिन जब ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाना शुरू किया, तो शुभेंदु नाराज हो गए।

शुभेंदु ने 2020 में तृणमूल छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। उन्होंने जोरदार नारा दिया- 'तोलाबाज भाईपो हटाओ' (घूसखोर भतीजे को हटाओ)। इस पर ममता बनर्जी ने शुभेंदु परिवार को 'मीर जाफर' (गद्दार) कहा था।

चुनावी जीत और नई शुरुआत

2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस बार 2026 के चुनाव में उन्होंने फिर कमाल किया। उन्होंने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराया और नंदीग्राम भी बरकरार रखा। इन दोनों बड़ी जीतों ने उनकी हैसियत और मजबूत कर दी। भाजपा नेतृत्व को उनकी सड़क की लड़ाई वाली छवि, साफ-सुथरी बोलचाल और संगठन क्षमता पसंद आई। पिछले पांच साल में विपक्ष में रहते हुए उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा था।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें
शुभेंदु का बंगाल की भाषा, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों से गहरा जुड़ाव माना जाता है। चुनाव के दौरान बीजेपी ने बार-बार कहा था कि बंगाल को 'मिट्टी का बेटा' मुख्यमंत्री मिलेगा।

चुनाव में शुभेंदु की भूमिका

शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के बंगाल में सबसे प्रभावशाली नेता बन चुके हैं। उन्होंने 2007 के नंदीग्राम आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी, जो भूमि अधिग्रहण के खिलाफ था। अब इस ताज़ा चुनाव जीत के बाद वे बंगाल के प्रमुख चेहरे बन गए। इस बार के चुनाव में उनकी मेहनत और रणनीति से भाजपा को भारी सफलता मिली। इस हफ्ते नंदीग्राम में शुभेंदु ने कहा था कि वे दो सीटों में से एक छोड़ देंगे, लेकिन अंतिम फैसला भाजपा की उच्च कमान करेगी।
पश्चिम बंगाल से और ख़बरें

पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। तृणमूल कांग्रेस क़रीब 80 सीटों पर सिमट गई। यह बंगाल में वामपंथी और क्षेत्रीय दलों के लंबे शासन के बाद बीजेपी की पहली सरकार होगी। बीजेपी नेतृत्व ने शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से चुना है। वे विधायक दल के नेता चुन लिए गए। वह अब शनिवार को शपथ ग्रहण करेंगे।

ममता की हार के बाद नयी राजनीति?

बीजेपी का दावा है कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार बंगाल में विकास, कानून व्यवस्था, रोजगार और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करेगी। पार्टी का कहना है कि 'अगले 100 साल तक कमल का फूल यहां खिलेगा'। यह बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के बाद अब नई शुरुआत हो रही है। शुभेंदु अधिकारी की इस जीत को भाजपा के लिए न सिर्फ बंगाल, बल्कि पूरे पूर्वी भारत में ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है।