चीन और पाकिस्तान ने युद्ध रोकने के लिए एक पांच सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्ताव में मोटी-मोटी बातें की गई हैं, मगर ईरान की मांगों पर कोई ठोस नहीं कहा गया है। तो क्या ईरान मानेगा?
क्या चीन अब ईरान इसराइल-अमेरिका के बीच युद्धविराम कराएगा? चीन और पाकिस्तान ने मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में चल रही जंग को रोकने के लिए एक पांच सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव मंगलवार को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक दार की मुलाकात के दौरान सामने आया। डोनाल्ड ट्रंप युद्ध से बाहर निकलने को बेचैन बताए जा रहे हैं, लेकिन ईरान इसको मानने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान, मिश्र और तुर्की जैसे देशों की मध्यस्थता की कोशिशों के बीच अब चीन और पाकिस्तान का साझा प्रयास सामने आया है। चीन और पाकिस्तान दोनों ईरान के क़रीबी देश हैं।
दोनों देशों ने कहा है कि तुरंत लड़ाई बंद होनी चाहिए और शांति की कोशिशें शुरू कर दी जाएं। लेकिन क्या यह सफल हो पाएगा? क्या ट्रंप को युद्ध से बाहर निकलकर छवि बचाने का मौक़ा मिलेगा? और क्या ईरान पाकिस्तान चीन के पाँच सूत्रीय योजना को मानेगा?
इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर इस पाँच सूत्रीय योजना में क्या है और दोनों देशों ने क्या साझा बयान जारी किया है। चीन-पाक के 5 सूत्रीय प्रस्ताव में शामिल हैं-
1. तुरंत युद्ध को रोकें
चीन और पाकिस्तान ने कहा है कि सभी पक्ष तुरंत लड़ाई रोक दें। संघर्ष और बढ़ने न पाए। युद्ध प्रभावित इलाकों में मानवीय मदद तुरंत पहुंचाई जाए।
2. जल्द से जल्द शांति वार्ता शुरू करो
ईरान और खाड़ी देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा का सम्मान होना चाहिए। बातचीत और कूटनीति ही समस्याओं का हल है। सभी पक्ष शांतिपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाने का वादा करें। किसी भी पक्ष को बल प्रयोग या धमकी नहीं देनी चाहिए।
3. सिविलियन और गैर-सैन्य ठिकानों की सुरक्षा
युद्ध में आम नागरिकों और गैर-सैन्य जगहों पर हमला नहीं होना चाहिए। चीन और पाकिस्तान ने अपील की कि एनर्जी फैसिलिटी, पानी बनाने वाले प्लांट, बिजली व्यवस्था और न्यूक्लियर पावर प्लांट जैसे अहम ठिकानों पर हमले तुरंत बंद किए जाएं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरा पालन हो।
4. जहाजरानी और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का बेहद अहम रास्ता है। यहां से 20% तेल गुजरता है। दोनों देशों ने कहा कि फंसे हुए जहाजों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सिविलियन और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित और जल्दी गुजरने दिया जाए। जल्द से जल्द होर्मुज में सामान्य नौवहन बहाल किया जाए।
5. संयुक्त राष्ट्र चार्टर को सर्वोच्च मानो
बहुपक्षीय विचारों को बढ़ावा दें। संयुक्त राष्ट्र की भूमिका मज़बूत हो। यूएन चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर एक व्यापक शांति ढांचा बनाया जाए ताकि स्थायी शांति कायम हो सके।प्रस्ताव कितना मज़बूत
प्रस्ताव में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई बंद होने, प्रतिबंध हटाने जैसी ईरान की मुख्य मांगों पर कोई स्पष्ट बात नहीं कही गई। इसराइल और अमेरिका के रुख पर भी कुछ नहीं कहा गया। सिर्फ सामान्य अपीलें की गई हैं, कोई ठोस समयसीमा या गारंटी नहीं दी गई।
क्या इससे जंग रुकेगी?
जानकारों का कहना है कि यह प्रस्ताव 'मोटी-मोटी बातें' भर है। ईरान पहले ही अमेरिका के प्रस्तावों को अव्यावहारिक कहकर ठुकरा चुका है। इसराइल भी ईरान पर सख्त रुख रखता है। ट्रंप प्रशासन अभी होर्मुज खुलवाने और ईरान से डील करने की कोशिश में है। ऐसे में सवाल है कि क्या ट्रंप को इस प्रस्ताव से आत्मसम्मान के साथ जंग से बाहर निकलने का रास्ता मिल जाएगा? मौजूदा हालात क्या?
होर्मुज अभी भी ब्लॉक है, तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर हैं। ईरान मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है। अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा प्लांट नष्ट करने की धमकी दी हुई है। अभी यह साफ नहीं है कि ईरान, इसराइल या अमेरिका इस पांच सूत्रीय प्रस्ताव को कितना गंभीरता से लेंगे। लेकिन यह प्रस्ताव दिखाता है कि चीन और पाकिस्तान मिलकर मध्य पूर्व में शांति की कोशिश कर रहे हैं।
चीन और पाकिस्तान दोनों ईरान के करीबी देश हैं। चीन खाड़ी क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। पाकिस्तान भी क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है क्योंकि उसे तेल और व्यापार पर असर पड़ रहा है। लेकिन दोनों देशों का प्रस्ताव अमेरिका और इसराइल को सीधे बांधने वाला नहीं लगता। दुनिया इस वक्त इस प्रस्ताव पर नजर रखे हुए है कि क्या इससे जंग रुकती है या सिर्फ एक और कागजी प्रस्ताव बनकर रह जाएगा।