होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अब अपने सहयोगी देशों को क्यों चेताया? ईरान युद्ध में सहयोग करने के लिए दबाव डाल रहे हैं या फिर अमेरिकी तेल बेचकर मुनाफा कमाना चाह रहे हैं?
ईरान युद्ध में बुरी तरह फँसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सहायता नहीं मिलने पर ब्रिटेन जैसे अपने सहयोगी देशों पर बौखला गए हैं। उनको धमकाते हुए उन्होंने चेताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कमी झेल रहे देशों के पास सिर्फ दो रास्ते हैं- या तो अमेरिका से तेल खरीदें, या खुद जाकर होर्मुज से तेल ले आएं।
ट्रंप ने सीधे अपने सहयोगी देशों से साफ़-साफ़ कह दिया है कि अमेरिका हमेशा उनकी मदद नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी अभियान में शामिल नहीं हुए, उन्हें अब खुद लड़ना सीखना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा,
होर्मुज बंद होने से यूनाइटेड किंगडम जैसे जिन देशों को जेट फ्यूल नहीं मिल पा रहा है और जिसने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है, उनको मेरी सलाह है- नंबर 1 – अमेरिका से खरीदो, हमारे पास बहुत है। नंबर 2 – थोड़ी हिम्मत जुटाओ, होर्मुज जाओ और बस ले लो। डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति
उन्होंने आगे लिखा, 'तुम्हें अब खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। अमेरिका अब तुम्हारी मदद नहीं करेगा, जैसा तुम हमारी मदद को नहीं आए थे। ईरान को क़रीब-क़रीब तबाह कर दिया गया है। मुश्किल काम हो गया। अब जाओ और अपना तेल खुद ले आओ!'
ट्रंप क्यों नाराज़ हैं?
अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सीमित सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन करता है। इस ब्लॉकेड से वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और 75 डॉलर प्रति बैरल से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। कई देशों में जेट फ्यूल और पेट्रोल की कमी हो गई है। कहा जा रहा है कि अमेरिका पर भी इसका असर पड़ा है। इस बीच ट्रंप ने पहले सहयोगी देशों से अपील की थी कि वे युद्धपोत भेजकर होर्मुज को सुरक्षित करें। लेकिन ब्रिटेन समेत बड़े मित्र देशों ने साफ़ इनकार कर दिया या ज़्यादा मदद नहीं की। अब ट्रंप नाराज़ हैं और कह रहे हैं कि अमेरिका अकेला सब नहीं संभालेगा।
ईरान की नई चाल
इस बीच ईरान की संसद की एक अहम समिति ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल यानी टैक्स लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है। यह टोल ईरान की अपनी मुद्रा रियाल में लिया जाएगा। योजना में अमेरिका और इसराइल से जुड़े जहाजों पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। जो देश ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं, उनके जहाजों को भी रोकने की बात कही गई है। ईरान कह रहा है कि वह होर्मुज पर अपना संप्रभु अधिकार लागू कर रहा है।ट्रंप की और धमकियां
ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि अगर ईरान शांति समझौता नहीं करता है और होर्मुज नहीं खोलता है तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और तेल सुविधाओं को पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने खार्ग द्वीप को फिर से निशाना बनाने की बात भी कही, जहां से ईरान अपना ज्यादातर तेल निर्यात करता है। व्हाइट हाउस ने पहले 6 अप्रैल तक का समय दिया था, लेकिन अब रिपोर्टें हैं कि ट्रंप सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने या रोकने पर विचार कर रहे हैं।
ईरान ने अमेरिका के प्रस्तावों को बेहद सख़्त, अव्यावहारिक और तर्कहीन बताया है। ईरान अब भी इसराइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिक उसके क्षेत्र में घुसते हैं, तो वह खाड़ी अरब देशों पर जमीनी हमला कर सकता है और फारस की खाड़ी में माइन्स बिछा सकता है।
दुनिया पर असर
होर्मुज ब्लॉकेड से यूरोप, एशिया और कई अन्य देशों में ईंधन संकट गहरा रहा है। तेल की ऊंची क़ीमतों से महंगाई बढ़ रही है और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ट्रंप का यह बयान काफी विवादास्पद है। कई लोग इसे सहयोगी देशों के प्रति असम्मानजनक बता रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि ट्रंप सहयोगियों को जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं। अभी तक होर्मुज पूरी तरह नहीं खुल पाया है और तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इसी बीच, ट्रंप की यह धमकी उसके अपने सहयोगियों को और भड़का सकती है।