ईरान की राजधानी तेहरान की सड़कों पर पूर्व सुप्रीम लीडर सैयद अली खामेनेई को आखिरी श्रद्धांजलि देने के लिए भारी भीड़ पूरे शहर में जगह-जगह जमा है। 'एंगेलैब' यानी 'क्रांति चौक' पर सबसे ज्यादा भीड़ है। यह चौक ईरान की इस्लामिक क्रांति की यादों से जुड़ा है।  यहाँ एक बहुत बड़ी मूर्ति है जो मुट्ठी के आकार की है। इसे 'प्रतिरोध की मुट्ठी' (fist of defiance) भी कहा जाता है। यह इस इवेंट का मुख्य प्रतीक है और इसका नारा है: "हमें उठना होगा।" सोमवार 6 जुलाई को भी अमेरिका और इसराइल से खामनेई की हत्या का बदला लेने का नारा लगातार गूंजता रहा। ये नारे ईरान की जनता लगा रही है। लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दे रहे हैं और पोस्टरों में खास तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाया जा रहा है।
अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के चार सदस्यों के पार्थिव शरीर को लेकर काफिला तेहरान की सड़कों से होते हुए मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की तरफ बढ़ रहा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर जनरल हसन हसनजादेह, जो इस पूरी व्यवस्था की देखरेख कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि यह यात्रा लगभग 10 से 12 घंटे तक चलेगी।
खामेनेई और उनके परिवार के ताबूतों को ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर एक विशेष ट्रक पर रखा गया है। इस ट्रक के किनारों को किसी इमाम के रोज़े की जाली (ornamental grating) की तरह सजाया गया है। इस माहौल में इलेक्ट्रॉनिक संगीत के साथ-साथ खामेनेई के पुराने भाषण और इमाम हुसैन की शहादत और तारीफ में पढ़े जाने वाले नौहे और मनक़बत भी गूंज रहे थे। ईरान के मशहूर नौहाख्वानों के नौहों को ईरान के लोग दोहराते देखे गया।
ताज़ा ख़बरें

ईरान के राष्ट्रपति का बयान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा है कि ईरान के लोग "ईरान के सम्मान, प्रगति और गौरव के मार्ग पर चलते रहेंगे"। सोमवार सुबह X पर अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने सभी को सिखाया था कि देश की "सबसे बड़ी संपत्ति" "उसके लोग और उनकी एकता" है।

अगले तीन दिन के कार्यक्रम क्या हैं

7 जुलाई: क़ुम में जनता के लिए अंतिम संस्कार जुलूस और वहां से करबला की रवानगी।
8 जुलाई: नजफ़ में हज़रत अली और कर्बला में इमाम हुसैन के रोज़े (दरगाह) पर ताबूतों की आमद। शाम को ईरान के लिए रवानगी।
9 जुलाई: ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में आयतुल्लाह अली खामेनेई को दफन किया जाएगा।
अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के चार सदस्य इसी साल 28 फरवरी को अमेरिकी खुफिया जानकारी के आधार पर इसराइल और अमेरिका द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए थे। इसी घटना के बाद से अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत हुई थी। सर्वोच्च नेता की मौत के बाद, 2 मार्च को हिजबुल्लाह ने इसराइल पर रॉकेट दागे, जिसके बाद लेबनान भी इस युद्ध की चपेट में आ गया। इसराइल ने इसके जवाब में लेबनान पर भीषण हवाई हमले किए और जमीनी स्तर पर सैन्य आक्रमण (ground invasion) कर दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती इलाकों पर कब्जा कर लिया।
खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाएंगेः ईरानी सेनाईरान की सेना के एक सीनियर कमांडर का कहना है कि सेना, इस्लामिक क्रांति के शहीद नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाएगी और उनकी लीडरशिप में हासिल की गई सैन्य ताकत को और मजबूत करेगी। सेना के चीफ ऑफ़ स्टाफ़ और डिप्टी कोऑर्डिनेटर रियर एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी ने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई की लीडरशिप ही देश की सेना के विकास, आधुनिकीकरण और दुश्मन को रोकने की ताकत (डिटेरेंट पावर) के पीछे मुख्य वजह रही है।
दिवंगत नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों के लिए सेना के एक आवास केंद्र के दौरे के दौरान सय्यारी ने कहा कि ईरान की सेना की उपलब्धियों का श्रेय अयातुल्ला खामेनेई की लीडरशिप को जाता है। "आज हमने जो कुछ भी हासिल किया है, वह हमारे शहीद नेता के मार्गदर्शन की वजह से है, और आगे भी यह उनके बलिदान की बदौलत ही होगा।" सय्यारी ने कहा, "हम अपने शहीद नेता की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। यही वह मिशन है जिसके लिए हम जीते हैं।"