पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर का कथित स्टिंग वीडियो सामने आने के बाद एआईएमआईएम ने उनकी पार्टी एजेयूपी से बंगाल चुनाव में गठबंधन तोड़ लिया है। वीडियो में ममता बनर्जी को हराने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील से लेकर भाजपा और पीएमओ का जिक्र है।
ओवैसी ने बंगाल में हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ा
टीएमसी के पूर्व नेता हुमायूं कबीर एक कथित स्टिंग वीडियो की वजह से बुरी तरह आरोपों के घेरे में आ गए हैं। वीडियो में कबीर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से जुड़े होने और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क में होने की बात कर रहे हैं। इस वीडियो का राजनीतिक असर हुआ। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने शुक्रवार को हुमायूं कबीर की पार्टी एजेयूपी से गठबंधन तोड़ लिया। टीएमसी ने मांग की है कि ईडी इस मामले की जांच करे।
शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की मिलीभगत से ममता बनर्जी सरकार को हराने के लिए एक हजार करोड़ रुपये की बड़ी साजिश रची जा रही है। पार्टी ने दावा किया कि यह योजना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने के लिए तैयार की गई है।
AIMIM ने तोड़ा गठबंधन
इस विवाद का तुरंत राजनीतिक असर भी देखने को मिला है। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ने की घोषणा कर दी है। AIMIM ने एक बयान में शुक्रवार 10 अप्रैल को कहा, "हुमायूं कबीर के खुलासे ने बंगाल के मुस्लिमों की कमजोरी को दिखा दिया है। AIMIM किसी भी ऐसे बयान से जुड़ नहीं सकती जिसमें मुस्लिमों की एकजुटता और अखंडता पर सवाल उठे। आज से हमने कबीर की पार्टी के साथ अपना गठबंधन वापस ले लिया है।"
अकेले चुनाव लड़ेगी एआईएमआईएम
AIMIM ने कहा, "बंगाल के मुस्लिम देश के सबसे गरीब, उपेक्षित और उत्पीड़ित समुदायों में से एक हैं। दशकों तक सेकुलर शासन के बावजूद उनके लिए कुछ नहीं किया गया। AIMIM का चुनाव लड़ने का उद्देश्य ही वंचित समुदायों को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज देना है। हम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अब स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे और आगे किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।"
कुछ हफ्ते पहले ही असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की AJUP के साथ गठबंधन की घोषणा की थी। हुमायूं कबीर को पिछले साल तृणमूल से निष्कासित किया गया था, जब उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद बनाने का वादा किया था।
वीडियो में क्या-क्या दावा किया गया?
तृणमूल द्वारा जारी वीडियो में हुमायूं कबीर कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्होंने पीएमओ से संपर्क किया था और उन्हें भाजपा शासित राज्यों के नेताओं से समन्वय करने की सलाह दी गई थी। उनमें विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का नाम लिया गया है।
वीडियो में कबीर पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कहा, "मुस्लिमों को बेवकूफ बनाना बहुत आसान है"। साथ ही बाबरी मस्जिद मुद्दे का जिक्र करते हुए उन्होंने कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये एडवांस फंडिंग की मांग की। वीडियो में अल्पसंख्यक वोटों को तृणमूल से डायवर्ट करने की रणनीति बनाने की भी बात कही गई है, जिससे भाजपा को फायदा हो सके। कबीर कथित तौर पर एक हजार करोड़ रुपये के पूरे प्लान का जिक्र भी करते हैं और बताते हैं कि उनमें से 200 करोड़ रुपये पहले ही एडवांस में कथित तौर पर मिल चुके हैं। हालांकि, सत्य हिन्दी ने इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
हुमायूं कबीर का आरोपों से इनकार
हुमायूं कबीर, जिन्हें पिछले साल तृणमूल कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था और बाद में उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) का गठन किया, ने वीडियो को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने इसे "AI जनरेटेड" बताया और तृणमूल नेतृत्व पर उनके खिलाफ घृणित अभियान चलाने का आरोप लगाया।
कबीर ने कहा, "नवंबर 2019 के बाद से मैं किसी भी भाजपा नेता से संपर्क में नहीं हूं। अगर उनके पास कोई सबूत या फोटोग्राफ है तो दिखाएं।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का नाम लिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, पार्टी नेता कुणाल घोष और फिरहाद हाकिम पर "फर्जी स्टिंग ऑपरेशन" चलाने का आरोप लगाया। कबीर ने कहा, "वे मुझसे राजनीतिक रूप से नहीं लड़ सकते, इसलिए AI का इस्तेमाल करके मुझे बदनाम कर रहे हैं। मैं इन सभी नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करूंगा।"
मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कबीर ने कहा, "तृणमूल मुस्लिम वोट खोने से डर रही है, इसलिए उन्होंने मेरी छवि खराब करने के लिए यह फर्जी वीडियो जारी किया है। इस वीडियो ने मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का मजाक उड़ाया है।"
बंगाल में मतदान कब
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। मतगणना 4 मई को होगी। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की सियासी हलचल को तेज कर दिया है। क्योंकि मुस्लिम वोट बैंक पर सबकी नजर है। हालांकि एसआईआर के ज़रिए बड़े पैमाने पर मुस्लिम वोटरों के नाम मतदाता सूची से उड़ा दिए गए हैं। यह आरोप टीएमसी समेत अन्य दलों ने भी लगाया है।