पश्चिम बंगाल में इस महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों का चुनाव अभियान अपने चरम पर पहुँच गया है। पहले दौर में 23 अप्रैल को 152 और दूसरे दौर में 29 अप्रैल को बाकी 142 सीटों के लिए मतदान होगा। वैसे तो तमाम सीटें अहम होती हैं। लेकिन इस बार राज्य की पाँच सीटें सबसे अहम हैं। ये सीटें दावेदारों के लिए नाक और साख का सवाल बन गई हैं और तमाम निगाहें इन पर ही टिकी हैं।
इनमें सबसे अहम है कोलकाता की भवानीपुर सीट। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं। वो पिछली बार उपचुनाव में यहां से चुनी गई थी। उनको यहां भाजपा के शुभेंदु अधिकारी चुनौती दे रहे हैं। शुभेंदु ने ही वर्ष 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता को हराया था। शुभेंदु इस बार भवानीपुर के अलावा नंदीग्राम सीट से भी मैदान में हैं।
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भवानीपुर में सीपीएम ने श्रीजीव विश्वास को टिकट दिया है। लेकिन यहां लड़ाई ममता और शुभेंदु के बीच ही है। ममता बनर्जी का घर इसी इलाके में है। यहां उनको चुनौती देने वाले शुभेंदु किसी दौर में ममता बनर्जी सरकार के अहम सदस्य और ममता के सबसे करीबी थे। लेकिन 2021 के चुनाव से पहले वो भाजपा में शामिल हो गए थे। इन दोनों नेताओं के मैदान में होने से इस बार भवानीपुर सीट नाक और साख की लड़ाई बन गई है।

नंदीग्राम सीट पर कड़ा मुक़बला

पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम सीट पर इस बार भी शुभेंदु भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वो पिछली बार यहाँ जीते थे। नंदीग्राम वही जगह है जहाँ जमीन अधिग्रहण के ख़िलाफ़ हुए आंदोलन ने तृणमूल कांग्रेस के सत्ता तक पहुंचने की राह बनाई थी। तब शुभेंदु ममता बनर्जी के साथ थे। आंदोलन के दौरान पुलिस की फायरिंग में 14 ग्रामीणों की मौत हो गई थी।

तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर पवित्र कर को टिकट दिया है जो कभी शुभेंदु के करीबी थे। एसआईआर के दौरान इस इलाके में जितने वोटरों के नाम कटे हैं उनमें से करीब 95 फीसदी अल्पसंख्यक हैं। इससे चुनावी समीकरण गड़बड़ा सकता है।

पहले यह इलाका वाममोर्चा का गढ़ था और वर्ष 2011 से पहले तक यहाँ से सीपीआई उम्मीदवार जीतता रहा था।

पानीहाटी सीट चर्चा में क्यों?

कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना जिले की पानीहाटी सीट भी अचानक सुर्खियों में है। इसकी वजह बीजेपी की ओर से आरजी कर कांड की पीड़िता की मां को टिकट दिया जाना है। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जीतते रहे हैं। पार्टी ने यहां पूर्व विधायक निर्मल घोष के पुत्र तीर्थंकर घोष को उम्मीदवार बनाया है। अगस्त, 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। तब इस घटना के विरोध और न्याय की मांग में महीनों लंबा आंदोलन चला था। सीपीएम ने इस बार उस आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे कल्तान दासगुप्ता को मैदान में उतारा है।
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सिलीगुड़ी सीट

उत्तर बंगाल के प्रमुख व्यापारिक केंद्र सिलीगुड़ी सीट भी इस बार चर्चा में है। पिछली बार यह सीट बीजेपी ने जीती थी। बीजेपी की ओर से तो पिछली बार जीतने वाले शंकर घोष ही चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बदलते हुए पूर्व मंत्री और सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देब को टिकट दिया है। पिछली बार गौतम सिलीगुड़ी से सटी डाबग्राम-फूलबाड़ी सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के हाथों चुनाव हार गए थे। अब विपक्ष से इस सीट को छीनने की तृणमूल कांग्रेस की कोशिशों ने इस मुक़ाबले को अहम बना दिया है।

बहरामपुर सीट

मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर सीट भी इस बार सबसे अहम सीट के तौर पर उभरी है। इसकी वजह यह है कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी कोई तीन दशक बाद पहली बार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले इसी लोकसभा सीट से वो लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन वर्ष 2024 में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार और क्रिकेटर यूसुफ पठान के हाथों उनको हार का सामना करना पड़ा था। इस बार कांग्रेस को इसी सीट से विधानसभा में अपना खाता खुलने की उम्मीद है। वर्ष 2021 में बहरामपुर सीट बीजेपी के सुब्रत मैत्र ने जीती थी।
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तृणमूल कांग्रेस ने यहां नाडू गोपाल मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है। वैसे तो सीपीएम के अबुल कासिम शेख भी मैदान में हैं। लेकिन यहाँ मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और तृणमूल के बीच ही माना जा रहा है।