ट्रंप का दावा है कि ये टैरिफ अमेरिकी विनिर्माण में नयी जान फूंकेंग, व्यापार घाटे को कम करेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेंगे। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की नीति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा की है। अर्थशास्त्री डैनियल ऑल्टमैन ने सीबीएस न्यूज को बताया कि ट्रंप प्रशासन के पास इतने सारे व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए पर्याप्त वार्ताकार नहीं थे और कई समझौते केवल ढांचागत हैं, जिनमें विस्तृत शर्तें शामिल नहीं हैं।
ट्रंप के नए टैरिफ वैश्विक व्यापार में एक नया अध्याय शुरू करने वाले हैं। भारत सहित कई देशों को अब अपनी व्यापार रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा। 7 अगस्त से लागू होने वाले इन टैरिफ का असर न केवल वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा, बल्कि यह उपभोक्ता कीमतों, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए रूस के साथ ऊर्जा व्यापार और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी।